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Nagpur News: शालार्थ आईडी , 632 शिक्षकों की नियुक्तियां संदिग्ध, कोई रिकॉर्ड नहीं

Nagpur News बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में शालार्थ आईडी से संबंधित दायर रिट याचिकाओं पर हुई सुनवाई में नागपुर के उप शिक्षा संचालक ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर याचिका खारिज करने की मांग की है। उप शिक्षा संचालक ने यह भी कहा कि, जांच के दौरान याचिकाकर्ताओं से संबंधित कोई मूल रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध नहीं पाया गया। साथ ही 632 शिक्षकों और कर्मचारियों के दस्तावेज भी अनुपलब्ध पाए गए। इस प्रकार, जांच में कुल 637 मामलों में से लगभग 99 प्रतिशत से अधिक नियुक्तियां फर्जी होने का संदेह राज्य सरकार ने व्यक्त किया है।
84 याचिकाएं दायर हैं : हाईकोर्ट में लंबित वेतन को लेकर लगभग 84 याचिकाएं दायर है। इन याचिकाओं पर न्यायमूर्ति मुकुलिका जवलकर और न्यायमूर्ति नंदेश देशपांडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। शिक्षा उप संचालक के शपथपत्र में दावा किया गया है कि संबंधित नियुक्तियां कानून के अनुसार नहीं की गईं और आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। इन नियुक्तियों के आधार पर बनाए गए शालार्थ आईडी भी अवैध बताए गए हैं।
वेतन देना संभव नहीं : शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है, इसलिए ऐसे मामलों में वेतन देना संभव नहीं है। साथ ही, सरकार ने मौखिक जानकारी में बताया कि, जांच अभी पूरी नहीं हुई है और 632 का आंकड़ा अंतिम नहीं है, इसमें वृद्धि हो सकती है। राज्य सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील तथा वरिष्ठ विधिज्ञ देवेंद्र चौहान और सहायक सरकारी वकील संगीता जाचक ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया संज्ञान : नागपुर खंडपीठ ने पहले करीब 600 शिक्षकों को वेतन देने का अंतरिम आदेश दिया था, जिसे राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार ने कहा कि जांच लंबित है और इससे 65 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। इस बीच, हाईकोर्ट के आदेश का पालन न होने पर राज्य सरकार के खिलाफ लगभग 40 अवमानना याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों को न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए और चार माह में सभी याचिकाओं के निपटारे का निर्देश दिया।
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Created On :   25 March 2026 9:59 AM IST














