Iran-Israel War: किस बात को लेकर छिड़ी इजरायल-ईरान के बीच जंग? समझें 1957 से लेकर 2026 तक पूरी कहानी

किस बात को लेकर छिड़ी इजरायल-ईरान के बीच जंग? समझें 1957 से लेकर 2026 तक पूरी कहानी
इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमले ने ईरान को आग बबूला कर दिया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने मिडिल ईस्ट स्थित यूएस के सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। इन देशों के बीच हाल फिलहाल में तनाव नहीं पैदा हुआ। यह विवाद सालों पहले से बना हुआ है जिसने अब जा कर आक्रामक रूप ले लिया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में हमलों के चलते हाहाकार मचा हुआ है। इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान बौखलाया हुआ है। इसी बौखलाहट और बदला लेने की भावना से ईरान ने इजरायल सहित मध्य पूर्व स्थित यूएस के मिलिट्री बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं। स्थिति किसी जंग से कम नहीं है। इस लड़ाई में दर्जनों छात्रों की मौत की खबर सामने आ रही है। तनावपूर्ण माहौल में एक सवाल ने कई लोगों के मन में घर कर लिया है और वह यह कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो इजरायल और अमेरिका, ईरान के खिलाफ खड़े हो गए? चलिए आसान भाषा में समझते हैं...

कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?

यह पूरी कहानी 1957 ले शुरू हुई जब ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू किया। शुरुआती दौर में परमाणु प्रोग्राम पूरी तरह से शांतिपूर्ण था लेकिन बाद में ईरान 1980 के दशक में माहौल बिगड़ने लगा। इस समय ईरान और इराक के बीच लड़ाई छिड़ गई जिसके चलते ईरान ने सोचा कि देश की सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार होना बेहद जरूरी है।

ईरान ने ली रूस-चीन की मदद

इसके बाद 1990 के दशक में ईरान ने चीन और रूस की मदद से परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। ईरान का दावा था कि वह रूस-चीन की मदद केवल बिजली के प्रोजेक्ट्स के लिए कर रहा है। लेकिन कुछ देशों को शक था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की तैयारी कर रहा है।

ईरान की बढ़ी मुश्किलें

साल 2002 में ईरान की मुश्किलें बढ़ गईं क्योंकि अब दुनिया को यह पता चल गया था कि वह शांतिपूर्ण कार्यक्रम की आड़ में किसी बड़ी चीज को अंजाम दे रहा है। NCRI (National Council Of Resistance Of Iran) जो कि ईरान का विरोधी संगठन है, ने खुलासा किया कि ईरान अपने परमाणु स्थल को छिपा रहा है। इसे हम आसान भाषा में समझे तो साल 2002 में ईरान के न्यूक्लियर साइट की बात दुनिया के सामने आ गई जो शायद वह काफी समय से छिपाने की कोशिश कर रहा था।

ईरान को रोकने की कोशिश

इसके बाद 2003 तक, डिप्लोमैट्स ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया। दुनिया के बहुत समझाने बाद ईरान मान गया और कहा कि अब वह केवल एनर्जी के लिए काम करेगा। लेकिन ईरान दुनिया की आंख में धूल झोंकता रहा और अपना सीक्रेट काम जारी रखा।

ईरान को फटकार

IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी) ने 2004 में ईरान को फटकार लगाई और दावा किया कि वह परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी अहम जानकारी छिपा रहा है। इसके बाद 2005 में IAEA ने फिर कहा कि ईरान नियमों का पालन नहीं कर रहा है और परदे के पीछे परमाणु से संबंधित काम कर रहा है। इसी साल यह मामला संयुक्रत राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) तक पहुंच गया।

ईरान पर लगा प्रतिबंध

2006 में, UNSC ने ईरान के खिलाफ रेजोल्यूशन 1696 पास किया जिसके मुताबिक, देश को यूरेनियम संवर्धन बंद करने का पहला कानूनी आदेश दिया गया। इसके बाद का समय ईरान के लिए बहुत अच्छा साबित नहीं हुआ क्योंकि UNSC ने कई आर्थिक प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए। इतना सब होने के बावजूद ईरान ने अपनी एक्टिविटी रोकना जरूरी नहीं समझा।

ईरान की अर्थव्यवस्था डगमगाई

2011 से 2015 तक का समय ईरान और उसके नागरिकों के लिए काफी चुनौतीभरा रहा। आर्थिक प्रतिबंध के चलते देश की अर्धव्यवस्था पूरी तरह से डगमगाने लगी और लगभग 20 प्रतिशत तक गिरी। वहीं, कई लोगों के पास कोई काम नहीं बचा। जानकारी के मुताबिक, उस वक्त बेरोजगारी लगभग 20 परसेंट तक बढ़ गई थी।

हसन रूहानी बने राष्ट्रपति

साल 2013 में हरन रूहानी ने ईरानियों से वादा किया कि वह देश पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटवाएंगे। इन्हीं वादों के चलते लोगों ने उन्हें चुनाव जीतवा कर राष्ट्रपति बना दिया। इसके बाद अगले दो साल तक अमेरिका और P5+1 देशों के साथ ईरान की बातचीत जारी रही। बता दें कि, P5+1 देशों में चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।

2015 में हुआ था समझौता

आपको बता दें कि, इस मामले को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय समझौते भी हुए हैं। साल 2015 में जॉइंट कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) एग्रीमेंट हुआ था। इस समझौते के तहत ईरान ने वादा किया कि वह परमाणु काम सीमित रखेगा। इसके बदले में उसके ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटा दिए गए। ईरान ने यह समझौता 6 मजबूत देशों के साथ किया था जिनमें अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल थे। मालू हो कि, यह समझौता 10 साल के लिए किया गया था। यानि एग्रीमेंट आधिकारिक तौर पर 18 अक्टूबर 2025 को ही खत्म हो चुका है।

आसान भाषा में समझें पूरी कहानी

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव की वजह परमाणु कार्यक्रम है। दरअसल, यूएस और इजरायल को डर है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम को वकसित करना या शक्ति बढ़ाना) के जरिए परमाणु हथियार बना सकता है। वहीं, ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। लेकिन अमेरिका का ऐसा मानना नहीं है। अमेरिका, ईरान पर नया परमाणु समझौता करने पर दबाव बना रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान 10-15 दिनों में समझौता नहीं करता तो उसके लिए बिलकुल ठीक नहीं होगा।

Created On :   28 Feb 2026 6:16 PM IST

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