Nagpur News: राज्यस्तरीय बैठक में कुपोषण, विकास व प्रारंभिक शिक्षा पर मंथन

राज्यस्तरीय बैठक में कुपोषण, विकास व प्रारंभिक शिक्षा पर मंथन
10 सूत्रीय एजेंडा तैयार, राज्यभर के विशेषज्ञों ने की गहन चर्चा

Nagpur News बचपन की शुरुअात के बाद 2000 दिन बड़े महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान कुपोषण, विकास व प्रारंभिक शिक्षा महत्वपूर्ण होती है। इसके लिए राज्यस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में तीनों विषयों पर मंथन किया गया। राज्यभर के विशेषज्ञों द्वारा इस पर गहन चर्चा की गई। बैठक में बाल स्वास्थ्य से जुड़े वैज्ञानिक और कार्यक्रमात्मक पहलुओं और के बेहतर भविष्य के लिए 10 बिंदुओं का कार्य एजेंडा तय किया गया।

बच्चों के विकास से जुड़े मुद्दे पर विचार विमर्श : यह बैठक राज्य सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर), इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी), कॉमहाड और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। बैठक का उद्घाटन आईएपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने किया। इस अवसर पर प्रो. सिमिन ईरानी, प्रो. मृदुला फडके, डीएमईआर की अधिकारी डॉ. पल्लवी सापले, कॉमहाड के कार्यकारी निदेशक डॉ. उदय बोधनकर, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पर्यवेक्षक डॉ. यशवंत पाटील तथा यूनिसेफ की अधिकारी राजलक्ष्मी नायर सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित थे। बैठक में नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने बाल पोषण, वृद्धि और विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार विमर्श किया। इसके आधार पर घोषणा पत्र व कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।

10 सूत्रीय कार्यक्रम में विविध विषयों का समावेश : 10 सूत्रीय एजेंडा के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं। बच्चों के जीवन के पहले 2000 दिनों (0–5 वर्ष तक) को नीतियों में प्राथमिकता देने पर जोर देना। कुपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और बाल मोटापे को रोकने के लिए संतुलित आहार व विविधता बढ़ाने की सिफारिश की गई। खेल-आधारित शिक्षा, भाषा विकास और प्रारंभिक सीखने की प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। छोटे बच्चों में शारीरिक गतिविधि, बाहरी खेल और पर्याप्त नींद सुनिश्चित करने की बात को मान्य किया गया। बच्चों में बढ़ते डिजिटल उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश और अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बच्चों की वृद्धि और विकास की सतत निगरानी करना जरुरी बताया गया।

सामूहिक प्रयास से हर बच्चों का विकास संभव : ऑटिज़्म, भाषण विकार और विकास में देरी जैसी समस्याओं की समय रहते पहचान और उपचार करना महत्वपूर्ण माना गया है। पोषण, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा को लेकर माता-पिता को मार्गदर्शन करना जरुरी बताया गया। एनीमिया नियंत्रण और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से भविष्य की माताओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला-बाल विकास विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। इस आधार पर ही बच्चों का स्वास्थ्य व उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। ऐसा भी बैठक में कहा गया। विशेषज्ञों ने सामूहिक प्रयासों से हर बच्चे को बेहतर पोषण और विकास के अवसर उपलब्ध कराने का आह्वान किया।


Created On :   19 March 2026 4:18 PM IST

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