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रूप चौदस पर करें ये कार्य, मिलेगी पापों से मुक्ति

रूप चौदस पर करें ये कार्य, मिलेगी पापों से मुक्ति

डिजिटल डेस्क। दिवाली के एक दिन पहले रूप चौदस का पर्व मनाया जाता है, जिसे नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इस बार ये पर्व 26 अक्टूबर यानी कि आज मनाया जा रहा है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातः काल सरसों का तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियां जल में डालकर स्नान करने से नरक यातना से मुक्ति मिलती है।

इस दिन विधि-विधान से पूजा-साधना करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन संध्या के समय दीपदान की प्रथा है। इस दिन यमराज के लिए दीप दान किया जाता है। नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है, क्योंकि दिवाली से एक दिन पहले रात के समय दीप प्रज्वलित किए जाते हैं और इस प्रकाश पुंज से अंधेरे को दूर भगा दिया जाता है। नरक चतुर्दशी को दीप जलाने की प्रथा के बारे में कई पौराणिक कथाएं भी हैं।

कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंधन से मुक्त कर उन्हें अंगीकार किया था। तब से इस रात्रि में दीपकों की बारात सजाकर कृष्ण जी को बधाई दी जाती है।

इस दिन के व्रत और पूजा के बारें  में एक और कथा यह है कि एक बार रन्ति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने कभी अज्ञातवश भी कोई पाप नहीं किया था किन्तु जब उनकी मृत्यु का समय आया तो उनके सामने यमदूत आए। यमदूत को अपने सामने देख राजा अचरज में आए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म किया ही नहीं फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का अर्थ है कि मुझे नर्क जाना होगा।

आप मुझ पर कृपा कर बताओ कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। पुण्यात्मा राजा की विनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा हे राजन एक बार आपके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण लौट गया यह उसी कर्म का फल है। यमदूत की इस बात को सुनने पर राजा ने यमदूतों से कहा कि मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे एक वर्ष का और समय दें। यमदूत ने राजा को एक वर्ष की मांग को स्वीकार कर लिया। राजा अपनी पीड़ा से परेशान हो कर ऋषियों के पास गए और उन्हें अपनी सब व्यथा सुनाई और उनसे पूछा कि कृपया कर आप मुझे इस पाप से मुक्ति का कोई उपाय बताएं।

तब ऋषिगण बोले हे राजन् आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की नरक या रूप चतुर्दशी का व्रत करें और ब्रह्मणों को भोजन करवा कर उनसे उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। तब जैसे ही नरक चतुर्दशी आई तब राजा ने वैसा ही किया जैसा कि ऋषियों ने उनको बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में भी स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है।

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर सरसों का तेल लगाकर और पानी में चिरचिरी (अपमार्ग) के पत्ते डालकर उससे स्नान करने का बड़ा महत्व होता है। स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर या विष्णु मंदिर में भगवान का दर्शन करना अत्यंत पुण्यकारी मना जाता है। इससे पाप कर्म का नाश होता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को अनेक कारणों से नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी और छोटी दीपावली के नाम से जाना जाता है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।