Nagpur News: मनोचिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हुमणे को किया निलंबित

मनोचिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हुमणे को किया निलंबित
प्रशासनिक अव्यवस्था व अनियमितता का मामला

Nagpur News प्रादेशिक मनोचिकित्सालय में प्रशासनिक अव्यवस्था व अनियमितता मामले में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सतीश हुमणे को निलंबित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के उपसंचालक डॉ. शशिकांत शंभरकर ने निलंबन के संदर्भ में सूचना पत्र जारी किया। पत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के आदेशानुसार निलंबन की कार्रवाई होने का स्पष्ट किया गया है। चिकित्सा उप अधीक्षक डॉ. अमरीश मोहबे को चिकित्सा अधीक्षक कार्यभार संभालने का निर्देश दिया गया है। निलंबन के बाद डॉ. हुमणे को जिला अस्पताल गड़चिरोली भेजा गया है।

अन्य चार पर भी हो सकती कार्रवाई _ डॉ. सतीश हुमणे के निलंबन के बाद मनोचिकित्सालय के अन्य 4 लोगों पर भी कार्रवाई की आशंका को लेकर चर्चा गर्म हो चुकी है। बताया गया कि इन चार लोगों की विभागीय जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। मनोचिकित्सालय में विभागीय जांच के दौरान प्रशासनिक अव्यवस्था, स्वच्छता में लापरवाही, भोजन आपूर्ति में अनियमितता और खरीद प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन के मामले उजागर हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा अधीक्षक सहित पांच अधिकारियों के खिलाफ जांच रिपोर्ट जारी की गई थी। सभी पर महाराष्ट्र नागरी सेवा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

इस तरह गड़बड़ियां करने का आरोप : जांच रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री के आदेश के बावजूद ओपीडी आधे दिन ही खुली रखी जाती हैं। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशानुसार ओपीडी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक चलनी थी, लेकिन जांच में पाया गया कि यह केवल सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक ही संचालित हो रही थी। मरीजों को दैनिक उपयोग की सामग्री तेल, साबुन, दंतमंजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी। स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक की जानकारी भी जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराई गई। यहां सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है, जबकि भुगतान पूरा किया जाता है। नियमों के अनुसार दिन में 3 बार सफाई होनी थी, लेकिन 1 बार ही सफाई होने की बात सामने आयी थी। वहीं कई बार कर्मचारी अनुपस्थित रहते हैं।

जांच रिपोर्ट में किये अनेक खुलासे : परिसर में झाड़ियां और गंदगी पड़ी रहती हैं। परिसर में बरसात में जलभराव, मच्छरों का प्रकोप, ड्रेनेज लाइन की खामियां, टूटी खिड़कियां, जालियों का अभाव, संक्रमण और बीमारियों का खतरा आदि की आशंका बनी रहती है। शीतसत्र के दौरान 13 दिसंबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्री की आकस्मिक जांच में सामने आया कि भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं। कुछ वार्डों में मरीज जमीन पर सोते मिले। रसोई व्यवस्था अस्त-व्यस्त पायी गई थी। आपूर्तिकर्ता को कथित रूप से अधिक भुगतान किया जाता है। दवा खरीद में नियमों का उल्लंघन किया गया है।

सरकार के नियमों का उल्लंघन : रिपोर्ट के अनुसार कुछ कामों की तकनीकी स्वीकृति ली गई, लेकिन आवश्यक प्रशासकीय मंजूरी नहीं ली गई है। सरकार के 1 दिसंबर 2016 के खरीद नियमों का पालन नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल में अनेक खामियां पाई गई है।


Created On :   18 March 2026 12:46 PM IST

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