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Nagpur News: भांडेवाड़ी में कचरा प्रबंधन को मिली रफ्तार, 2027 तक कचरे के पहाड़ की जगह दिखेगा समतल मैदान

Nagpur News शहर में बढ़ते कचरे की समस्या को देखते हुए भांडेवाड़ी में आधुनिक ठोस कचरा प्रसंस्करण परियोजना शुरू की गई है। नागपुर में रोजाना करीब 1300 से 1400 टन कचरा निकलता है, जिसमें हर साल लगभग 10 प्रतिशत वृद्धि हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए 500 एमटीपीडी क्षमता का 'भूमि ग्रीन एनर्जी' प्लांट तैयार किया गया है, जिससे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा सके। साथ ही सुसबिडी के तहत कचरा प्रबंधन को और मजबूत किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में 3 नई यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। मनपा का कहना हैं कि यदि दोनों प्लांट सफल रहें तो आने वाले 2027 में कचरे के पहाड़ मैदान में तब्दील हो जाएंगे।
भूमि ग्रीन एनर्जी के जिम्मे मुख्य प्लांट संचालन : नागपुर महानगरपालिका द्वारा टेंडर प्रक्रिया के जरिए पुणे की कंपनी एमएस भूमि ग्रीन एनर्जी को इस मुख्य प्लांट के संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को 5 साल के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम सौंपा गया है। इस प्लांट में गीले कचरे से कम्पोस्ट (खाद) तैयार की जा रही है, जबकि सूखे कचरे को अलग कर उसका पुन: उपयोग किया जा रहा है। प्रोसेसिंग एफएलओ (कंपोस्ट) नियमों के अनुसार की जा रही है।
बचा हुआ मटेरियल लो-लाइन या माइंस फिलिंग में उपयोग किया जाएगा। परियोजना की प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई। 14 अगस्त 2025 को एलओआई जारी हुआ, 01 अक्टूबर 2025 को एग्रीमेंट हुआ, 29 दिसंबर 2025 को ट्रायल रन किया गया और 08 जनवरी 2026 से प्लांट का व्यावसायिक संचालन शुरू हो गया। यह प्लांट सेमी-ऑटोमैटिक मॉड्यूलर कॉम्पैक्ट फैसिलिटी पर आधारित है, जिसमें इंटीग्रेटेड सिस्टम कम्पोस्टिंग (आईएससी) और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) के जरिए गीले और सूखे कचरे का एक साथ प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 10 एकड़ जमीन पर बनी है और इसकी कुल लागत 31.01 करोड़ है।
सुसबिडी प्रोजेक्ट से बढ़ेगी क्षमता : दूसरी ओर, सुसबिडी के तहत कचरा प्रबंधन को और मजबूत किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में 3 नई यूनिट्स स्थापित की जाएंगी, जिनकी कमिशनिंग मई से शुरू होने की संभावना है। इन यूनिट्स में ऑर्गेनिक वेस्ट प्रोसेसिंग पर खास ध्यान दिया जाएगा, जिससे कम्पोस्ट उत्पादन और बढ़ेगा। यह प्रोजेक्ट मुख्य प्लांट के साथ मिलकर काम करेगा, जिससे शहर के अधिक कचरे का निपटान संभव हो सकेगा। यदि दोनों का काम सफल होता हैं तो डम्पिंग यार्ड में खड़े पहाड़ 2027 में मैदान के रूप में नजर आएंगे। जिसके लिए मनपा अधिकारी का कहना हैं कि उनकी ओरसे सारी प्रक्रिया हो चुकी हैं।
सुरक्षा व्यवस्था का ख़ास ख्याल :कचरा प्रसंस्करण के लिए पहले साल 772 प्रति टन की दर तय की गई है, जिसमें हर साल 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। साइट पर सुरक्षा के लिए फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं और लगभग 30,000 लीटर क्षमता की 4 पानी की टंकियां रखी गई हैं। साथ ही कचरे को ढंकने के लिए मिट्टी (सॉइल कवर) की व्यवस्था की गई है, जिससे आग और दुर्गंध की समस्या को रोका जा सके।
2027 तक पूरा होगा लक्ष्य : मनपा ने इस पूरी परियोजना को मार्च 2027 तक पूरी क्षमता से चालू करने का लक्ष्य रखा है। सभी यूनिट्स शुरू होने के बाद शहर के बड़े हिस्से का कचरा प्रोसेस किया जा सकेगा।
कचरे के पहाड़ खत्म होने की उम्मीद : अगर यह परियोजना सफल रहती है, तो भांडेवाड़ी में वर्षों से जमा कचरे के बड़े-बड़े ढेर धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं और यह क्षेत्र मैदान में तब्दील हो सकता है। इससे न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। - प्रशांत वाघमारे, मनपा अधिकारी
Created On :   19 March 2026 4:37 PM IST















