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हमें कोरोना संक्रमण रोकने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा : योगी (आईएएनएस साक्षात्कार, भाग-1)

June 03rd, 2020 20:30 IST
 हमें कोरोना संक्रमण रोकने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा : योगी (आईएएनएस साक्षात्कार, भाग-1)

हाईलाइट

  • हमें कोरोना संक्रमण रोकने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा : योगी (आईएएनएस साक्षात्कार, भाग-1)

लखनऊ, 3 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि उन्होंने कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में कई चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन वे साथ ही इसके प्रसार को नियंत्रित करने में भी सफल रहे हैं।

योगी ने बताया कि उन्होंने जिन चुनौतियों का सामना किया, उनमें चिकित्सा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, तबलीगी जमात के सदस्यों की बड़ी संख्या, जिसके कारण कोरोना मामलों में उछाल आया, अर्थव्यवस्था को फिर से खोलना और प्रवासियों की वापसी शामिल है।

पत्रकारों के एक चुनिंदा समूह से विशेष बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तीन मार्च को कोरोना के लिए पहले अलर्ट की घोषणा की गई थी, तो उत्तर प्रदेश में परीक्षण प्रयोगशाला या कोविड अस्पताल नहीं था और यह एक बड़ी चुनौती थी।

योगी ने कहा, हमने अपनी चिकित्सा संरचना को मजबूत करना शुरू किया और आज हमारे पास 30 परीक्षण प्रयोगशालाएं और तीन स्तरों (लेवल) में 1,01,236 कोविड अस्पताल हैं। हमारे पास बेड और डॉक्टरों के साथ पहले स्तर के 403 अस्पताल हैं। इसके अलावा दूसरे स्तर के 75 अस्पताल हैं, जो ऑक्सीजन सिलेंडर से लैस हैं और तीसरे स्तर के ऐसे 25 अस्पताल हैं, जिसमें वेंटिलेटर और डायलिसिस के लिए उपकरण आदि उपलब्ध हैं। अब राज्य के 75 जिलों में से प्रत्येक कोरोना रोगियों का इलाज करने के लिए सुसज्जित है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब तक कोरोना परीक्षण की आरटीपीसीआर प्रणाली का उपयोग किया जा रहा था, जिसके परिणाम पता चलने में लगभग 12 से 14 घंटे लगते थे। उन्होंने कहा, हम अब ट्रीनेट मशीनों का उपयोग करेंगे, जो एक घंटे में परिणाम देगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के सामने दूसरी चुनौती तबलीगी जमात के सदस्यों की आमद रही है।

उन्होंने कहा, हम स्थिति से चतुराई से निपटे और उन्हें ट्रैक करने और उनका इलाज करने में कामयाब रहे।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रव्यापी बंद के पहले चरण के बाद, चुनौती धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने के साथ ही प्रवासियों के आगमन से निपटने की भी रही।

उन्होंने कहा, हमने 119 चीनी मिलों और 2500 कोल्ड स्टोरेज को फिर से खोल दिया है। इसके अलावा 65,000 श्रमिकों के साथ निर्माण परियोजनाओं को फिर से शुरू किया गया है। छोटे और मध्यम क्षेत्र में 25.5 लाख श्रमिकों के साथ काम शुरू हुआ, जबकि 80,000 सूक्ष्म इकाइयों में 2.5 लाख श्रमिकों के साथ काम शुरू किया गया। मनरेगा के तहत हमारे पास विभिन्न परियोजनाओं में 40 लाख कर्मचारी थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रव्यापी बंद के तीसरे चरण में सरकार को उन प्रवासियों की चुनौती का सामना करना पड़ा, जो बड़ी संख्या में अपने घरों को लौटने लगे थे।

उन्होंने कहा, हमें उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी थी। हम लगभग 32 लाख श्रमिकों को वापस लेकर आए, जबकि लगभग चार लाख अपने आप पहुंचे। हमें उनकी चिकित्सा जांच करनी थी, उन्हें एकांतवास में रखना था, भोजन उपलब्ध कराना था और उनकी स्किल मैपिंग भी सुनिश्चित करनी थी। हमने उनमें से प्रत्येक को 1000 रुपये और राशन किट भी दी। हमने उन लोगों का पूल परीक्षण किया, जो कोरोना के संदिग्ध मरीज थे। मेडिकल स्क्रीनिंग एक लाख टीमों द्वारा की गई और इस दौरान 4.85 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई।

एक सवाल का जवाब देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने महामारी को नियंत्रित करने में कामयाबी हासिल की है और राज्य में इस समय केवल 3200 सक्रिय (एक्टिव) मामले हैं और 5000 रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है, जिसके बाद उन्हें अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

उन्होंने कहा, कुछ विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की थी कि मई में उप्र में 65,000 से 70,000 मामले होंगे, लेकिन हम इन्हें 8000 में से नीचे लेकर आए, जिनमें से 5000 का इलाज किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रव्यापी बंद का बहुत ही समयबद्ध निर्णय लिया और हम कोरोना प्रसार की जांच करने में सफल रहे। यह लोगों में मोदी के प्रति विश्वास है, जिसने हमें महामारी से बचाने में मदद की है।

अनलॉक 1 के बारे में पूछे गए एक अन्य प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जागरूकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

आवाजाही की काफी हद तक अनुमति दी गई है, लेकिन लोगों को दिशानिर्देशों का पालन करना होगा और सुरक्षा प्रोटोकॉल सुनिश्चित करना होगा। जैसे कि हम अनलॉक करने के साथ आगे बढ़ रहे हैं, हम केंद्र द्वारा समय-समय पर जारी किए दिशानिदेशरें का पालन करेंगे।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।