दैनिक भास्कर हिंदी: श्रावण मास में करे बिल्व पत्र के उपाय जो दिलाएंगे सुख-समृद्धि

July 13th, 2018

डिजिटल डेस्क । श्रावण मास में बिल्व पत्र के उपाय सुख-समृद्धि के साथ स्वास्थ्य लाभ भी देते हैं। इसके बारे में शास्त्रों में भी लिखा है। शिव पुराण में बिल्व वृक्ष को अत्यधिक चमत्कारिक बताया गया है। शिव ने इसे कल्पवृक्ष के समान सभी कामनाओं की पूर्ती करने वाला बताया है। ये वृक्ष सम्पन्नता का प्रतीक है, बिल्व पत्र अत्यधिक पवित्रता प्रदान करने वाले व समृद्धि देने वाले है। शिव के अत्यधिक प्रिय बिल्वपत्र अनेक गुणों से सम्पन्न हैं।

 

ज्योतिष और आयुर्वेद में भी बिल्व पत्र को अत्यधिक महत्व देखने को मिलता है। यदि धन के आगमन में बाधाएं आ रही हो अथवा धन से सम्बंधित किसी भी प्रकार की समस्या परेशान कर रही हो तो शिवलिंग पर बिल्व पत्र अर्पित करना चाहिए। जन्मकुंडली के दूसरे भाव की मजबूती हेतु ये अत्यधिक सटीक उपाय है । कोई गम्भीर कष्ट हो अथवा मृत्यु भय निरंतर परेशान कर रहा हो अथवा मेडिकल उपचार काम न कर रहे हो, असाध्य रोग से मुक्ति हेतु बिल्वपत्र का पूजन कर उसे शिवलिंग पर चढाना चाहिये।

 

 

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गुप्त रोग भी बिल्व प्रयोग से शांत होते है। बिल्व पत्र के सात दिन तक सोने से पूर्व मुहं में रखने से स्वप्न दोष समाप्त हो जाता है। पुराणों में द्वादशी तिथि व रविवार के दिन बिल्व वृक्ष के पूजन का महत्व बताया गया है, इस पूजन से व्यक्ति ब्रह्महत्या जैसे महापाप से भी मुक्त हो जाता है। बिल्व वृक्ष के मूल में शिव का वास होता है, बिल्व वृक्ष के मूल का नित्य पूजन करने वाले भक्त किसी भी समस्या से हमेशा निवृत रहता है।

 

आयुर्वेद में बिल्व फल को पेट के लिए अत्यधिक लाभकारी बताया गया है। आचार्य चरक व आचार्य सुश्रुत दोनों ने ही बिल्व फल को संग्राही बताया है। ये पाचन संस्थान हेतु दिव्य औषधि का कार्य करती है।

 

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बिल्वपत्र की महिमा

 

बिल्ववृक्ष साक्षात् शंकररूप है। ब्रह्मा आदि देवता शक्ति प्राप्त करने के लिए बिल्ववृक्ष के नीचे आकर बैठते हैं। आशुतोष शिव को बिल्वपत्र कितना प्रिय है, इसका अनुमान इस कथा से लगाया जा सकता है। एक व्याध (बहेलिया) शिकार के लिए वन में गया। शिकार कर लौटते समय थकान के कारण एक वृक्ष के नीचे सो गया। जागने पर उसने देखा कि रात्रि के घोर अंधकार के कारण घर लौटना असंभव है, अत: जंगली पशुओं के भय से वो एक वृक्ष के ऊपर जाकर बैठ गया। 

 

