France Protest: फ्रांस में महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, 1,000 गिरफ्तार, कई शहरों में हिंसा और आगजनी से मचा हड़कंप!

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फ्रांस में बढ़ती महंगाई से लोग परेशान हैं। इसके खिलाफ देश के कई शहरों में लगातार बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। अब तक करीब 4 लाख 10 हजार लोग सड़कों पर उतर चुके हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस ने 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार को पेरिस समेत कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव देखने को मिला। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की तेज बौछारें कीं। हालात बिगड़ने से रोकने के लिए सरकार ने करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। कई इलाकों में लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगाई गई।
यह भी पढ़े -क्या ट्रंप ने नेतन्याहू की प्लानिंग कर दी थी फेल! इसी महीने की शुरुआत में ईरान बड़े हमले की थी तैयारी
कई शहरों में आगजनी और तोड़फोड़
फ्रांस के मार्सिले शहर में प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बैरिकेड्स में आग लगा दी थी। सड़कों को बंद करने के लिए लोहे की चादरों का इस्तेमाल किया गया था। बस इतना ही नहीं, बल्कि यहां एक पुलिस वाहन को भी आग के हवाले कर दिया गया था। वहीं, बोर्डो शहर में कुछ लोगों ने एक दुकान का बोर्ड उखाड़ दिया। ल्योन में भी पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों में कई दुकानों को लूट लिया गया था और कुछ इमारतों में आग लगा दी गई थी। इस बार पुलिस ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा रखी।
राष्ट्रपति मैक्रों ने लिया बड़ा फैसला
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस सप्ताह आदेश दिया कि केवल मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों की ओर से आयोजित प्रदर्शनों को ही अनुमति दी जाएगी। हाल के दिनों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट के मामलों में कई लोगों को जेल भेजा गया है। इन मामलों की सुनवाई तेजी से की गई। पेरिस में शनिवार को पोर्ट डी इटली से पोर्ट डी विन्सेनेस तक निकाले गए शांतिपूर्ण मार्च के आखिर में हालात बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों और दंगा रोकने वाली पुलिस के बीच झड़प हुई। इस दौरान पुलिस की एक खास टीम भी मौजूद थी, जो आमतौर पर गंभीर अपराध और आतंकवाद से जुड़े मामलों में कार्रवाई करती है।
गृह मंत्री ने प्रदर्शन को लेकर क्या कहा?
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने AFP को बताया कि मार्च के दौरान हजारों कट्टरपंथी कार्यकर्ता जमा हुए थे। इनमें करीब 500 ऐसे लोग थे जिन्हें दंगा करने वाले लोगों के रूप में पहचाना गया। सरकार ने पहले ही सुरक्षा बढ़ा दी थी ताकि हालात काबू से बाहर न हों। इसके बावजूद मार्सिले और ल्योन जैसे शहरों में पुलिस को भीड़ हटाने के लिए बल का इस्तेमाल करना पड़ा। ल्योन में लोग उस इलाके में जमा हुए थे जहां स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शन पर रोक लगा रखी थी। अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य मकसद पिछले प्रदर्शनों जैसी हिंसा और लूटपाट को रोकना था।
Created On :  

