रुद्राक्ष महत्व: शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है रुद्राक्ष, जानें इसके प्रकार और विशेषता

March 1st, 2022

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में हमेशा से ही रुद्राक्ष के महत्व की चर्चा रही है। वैसे तो रुद्राक्ष एक फल की गुठली मात्र है, लेकिन पुराणों की मानें तो रुद्राक्ष के दिव्य बीज भगवान शिव के आसुओं से बने हैं। ऐसे में इसे भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है। तमाम तरह के रत्नों में रुद्राक्ष का अपना एक अलग स्थान है। भले ही रुद्राक्ष बाकी रत्नों कि तरह प्रकाशमान न हो, मगर ये भगवान शिव को बेहद प्रिय है। ये छोटे-छोटे बीज स्वयं में भोलेनाथ का वरदान हैं, यही कारण है कि शिव भक्त इसे किसी न किसी रूप में धारण करते हैं। 

कहा जाता है कि रुद्राक्ष पहनने से इंसान की मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं। जो इसे धारण कर भोलेनाथ की पूजा करता है उसे जीवन के अनंत सुखों की प्राप्ति होती है। तमाम आकारों में पाए जाने वाले रुद्राक्ष के हर एक मुख की एक अलग विशेषता होती है। आइए जानते हैं रुद्राक्ष के हर मुख का महत्व....

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विभिन्न प्रकार के रुद्राक्षों का महत्व

1. एक मुखी
इसे साक्षात् शिव का स्वरूप कहा गया है। इसे धारण करने से जीवन में किसी तरह की कमी नहीं रहती। सिंह राशि वालों के लिए ये बहुत शुभ माना जाता है। जिनकी कुंडली में सूर्य से सम्बंधित समस्या है, उन्हें इसे धारण करना चाहिए।
2. दो मुखी रुद्राक्ष
 पुराणों में दोमुखी रूद्राक्ष को शिव-शक्ति का स्वरुप माना जाता है। कर्क राशि वालों के लिए यह रुद्राक्ष उत्तम परिणाम देता है। इसे धारण करने से आत्मविश्वास और मन की शांति प्राप्त होती है।
3. तीन मुखी रुद्राक्ष
इस रूद्राक्ष में ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश की त्रिगुणात्मक शक्तियां होतीं हैं। यह परम शांति, खुशहाली दिलाने वाला रुद्राक्ष है। इसे धारण करने से घर में सुख-संपत्ति, यश, सौभाग्य का लाभ होता है। मेष और वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के लिए यह अच्छा माना जाता है।
4. चार मुखी रुद्राक्ष
से ब्रह्मा का रूप माना जाता है। मिथुन और कन्या राशि के लिए यह सर्वोत्तम रुद्राक्ष है। यह इंसान को जीवन का उद्देश्य ,काम और मोक्ष देने वाला है। त्वचा के रोगों, मानसिक क्षमता, एकाग्रता और रचनात्मकता में इसका विशेष लाभ होता।
5. पांच मुखी रुद्राक्ष
इसे रूद्र का साक्षात् स्वरूप बताया है। यह पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है एवं माला के लिए इसी रूद्राक्ष का उपयोग किया जाता है। इसको पहनने से मंत्र शक्ति और ज्ञान प्राप्त होता है। इसका संबंध बृहस्पति ग्रह से है।

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6. छःमुखी रूद्राक्ष
इसे भगवान कार्तिकेय का रूप माना गया है। इसे ज्ञान और आत्मविश्नास के लिए खास माना जाता है। ये शुक्र ग्रह के लिए लाभकारी होता है।
7. सात मुखी रुद्राक्ष
इसको सप्तऋषियों का स्वरूप माना जाता है। इससे आर्थिक संपन्नता प्राप्त होता है। इसका संबंध शनि ग्रह से है। इसके धारण से मंत्रों के जप का फल प्राप्त होता है।
8. अष्टमुखी रूद्राक्ष
यह रुद्राक्ष अष्टभुजा देवी और देवों में सबसे पहले पूजे जाने वाले गणेशजी का स्वरुप है। इसे धारण करने से दिव्य ज्ञान की प्राप्ति, और मुकदमों में सफलता प्राप्त होती है। अष्टमुखी रुद्राक्ष अनेक प्रकार के शारीरिक रोगों को भी दूर करता है।
9. नौ मुखी रुद्राक्ष
नौमुखी रूद्राक्ष नवदुर्गा तथा नवग्रह का स्वरुप होने के कारण अधिक फलदायक और सुखदायक है। यह अकाल मृत्यु दूर हटानेवाला, धन, यश और कीर्ति प्रदान करने में लाभदायक है।
10. दस मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरुप माना जाता है। इसे धारण करने से दमा, गठिया, पेट, और नेत्र संबंधी रोगों से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा मुख्य रूप से नाकारात्मक शक्तियों से बचाता है।
11. शिव-पारवती रुद्राक्ष
इसे शिव तथा शक्ति का मिला हुआ स्वरूप माना गया है। यह प्राकृतिक रूप से वृक्ष पर ही जुड़ा हुआ उत्पन्न होता है। इसे धारण करने पर शिव तथा शक्ति की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है, यह आर्थिक रूप से पूर्णं सफलता दिलाता है।