दैनिक भास्कर हिंदी: आधे हिरण और आधे पक्षी, 'शिव' के इन अवतारों के बारे में नहीं जानते होंगे आप

August 3rd, 2017

डिजिटल डेस्क, भोपाल। भगवान भोलेनाथ बहुत ही भोले हैं, तभी तो वे अपने भक्तों का मन के मुताबिक ही वरदान दे देते हैं, लेकिन उन्हें प्रसन्न करना इतना आसान नही है। शिव के हर अवतार एक महिमा छिपी है। प्रत्येक अवतार में उन्होंने अपने भक्तों का उद्धार किया है। शिव के प्रिय सावन माह में हम आपको उनके कुछ ऐसे अवतारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में शायद ही आप जानते होंगे...

वीरभद्र अवतार: भगवान शिव का यह अवतार तब हुआ थाए जब दक्ष के यज्ञ में माता सती ने अपना शरीर त्याग दिया था। जब भगवान शिव को यह पता चलाए तो गुस्से में उन्होंने अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे क्रोध पूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा के भाग से भंयकर वीरभद्र प्रकट हुआ। जिसने दक्ष का सिर काटकर उसके घमंड को चूर-चूर किया था।

पिप्पलाद अवतार: भगवान शिव के इस अवतार का बड़ा महत्व है। शनि पीड़ा का समाधान पिप्पलाद की कृपा से ही संभव हो सकता है। 

नंदी अवतार: भगवान शंकर का नंदीश्वर अवतार सभी जीवों से प्रेम का संदेश देता है। नंदी (बैल) कर्म का प्रतीक है, जिसका अर्थ है कर्म ही जीवन का मूल मंत्र है। 

भैरव अवतार: शिव महापुराण में भैरव को परमात्मा शंकर का पूर्ण रूप बताया गया है।

शरभावतार:  शरभावतार भगवान शंकर का छटा अवतार है। शरभावतार में भगवान शंकर का स्वरूप आधा मृग हिरण तथा शेष शरभ पक्षी (पुराणों में वर्णित आठ पैरों वाला जंतु जो शेर से भी शक्तिशाली था) का था।

गृहपति अवतार: भगवान शंकर का सातवां अवतार है गृहपति। विश्वानर नाम के मुनि तथा उनकी पत्नी शुचिष्मती की इच्छा थी कि उन्हें शिव के समान पुत्र प्राप्ति हो। मुनि विश्वनार ने काशी में भगवान शिव के वीरेश लिंग की आराधना की और घोर तप किया। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने शुचिष्मति के गर्भ से पुत्र रूप में प्रकट हुए।

बजरंगबली: भगवान शिव का हनुमान अवतार सभी अवतारों में श्रेष्ठ माना गया है

अवधूत अवतार: भगवान शंकर ने अवधूत अवतार लेकर इंद्र के अंहकार को चूर किया था।

भिक्षुवर्य अवतार: भगवान शंकर देवों के देव हैं। संसार में जन्म लेने वाले हर प्राणी के जीवन के रक्षक भी हैं। भगवान शंकर का भिक्षुवर्य अवतार यही संदेश देता है।

सुरेश्वर अवतार: इस अवतार में भगवान शंकर ने एक छोटे से बालक उपमन्यु की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे अपनी परम भक्ति और अमर पद का वरदान दिया।

किरात अवतार: इस अवतार में भगवान शंकर ने पाण्डुपुत्र अर्जुन की वीरता की परीक्षा ली थी। 

सुनट नर्तक अवतार: पार्वती के पिता हिमाचल से उनकी पुत्री का हाथ मागंने के लिए शिवजी ने सुनट नर्तक वेष धारण किया था। हाथ में डमरू लेकर शिवजी नट के रूप में हिमाचल के घर पहुंचे और नृत्य करने लगे। नटराज शिवजी ने इतना सुंदर और मनोहर नृत्य किया कि सभी प्रसन्न हो गए। जब हिमाचल ने नटराज को भिक्षा मांगने को कहा तो नटराज शिव ने भिक्षा में पार्वती को मांग लिया था।

ब्रह्मचारी अवतार: दक्ष के यज्ञ में प्राण त्यागने के बाद जब सती ने हिमालय के घर जन्म लिया तो शिवजी को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया। पार्वती की परीक्षा लेने के लिए शिवजी ब्रह्मचारी का वेष धारण कर उनके पास पहुंचे थे।

यक्ष अवतार: यक्ष अवतार शिवजी ने देवताओं के गलत और झूठे अहंकार का नाश करने के लिए धारण किया था।