भाग्यवश उसदिन शिवरात्रि थी और जिस वृक्ष पर वो बैठा था, वो बिल्ववृक्ष था जिसकी जड़ में अति प्राचीन शिवलिंग था। सुबह शिकार के लिए जल्दी निकलने के कारण उसने कुछ खाया-पिया नहीं था। इससे उसका स्वाभाविक ही उपवास हो गया। सोने पर सुहागा तब हुआ जब वसन्त की रात्रि में ओस की बूंदों से भीगा एक बिल्वपत्र उसके अंगों से लगकर उस शिवलिंग पर जा गिरा। इससे आशुतोष शिव के तोष का पारावार न रहा। जिसका फल ये हुआ की जीवन भर हिंसक कर्म करने के बाद भी उस व्याध (शिकारी) को शिवलोक की प्राप्ति हुई।

 

बेलपत्रों द्वारा शिवजी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करने वाला और सम्पूर्ण दरिद्रता का नाश करने वाला है। बेलपत्र चढ़ाने का वो फल है जो एक कमलपुष्प चढ़ाने का है। बेलपत्र से बढ़कर शिवजी को प्रसन्न करने वाली दूसरी कोई वस्तु नहीं है।

 

 

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  • जो मनुष्य 'ॐ नम: शिवाय'  इस पंचाक्षर मन्त्र से अखण्ड बेलपत्रों द्वारा भगवान शिव का पूजन करता है, वो इस लोक में ऐश्वर्यवान होकर अंत में शिवलोक को प्राप्त होता है।
  • बिल्ववृक्ष के दर्शन, स्पर्श और वंदन से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
  • अंत समय में मनुष्य के सारे शरीर में बिल्ववृक्ष के मूल (जड़) की मिट्टी लगा देने से व्यक्ति परमगति प्राप्त करता है।
  • श्रावण मॉस में बेलपत्रों से भगवान शिव की पूजा करने पर ब्रह्महत्यादि पापों से छुटकारा मिल जाता है।
  • बेलवृक्ष के नीचे बैठकर जो मनुष्य मंत्रजाप करता है, वो पुरश्चरण का (सवा लाख का) फल प्राप्त करता है और उसे धन-धन्य लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  • श्रावण मॉस में बिल्ववृक्ष के मूल में जो मनुष्य दीप जलाता है वो तत्त्वज्ञान से पूर्ण (ज्ञानी) हो जाता है।
  • बिल्ववृक्ष के मूल में किसी शिवभक्त को भोजन कराने से करोड़ों मनुष्यों को भोजन कराने का फल मिलता है।
  • विष्णुप्रिया लक्ष्मीजी के वक्ष:स्थल से प्रादुर्भूत हुआ बिल्ववृक्ष

 

लक्ष्म्या: स्तनत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्। 

बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।।

अर्थात्- बिल्ववृक्ष महालक्ष्मीजी के वक्ष:स्थल से उत्पन्न हुआ और महादेवजी का प्रिय है, मैं एक बिल्वपत्र शिवार्पण करता हूँ।

 

 

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बिल्वपत्र तोड़ने के नियम

चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि को, संक्रान्ति व सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़ने चाहिए। किन्तु बेलपत्र शंकरजी को बहुत प्रिय हैं अत: इन तिथियों में पहले दिन का रखा हुआ बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। यदि नए बेलपत्र न मिलें तो चढ़ाए हुए बेलपत्र को ही धोकर बार-बार चढ़ाया जा सकता है।

 

बिल्वपत्र अर्पित करने का मन्त्र

भगवान शिव को बिल्वपत्र कई प्रकार के मन्त्र बोलते हुए अर्पित किया जा सकता है-

नमो बिल्मिने च कवचिने च नर्मो वर्मिणे च वरूथिने च । 
नम: श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुभ्याय चाहनन्याय च।। 
श्रीसाम्बशिवाय नम:। बिल्वपत्राणि समर्पयामि। 

एवं 

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्। 
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।। 

एवं

ॐ नम: शिवाय इस मन्त्र का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर बिल्वपत्र समर्पित किए जा सकते हैं। मन्त्र बोलने में असमर्थ हैं तो केवल 'शिव' 'शिव' कहकर भी बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं।

 

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