Nagpur News: युद्ध का असर, 1200 करोड़ के चावल निर्यात पर लगा ब्रेक

युद्ध का असर, 1200 करोड़ के चावल निर्यात पर लगा ब्रेक
  • 700 राइस मिलों पर संकट खाड़ी देशों में सप्लाई ठप
  • 4 लाख टन निर्यात रुका गोदामों में सड़ रहा स्टॉक

Nagpur News पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब नागपुर समेत पूर्वी विदर्भ की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। खाड़ी देशों को होने वाला चावल निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। इससे करीब 1200 करोड़ रुपए के सालाना कारोबार पर ब्रेक लग गया है। हालात यह हैं कि गोदामों में जमा चावल अब खराब होने की कगार पर पहुंच गया है। जिससे व्यापारियों और मिल संचालकों की चिंता बढ़ गई है।

युद्ध के कारण निर्यात रुका : नागपुर में 700 से अधिक राइस मिलें संचालित हैं। इसके अलावा इतवारी और कलमना की बड़ी अनाज मंडियां चावल व्यापार का प्रमुख केंद्र हैं। जहां से बड़े पैमाने पर खरीदी-बिक्री और निर्यात होता है। नागपुर से 4 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात प्रभावित हुआ है, जबकि पूर्वी विदर्भ के जिलों से यह आंकड़ा 10 लाख टन तक पहुंचता है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों को सप्लाई पूरी तरह रुक गई है। निर्यात बंद होने के बाद व्यापारियों ने चावल को गोदामों में स्टॉक कर रखा है। अब यह स्टॉक धीरे-धीरे खराब होने लगा है। जिससे भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।

बंदरगाहों पर अटका माल : गोंदिया और भंडारा, जो देश के प्रमुख धान उत्पादक जिले माने जाते हैं, वहां से भी बड़ी मात्रा में चावल नागपुर लाकर निर्यात किया जाता है। फिलहाल इन जिलों से आया स्टॉक भी अटका पड़ा है। वहीं, जेएनपीटी (मुंबई), मुंब्रा और विशाखापट्टनम पोर्ट पर चावल से लदे जहाज खड़े हैं, जिससे पूरी सप्लाई चेन बाधित हो गई है। कुल मिलाकर, युद्ध का सीधा असर अब नागपुर के राइस उद्योग पर पड़ रहा है। 700 मिलों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है। इस उद्योग से जुड़े हजारों मजदूरों और कर्मचारियों के रोजगार पर भी खतरा मंडरा रहा है।

गोदामों में हजारों क्विंटल चावल हमारा पूरा कारोबार खाड़ी देशों के निर्यात पर टिका हुआ है। युद्ध शुरू होने के बाद से एक भी नया ऑर्डर नहीं आया। गोदामों में हजारों क्विंटल चावल पड़ा है। और धीरे-धीरे खराब होने लगा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि पैसा फंसा हुआ है। अगर जल्दी हालात नहीं सुधरे तो कारोबार करना मुश्किल होगा। -उमेश मोटवानी,

चावल निर्यातक खाड़ी देशों में सप्लाई प्रभावित : पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर निश्चित तौर पर हमारे निर्यात पर पड़ा है। अभी खाड़ी देशों को सप्लाई प्रभावित हुई है। जिससे स्टॉक बढ़ा है और मिलर्स पर दबाव आया है। अगर समय रहते निर्यात के नए रास्ते खुले या कुछ नीतिगत राहत मिली, तो उद्योग फिर से पटरी पर आ सकता है। -अशोक अग्रवाल, अध्यक्ष विदर्भ राइस मिल एसोसिएशन


Created On :   18 March 2026 11:11 AM IST

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