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ट्रम्प की विवादित पोस्ट पर जुकरबर्ग : वह पोस्ट फेसबुक की नीतियों का उल्लंघन नहीं

June 03rd, 2020 12:00 IST
 ट्रम्प की विवादित पोस्ट पर जुकरबर्ग : वह पोस्ट फेसबुक की नीतियों का उल्लंघन नहीं

हाईलाइट

  • ट्रम्प की विवादित पोस्ट पर जुकरबर्ग : वह पोस्ट फेसबुक की नीतियों का उल्लंघन नहीं

सैन फ्रांसिस्को, 3 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई विवादित पोस्ट पर कार्रवाई करने के लिए कंपनी के भीतर नाराजगी बढ़ने के साथ ही फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने एक बार फिर ट्रम्प पोस्ट को बनाए रखने के अपने फैसले का बचाव किया है।

मंगलवार को कर्मचारियों के साथ एक वर्चुअल टाउन हॉल में जुकरबर्ग ने कहा कि पोस्ट ने नीतियों का उल्लंघन नहीं किया था।

विवादास्पद पोस्ट के बारे में सोशल नेटवकिर्ंग की विशाल नीतियों के विरोध में सोमवार को कर्मचारियों के बीच आक्रोश को संबोधित करने के लिए टाउन हॉल का आयोजन किया गया था। यह ट्रम्प की विवादित पोस्ट - जब लूट शुरू होती है, तो शूटिंग शुरू होती है, - को लेकर की गई थी। यह पोस्ट अफ्रीकी-अमेरिकन जॉर्ज फ्लायड की मौत के बाद फूटे विरोध को लेकर की गई थी।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक जुकरबर्ग ने कहा कि वह मॉडरेशन प्रक्रियाओं की समीक्षा करना शुरू करेंगे और कंपनी को इस तरह की हानिकारक सामग्री से निपटने का तरीका बदलेंगे।

बता दें कि मिनेसोटा विरोध प्रदर्शनों को लेकर ट्रम्प के एक विवादित पोस्ट पर कार्रवाई नहीं करने पर कम से कम दो फेसबुक कर्मचारियों ने कंपनी के रुख के खिलाफ इस्तीफा दे दिया है।

फेसबुक में प्रोडक्ट डिजाइन के निदेशक डेविड गिलिस ने एक ट्वीट में कहा, मुझे विश्वास है कि ट्रम्प की जब लूट शुरू होती है, तो शूटिंग शुरू होती है ट्वीट (एफबी पर क्रॉस पोस्टेड), अतिरिक्त-न्यायिक हिंसा को प्रोत्साहित करता है और नस्लवाद को बढ़ाता है। एन्फोर्समेंट कॉल के लिए ट्विटर की टीम का सम्मान करता हूं।

ट्विटर ने पिछले हफ्ते ही एक विवादित ट्वीट को लेकर ट्रम्प की पोस्ट पर फैक्ट चैक की चेतावनी लगा दी थी।

जुकरबर्ग ने लिखा, हमने उस पोस्ट को बहुत बारीकी से देखा है कि यह हमारी नीतियों का उल्लंघन है या नहीं। हिंसा भड़काने के बारे में हमारी नीति राज्य में बल के उपयोग की चर्चा की अनुमति देती है। हालांकि मुझे लगता है कि आज की स्थिति उस चर्चा की संभावित सीमा के बारे में महत्वपूर्ण सवाल उठाती है।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।