Shardiya Navratri 2026: मां कूष्मांडा की पूजा से दूर होते हैं कष्ट, रोग और संकट, जानिए पूजा विधि और शक्तिशाली मंत्र

डिजिटल डेस्क, भोपाल। शारदीय नवरात्रि का पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। वहीं नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है। उनकी मंद मुस्कान सृजन, आशा और आनंद का प्रतीक मानी जाती है।
नवरात्रि में उनकी आराधना भक्तों को आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा देती है। मां कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है। आइए, जानते हैं मां कूष्मांडा का स्वरूप, प्रिय भोग, पूजा विधि और मंत्र...
कौन हैं मां कूष्मांडा?
मां कूष्मांडा मां दुर्गा का चौथा स्वरूप हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था और सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की रचनाकार और ब्रह्मांड की मूल शक्ति माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां कूष्मांडा अपने भक्तों के जीवन से नकारात्मकता दूर करती हैं और उन्हें सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। उनकी आराधना से व्यक्ति में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ने की धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है।
कैसा है मां कूष्मांडा का स्वरूप?
मां कूष्मांडा का स्वरूप बेहद दिव्य और तेजस्वी माना जाता है। उनके चेहरे पर मंद मुस्कान रहती है, जो सृजन, ऊर्जा और आनंद का प्रतीक है। धार्मिक चित्रों में उन्हें आठ भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनकी आठों भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र, गदा और जपमाला जैसे प्रतीकात्मक अस्त्र-शस्त्र या वस्तुएं दिखाई जाती हैं। उनका सिंह वाहन शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक है। मां कूष्मांडा का तेज सूर्य के समान माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य को ऊर्जा और प्रकाश देने वाली शक्ति भी उन्हीं में समाहित है। उनकी पूजा भक्तों को जीवन में साहस, उत्साह और नई शुरुआत की प्रेरणा देती है।
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पूजा विधि
- पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ करें।
- चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा या मां कूष्मांडा की तस्वीर अथवा प्रतिमा स्थापित करें।
- घी या तेल का दीपक जलाएं।
- इसके बाद मां को प्रणाम करके पूजा का संकल्प लें।
- मां को जल या गंगाजल अर्पित करें।
- इसके बाद अक्षत, कुमकुम, रोली, चंदन और फूल चढ़ाएं।
- मां को लाल, पीले या अन्य सुगंधित फूल अर्पित करें।
- मां कूष्मांडा को मालपुआ, मिठाई, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें।
- मां कूष्मांडा के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- दुर्गा चालीसा या मां कूष्मांडा की स्तुति पढ़ें।
- अब मां कूष्मांडा की आरती करें।
- पूजा के अंत में परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य तथा समृद्धि की प्रार्थना करें।
मां कूष्मांडा को कौन-सा भोग लगाएं?
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाने की विशेष मान्यता है। इसके अलावा मौसमी फल, मिश्री, मिठाई और अन्य दूध से बनी सात्विक मिठाइयां या घर में तैयार किया गया शुद्ध सात्विक प्रसाद भी अर्पित किए जा सकते हैं।
मां कूष्मांडा के मंत्र
मां कूष्मांडा की पूजा में मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार नीचे दिए गए मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
1. मां कूष्मांडा का बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं देव्यै नमः॥
2. मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र
वन्दे वाञ्छितकामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥
3. मां कूष्मांडा का सरल मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
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Created On :   13 Oct 2026 6:03 PM IST













