महाकाव्य श्री रामायण कथा Review: पुरानी कथा, नया संदर्भ और दिल से कही गई रामायण, देव शर्मा, रजनीश दुग्गल और अंजलि अरोड़ा के अभिनय ने जीता दिल।

पुरानी कथा, नया संदर्भ और दिल से कही गई रामायण, देव शर्मा, रजनीश दुग्गल और अंजलि अरोड़ा के अभिनय ने जीता दिल।
देव शर्मा की गरिमामयी मौजूदगी, अंजलि अरोड़ा की भावपूर्ण सीता, असरदार संगीत और आज की दुनिया से रामायण को जोड़ने की कोशिश फिल्म को खास बनाती है; कुछ तकनीकी कमियों के बावजूद अभिषेक सिंह की प्रस्तुति भावनात्मक असर छोड़ती है।

रेटिंग: 4/5 Stars

मुंबई: रामायण की कहानी के साथ एक अजीब तरह की मुश्किल जुड़ी है। दर्शक इसे जानता है, इसके पात्रों को पहचानता है और कहानी के लगभग हर बड़े मोड़ से परिचित है। ऐसे में किसी फिल्म के लिए चुनौती यह नहीं रहती कि वह दर्शक को बताए कि रामायण में क्या हुआ, बल्कि यह होती है कि वह जानी-पहचानी कहानी को दोबारा देखने की वजह दे।

महाकाव्य श्री रामायण कथा इसी जगह अपना रास्ता तलाशती है।

फिल्म की शुरुआत सीधे अयोध्या या त्रेतायुग से नहीं होती। यह आज की दुनिया से अपना सफर शुरू करती है और फिर धीरे-धीरे रामायण की कथा में प्रवेश करती है। यह सिर्फ कहानी कहने की तकनीक नहीं, बल्कि फिल्म का केंद्रीय विचार भी है—समय बदल गया है, लेकिन रिश्तों, जिम्मेदारी, त्याग, प्रेम और सही-गलत के सवाल आज भी वही हैं।

यह प्रयोग हर जगह पूरी तरह smooth नहीं है, लेकिन फिल्म को एक contemporary entry point जरूर देता है। और एक बार जब कथा रामायण की दुनिया में पहुंचती है, तो फिल्म अपनी जड़ों को पकड़ लेती है।

निर्देशक अभिषेक सिंह ने रामायण को unnecessarily reinvent करने की कोशिश नहीं की है। कहानी अपने परिचित रास्ते पर चलती है—अयोध्या, वनवास, राम और सीता का रिश्ता, लक्ष्मण का साथ, सीता हरण, हनुमान का आगमन और फिर लंका की ओर बढ़ती कथा। लेकिन यहां focus सिर्फ घटनाओं पर नहीं, उन रिश्तों पर है जिनकी वजह से रामायण आज भी लोगों के बीच जीवित है।

यही फिल्म की असली ताकत है।

श्री राम को निभाना किसी भी अभिनेता के लिए सिर्फ costume पहनकर संवाद बोलने से कहीं ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी है। देव शर्मा इस चुनौती को काफी हद तक संभालते हैं। उनका राम बहुत ज्यादा theatrical नहीं है। वह शांत हैं, संयमित हैं और किरदार की गरिमा को बनाए रखते हैं। कुछ दृश्यों में उनकी performance और अधिक layered हो सकती थी, लेकिन overall वह भूमिका में विश्वास पैदा करते हैं।

अंजलि अरोड़ा की माता सीता में softness के साथ emotional strength भी दिखाई देती है। फिल्म उन्हें केवल राम की कहानी का हिस्सा बनाकर नहीं रखती, बल्कि उनके अपने भाव और संघर्षों को भी जगह देती है। उनकी स्क्रीन presence कई भावनात्मक दृश्यों में फिल्म के tone के साथ अच्छी तरह बैठती है।

शील वर्मा लक्ष्मण के रूप में sincere दिखाई देते हैं। राम के प्रति उनका समर्पण और भाई के साथ उनका रिश्ता कहानी को emotional weight देता है। निर्भय वाधवा के हनुमान में ऊर्जा है, जबकि राजनेश दुग्गल रावण के रूप में फिल्म को जरूरी dramatic tension देते हैं। रावण के किरदार में उनका larger-than-life अंदाज कहानी के दूसरे हिस्से में खास तौर पर ध्यान खींचता है।

अगर अभिनय फिल्म को भाव देता है, तो संगीत उसे पहचान देता है।

फिल्म का soundtrack इसकी बड़ी खूबियों में है। ‘सिया राम’ का mood फिल्म के भावनात्मक पक्ष के साथ अच्छी तरह मेल खाता है। ‘राम जी की सेना’ में ऊर्जा और उत्साह है, जबकि कैलाश खेर का ‘हे हनुमान’ अपने स्वर और प्रस्तुति से भक्ति का असर बढ़ाता है। शान, शाहिद मल्ल्या, वैशाली सामंत और अन्य गायकों की आवाजें भी एल्बम को विविधता देती हैं।

