Nagpur News: जंगल में अमंगल, पिछले 12 साल में 298 बाघों की मौत , वनविभाग पर उठ रहे सवाल

जंगल में अमंगल,  पिछले 12 साल में 298 बाघों की मौत , वनविभाग पर उठ रहे सवाल
  • टाइगर कैपिटल के उद्देश्य पर सवाल
  • 110 के पीछे मानव जनित कारण जिम्मेदार
  • डेटाबेस बनाए रखने में एनटीसीए विफल

Nagpur News बाघों की मौत पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय मित्र एड. चैतन्य ध्रुव ने विस्तृत याचिका प्रस्तुत की। याचिका में बाघ संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बताया गया कि पिछले 12 वर्षों में राज्य में 298 बाघों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से कम से कम 110 मौतें पूरी तरह से रोकी जा सकने वाले मानव जनित कारणों से हुई हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) बाघों की मौत का पूर्ण केंद्रीकृत डेटाबेस बनाए रखने में विफल रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने राज्य सरकार सहित सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

वार्षिक बाघ मृत्यु दर 4.91 प्रतिशत

नए वर्ष की शुरुआत के साथ ही राज्य में चार बाघों की मौत की खबरों के आधार पर अदालत ने यह जनहित याचिका दायर करने के आदेश दिए थे। मामले पर बुधवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने आदेश के अनुपालन में न्यायालय मित्र एड. चैतन्य ध्रुव ने याचिका प्रस्तुत की। याचिका के अनुसार, राज्य की वार्षिक बाघ मृत्यु दर 4.91 प्रतिशत बताई गई है, जो देश के सभी प्रमुख बाघ वाले राज्यों में सबसे अधिक है। इस पर आवश्यक सुधार के कदम उठाने की जरूरत है। फॉरेंसिक जांच की स्थिति भी चिंताजनक है। वर्ष 2025 में 92.9 प्रतिशत और 2020-2025 के दौरान 55.7 प्रतिशत मामले लंबित हैं, जिसमें कुल 143 मामले अब भी अनसुलझे हैं।

वन विभाग और एनटीसीए के आंकड़ों में विरोधाभास : सुनवाई के दौरान न्यायालय मित्र ने अदालत को यह भी बताया कि वन विभाग द्वारा प्रस्तुत बाघों की मौत के आंकड़े और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों में विरोधाभास है। एनटीसीए के केंद्रीकृत डाटाबेस में 2021 से 2025 के बीच दर्ज 16 बाघों की मौतें आधिकारिक आंकड़ों में शामिल ही नहीं हैं।

33 बाघों की मौत बिजली के करंट से : याचिका में करंट लगने से बाघों की मौत के गंभीर मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि विभिन्न रिपोर्टों और सरकारी निर्देशों के बावजूद अब तक 33 बाघों की मौत बिजली के करंट से हो चुकी है। बिजली विभाग द्वारा एबी केबल लगाने के लिए 82.44 करोड़ रुपये के 127 प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन एक भी योजना को पूर्ण भुगतान नहीं मिला। वहीं, 2025-26 के बजट में टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में करंट से बचाव के लिए एक भी रुपये का प्रावधान नहीं किया गया है। याचिका में यह भी बताया गया है कि 17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि टाइगर रिजर्व में बिजली की लाइनों को सुरक्षित बनाया जाए। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।


Created On :   19 March 2026 12:12 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story