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बांग्लादेश के मंत्री ने कहा, हम आर्थिक रूप से बहुत दबाव में हैं

June 02nd, 2020 20:31 IST
 बांग्लादेश के मंत्री ने कहा, हम आर्थिक रूप से बहुत दबाव में हैं

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ढाका, 2 जून (आईएएनएस)। दुनिया भर के विभिन्न देशों के साथ ही बांग्लादेश भी कोरोनावायरस महामारी से जूझ रहा है, जिससे यहां भी आर्थिक दबाव बना हुआ है।

बांग्लादेश के लोक/ग्रामीण योजना मंत्री मुहम्मद अब्दुल मन्नान ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया, आर्थिक रूप से हम बहुत दबाव में हैं। संसाधन अपेक्षाकृत कम हैं। मैं बहुत अधिक दबाव महसूस कर रहा हूं। हमारे निर्यात बड़े खतरे में हैं। जो लोग रोजाना कमाकर खाते हैं, वे बड़े संकट में हैं। हम कोविड-19 के कारण बहुत पीछे हो गए हैं।

उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करने के बारे में सोचना है। हम बेसब्री से कोरोनावायरस महामारी के समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह एक बुरा सपना बन जाएगा। इस साल हम कृषि के लिए एक बड़े बजट प्रावधान का फैसला करने जा रहे हैं। अगर पश्चिमी देश पहले की तरह ही वही उत्पाद लेते हैं तो हमारी आर्थिक स्थिति थोड़ी बेहतर होगी।

मन्नान ने कहा, हालांकि दुनिया भर में आर्थिक नुकसान को एक साथ दूर किया जाना चाहिए। बांग्लादेश अकेले सक्रिय नहीं हो सकता है। यह आर्थिक तबाही को अकेले दूर करने में सक्षम नहीं होगा। लॉकडाउन के दूरगामी आर्थिक परिणाम होंगे।

बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने महमारी से जूझ रहे देशवासियों को राहत प्रदान करने के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की है। उन्होंने कहा, सरकार ने पहले ही 101,117 करोड़ बांग्लादेशी टका (बीडीटी) प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है, जो कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.6 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि निर्यात उन्मुख उद्योगों, लघु, मध्यम एवं कुटीर उद्योगों, कृषि, मछली पालन और मुर्गी पालन सहित 18 आर्थिक क्षेत्रों को इस पैकेज के तहत राहत दी गई है।

सरकार ने उन बेरोजगार युवाओं और प्रवासियों की मदद के लिए भी कदम उठाए हैं, जो विभिन्न देशों से लौटे हैं। इनके लिए 2,000 करोड़ बीडीटी आवंटित किए हैं।

हसीना ने कहा कि देश के लोगों के जीवन और आजीविका के लिए आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करना होगा। उन्होंने कहा, दुनिया के अधिकांश देशों को पहले ही अपने लॉकडाउन को कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि लोगों के आय के मार्ग को अनिश्चित काल के लिए प्रतिबंधित करना संभव नहीं है। बांग्लादेश जैसे विकासशील देश के लिए यह बिल्कुल भी संभव नहीं है।

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