गीतों के बोल खास तौर पर इस genre के हिसाब से काम करते हैं। उनमें आधुनिक pop appeal लाने के बजाय कथा की भाषा और भाव को प्राथमिकता दी गई है। कई जगह lyrics और background score मिलकर उस emotion को मजबूत करते हैं, जिसे दृश्य अकेले शायद उतना प्रभावी तरीके से नहीं पहुंचा पाता।

हालांकि फिल्म को लेकर एक ईमानदार शिकायत इसकी तकनीकी प्रस्तुति से जरूर की जा सकती है।

रामायण का canvas बहुत बड़ा है और फिल्म कई जगह उस scale को दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन production design और VFX हर दृश्य में समान स्तर के नहीं हैं। कुछ बड़े sequences में visual detailing और CGI पर थोड़ा और काम किया जाता तो फिल्म का cinematic impact काफी बढ़ सकता था। खासकर युद्ध और लंका से जुड़े दृश्यों में दर्शक जिस भव्यता की उम्मीद करता है, वह हर बार पूरी तरह हासिल नहीं होती।

लेकिन फिल्म की अच्छी बात यह है कि वह अपनी सीमाओं को सिर्फ spectacle से ढकने की कोशिश नहीं करती। जहां visuals कम पड़ते हैं, वहां कहानी और संगीत काम आते हैं। यही कारण है कि technical shortcomings के बावजूद फिल्म का emotional graph पूरी तरह नीचे नहीं जाता।

एक पत्रकार के तौर पर फिल्म को देखते हुए सबसे दिलचस्प बात इसका present-day connection लगती है। आज के दौर में परिवार, रिश्ते, व्यक्तिगत जिम्मेदारी, त्याग और अपने फैसलों के परिणाम जैसे विषय लगातार हमारे सामने हैं। फिल्म इन सवालों को सीधे contemporary social commentary में बदलने के बजाय रामायण के जरिए देखने की कोशिश करती है।

यह approach बहुत नया नहीं है, लेकिन यहां इसका इस्तेमाल सहज है।

फिल्म की pacing भी इसके पक्ष में जाती है। रामायण जैसी लंबी कथा को फिल्म में समेटना आसान नहीं होता। कई प्रसंगों को संक्षिप्त करना पड़ा है, लेकिन कहानी पूरी तरह बिखरती नहीं। फिल्म अपने प्रमुख characters और घटनाओं को एक clear narrative line में रखती है।

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि फिल्म रामायण को सिर्फ धार्मिक कथा के रूप में नहीं देखती। इसके भीतर family drama भी है, relationship story भी है, moral conflict भी है और power struggle भी। यही अलग-अलग layers फिल्म को सिर्फ भक्तिमय प्रस्तुति बनने से बचाती हैं।

प्रकाश महोबिया और संजय बुंदेला द्वारा निर्मित और महोबिया फिल्म्स प्रोडक्शन के बैनर तले बनी महाकाव्य श्री रामायण कथा को AJ Film Entertainment World और Ajay Kanojiya प्रस्तुत कर रहे हैं। हनी कुलदीप अग्रवाल और मोनिका सेन इसके सह-निर्माता हैं।

अंत में बात वही आती है—क्या इस फिल्म में कमियां हैं? बिल्कुल हैं। कुछ visual effects बेहतर हो सकते थे, production scale हर जगह बराबर प्रभाव नहीं छोड़ता और कुछ performances में और polish की गुंजाइश है। लेकिन क्या ये कमियां फिल्म के उद्देश्य और अनुभव को पूरी तरह कमजोर करती हैं? ऐसा नहीं है।

फिल्म की अपनी स्पष्ट पहचान है। यह अपनी कहानी को modern बनाने के लिए रामायण की आत्मा से समझौता नहीं करती। इसके बजाय आज के दर्शक के लिए एक entry point बनाकर उसे उसी परिचित कथा तक ले जाती है, जिसे भारतीय समाज सदियों से अपने साथ लेकर चल रहा है।

महाकाव्य श्री रामायण कथा की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही है कि यह किसी चमत्कार का दावा नहीं करती। यह एक जानी-पहचानी कहानी को ईमानदारी से सुनाती है, उसमें आज के समय का संदर्भ खोजती है और संगीत, अभिनय और भावनाओं के सहारे दर्शक को अपनी यात्रा में शामिल करती है। तकनीकी कमियों के बावजूद फिल्म के भीतर वह भाव मौजूद है, जो रामायण को सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही विरासत बनाता है।

Created On :   26 Sept 2026 12:43 PM IST

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