शिक्षा: मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 551 कॉलेजों से 98.60 करोड़ रुपए नहीं लिए, पहुंचाया लाभ

मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 551 कॉलेजों से 98.60 करोड़ रुपए नहीं लिए, पहुंचाया लाभ
संबद्ध कॉलेजों से 23.17 करोड़ जीएसटी नहीं लिया, नोटिस मिला तो खजाने से जमा किया

डिजिटल डेस्क, भोपाल। जबलपुर स्थित मप्र आयुर्विज्ञान विवि (मेडिकल यूनिवर्सिटी) ने प्रदेश के 551 निजी-सरकारी मेडिकल, डेंटल, आयुष पैथियों के कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेजों से 2020-21 से 2022-23 के बीच एंडोमेंट फंड (विन्यास निधि) 98.60 करोड़ की वसूली ही नहीं की। जबकि मप्र शासान ने यूनिवर्सिटी को 2017 में एंडोमेंट फंड वसूली के लिए सख्त आदेश दे रखे हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने शासन के आदेशों को भी नजरअंदाज कर दिया। दरअसल, एंडोमेंट फंड, यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों-संस्थाओं से वसूला जाता है, ताकि प्रतिकूल परिस्थितियों में शिक्षकों व छात्रों के हितों के लिए इसका उपयोग किया जा सके। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने न तो छात्र हित को ध्यान में रखा और न ही शिक्षकों के हितों को। एंडोमेंट फंड का उपयोग उस समय किया जाता है जब कोई कॉलेज बंद होने अथवा शिक्षकों को वेतन नहीं देने और कॉलेजों द्वारा छात्रों की जमानत राशि वापस नहीं करने पर यूनिवर्सिटी इस फंड का उपयोग करती है। यह फंड, संबद्ध कॉलेजों की सोसायटी द्वारा यूनिवर्सिटी के पास जमा करवाई जाती है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने संबद्ध कॉलेजों से फंड नहीं लेकर कॉलेजों को अनुचित लाभ पहुंचाया है। एंडोमेंट फंड नहीं लेने के लिए यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने किसी की जिम्मेदारी भी तय नहीं की।

यह भी पढ़े -प्रदेश में एक ही आईडी पर मिल सकेगा सभी सरकारी योजनाओं का लाभ, नागरिकों की तैयार होगी महाआईडी

जीएसटी भी नहीं लिया

यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों से 2017-18 से 2022-23 तक कॉलेजों से संबद्धता शुल्क का 128.78 करोड़ रुपए तो ले लिया, लेकिन इस पर जीएसटी के 23.17 करोड़ रुपए लिए ही नहीं। जबकि संयुक्त निदेशक जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय, आंचलिक इकाई, जबलपुर ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 15.33 करोड़ रुपए जीएसटी वसूली के लिए डिमांड नोट भेजा। इस पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कॉलेजों से जीएसटी वसूलने के बजाय अपने खाते से माई 2023 में यह पैसा जमा करवा दिया। कॉलेजों से पैसा नहीं लेना यूनिवर्सिटी प्रबंधन की लापरवाही और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।

सरकारी कॉलेजों को खजाने से दे दिए 55.52 करोड़

गांधी मेडिकल कॉलेज इंदौर को 39.69 करोड़ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेिडकल कॉलेज, जबलपुर में 15.83 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश करने का चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने अपने खजाने से इन दोनों सरकारी कॉलेजों में 55.52 करोड़ रुपए निवेश कर दिए, जबकि सरकारी कॉलेजों में सरकार खर्च करती है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने भी गलत निर्देश दिए और यूनिवर्सिटी ने भी इस पर मंथन किए बिना पैसा खर्च कर दिया। कार्य परिषद की बैठक में इस पर आपत्तियां भी ली गई थी, लेकिन इन्हें नजरअंदाज किया गया।

परीक्षा के लिए 6.10 करोड़ एडवांस दिया, लेकिन समायोजन नहीं किया

मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने 2020 से मार्च 2023 तक विभिन्न कोर्स की सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षा करवाने के लिए प्रदेश के 99 कॉलेजों को 6.10 करोड़ रुपए एडवांस दिए। किसी भी परीक्षा केंद्र प्रभारी ने खर्च का न तो ब्योरा दिया और न ही यूनिवर्सिटी ने इसका हिसाब कॉलेज-परीक्षा केंद्रों से मांगा। परीक्षा पूरी होने के 3 साल बाद भी 6.10 करोड़ का समायोजन नहीं किया जा सका।

- प्रदेश के 5 मेडिकल कॉलेजों से 2.50 करोड़ रुपए एंडोमेंट फंड नहीं लिया।

- 8 डेंटल कॉलेजों से 4 करोड़ एंडोमेंट फंड नही लिया

- आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी के 32 कॉलेजों से 6.40 करोड़ रुपए नहीं लिए

- प्रदेश के 351 नर्सिंग कॉलेजों से 70.20 करोड़ रुपए एंडोमेंट फंड नहीं लिया।

- प्रदेश के 155 पैरामेडिकल कॉलेजों से 15.50 करोड़ रुपए एंडोमेंट फंड लिया जाना था, लेकिन नहीं लिया।

Created On :   28 March 2026 10:58 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story