Israel-Iran War: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहा तनाव, इजरायल-अमेरिका के 'ऑपरेशन रोरिंग लायन और एपिक फ्यूरी' के जानें ये मुख्य मकसद

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहा तनाव, इजरायल-अमेरिका के ऑपरेशन रोरिंग लायन और एपिक फ्यूरी के जानें ये मुख्य मकसद
अमेरिका के अधिकारियों ने बताया है कि अमेरिका ने कई दिनों की हमले की प्लानिंग कर रखी है। इसी बीच समझते हैं कि ये युद्ध क्यों शुरू हुआ है और इसके पीछे का क्या मकसद है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया है, जिसको 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' नाम दिया है। वहीं, पिछले साल जून में जब इजरायल ने ईरान पर हमला किया था तो उसको 'राइजिंग लायन' का नाम दिया था। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस के अनुसार, इजरायल ने ऐलान किया है कि ईरान के खिलाफ उसके नए ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन रोरिंग लायन होगा। वहीं, दूसरी ओर पेंटागन का कहना है कि ुसने ईरान के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशन को 'एपिक फ्यूरी' का नाम दिया है। जिसको सुनकर अनुमान लगाया जा रहा है कि ट्रंप ने इशारा किया है कि ईरान पर हमले का मकसद सरकार को गिराना है। साथ ही वे ईरानी लोगों से इस मौके का फायदा उठाने को भी बता रहे हैं।

क्या है रोरिंग लायन का मकसद?

इस हमले का मुख्य मकसद ईरान के परमाणु अड्डों, बुनियादी ढांचों, यूरेनियम संवर्धन केंद्रों को पूरी तरह से तबाह करना है। जिससे ईरान कभी भी परमाणु हथियार ना बना पाए।

क्या है हमले का मकसद?

बैलिस्टिक मिसाइल का प्रोग्राम खत्म करना

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि हमले का मकसद ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को मिट्टी में मिलाना है। जिससे इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर ईरान कभी भी हमला नहीं कर पाएगा।

एहतियात का हमला

इजरायल के रक्षा मंत्री ने हमला करने के बाद पहली प्रतिक्रिया में इसे एक प्री एम्प्टिव हमला बताया है। इसका गोल सिर्फ और सिर्फ इजरायल के खिलाफ होने वाले किसी भी संभावित बड़े हमले को शुरू होने से पहले ही कचल देना है।

ईरान की नौसेना को करना है खत्म

अमेरिका का मकसद ईरान की नौसेना को पूरी तरह से खत्म करना है। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इसकी घोषणा की थी, जिससे फारस की खाड़ी और ऊर्जा गलियारों में दबदबा कम हो पाए।

रीजनल प्रभाव का खात्मा

प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) को कमजोर करने के बाद ईरान की सैन्य शक्तिों को निशाना बनाया गया है। जिससे क्षेत्रीय प्रभाव खत्म हो जाए।

सुरक्षा में बढ़ोतरी

अमेरिका ने ये भी कहा है कि वे अपने नागरिकों और समर्थकों की रक्षा के लिए 'आसन्न खतरों' को खत्म करना है। ट्रंप ने ईरान को अमेरिकी नागरिकों और अमेरिका के लिए खतरा भी बताया है।

ईरान ने नहीं मानी शर्तें

अमेरिका ने कहा है कि न्यूक्लियर हथियारों को लेकर ईरान ने उसकी शर्तों को मानने से मना कर दिया था। इस पर ट्रंप ने कहा है कि सुप्रीम लीडर की सेना या तो सरेंडर करे या तो अमेरिका की सेना मुकाबला करे। लेकिन एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ईरान ने परमाणु बम बनाने की बात से इनकार कर दिया था तब भी अमेरिका ने हमला बोला है।

ईरान में हो सकता है शासन परिवर्तन

ईरान की इस्लामिक सरकार सालों से अमेरिका के प्रशासन को पसंद नहीं आ रही है। ईरान में 1979 में हुए इस्लामिक क्रांति से पहले ही अमेरिका के नेतृत्व में एक रिमोट कंट्रोल से चलने वाली राजशाही थी। इसलिए अमेरिका ने सत्ता परिवर्तन को बोला था।

ईरान की आईआरजीसी का खात्मा

इजरायल कई बार कह रहा है कि ईरान की आईआरजीसी को अपने लिए खतरा बता रहा है। इस हमले का पूरा मकसद ईरान की सेना और आईआरजीसी का हमेशा के लिए खात्मा करना है।

आतंकी नेटवर्क के लिए फंडिंग रोकना

इजरायल का मकसद खाड़ी देशों में ईरान के उन संसाधनों को खत्म तकरना है, जिसकी मदद से प्रॉक्सी ग्रुप को फंड किया जाता है। ईरान की कई प्रॉक्सी संगठन हैं, जिसमें हमास, इस्लामिक जिहाद, हिजबुल्लाह और हूती विद्रोह शामिल हैं। जिनको सैन्य और आर्थिक मदद ईरान की तरफ से ही मिलती है। इस ऑपरेशन की वजह से ये सप्लाई चेन भी टूट जाएगी।

Created On :   28 Feb 2026 4:56 PM IST

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