Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में हमलों से हाहाकार, ईरान ने सऊदी अरब को क्यों बनाया निशाना? आसान भाषा में समझें

मिडिल ईस्ट में हमलों से हाहाकार, ईरान ने सऊदी अरब को क्यों बनाया निशाना? आसान भाषा में समझें
मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त अटैक के बाद ईरान बौखला गया है। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने अमेरिका के कई सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है जिनमें सऊदी अरब स्थित मिलिट्री बेस भी शामिल हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एकदम चरम पर पहुंच गया है। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद जंग छिड़ गई है। वहीं, जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने मध्य पूर्व स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बैलेस्टिक मिसाइलें दागनी शुरू कर दी हैं। ईरान ने सऊदी अरब स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को भी निशाना बनाया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि ईरान ने सऊदी अरब को निशाना क्यों बनाया? चलिए समझते हैं...

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निशाने पर सऊदी अरब क्यों?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव और बढ़ा तो सऊदी अरब पर खतरा बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां अमेरिकी सैनिक और रक्षा सिस्टम मौजूद हैं।

सऊदी में अमेरिका की मौजूदगी

व्हाइट हाउस के एक पत्र के मुताबिक, साल 2024 में सऊदी अरब में 2,321 अमेरिकी सैनिक तैनात थे। यह सैनिक सऊदी सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं। उनका मुख्य काम हवाई सुरक्षा और मिसाइल रक्षा प्रणाली को मजबूत करना है। साथ ही, वह अमेरिकी सैन्य विमानों के संचालन में भी मदद करते हैं।

सऊदी अरब की राजधानी रियाद से करीब 60 किलोमीटर दक्षिण में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर कुछ सैनिक तैनात हैं। यहां अमेरिकी सेना के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम मौजूद हैं। इनका उद्देश्य संभावित हवाई हमलों से सुरक्षा देना है। माना जा रहा है कि इन हमलों के जरिए ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका की इसी ताकत को कम करना चाहता है।

जॉर्डन पर भी ईरान का निशाना

वहीं, जॉर्डन में अमेरिका की मौजूदगी अज्राक इलाके के एक सैन्य अड्डे पर है, जो राजधानी अम्मान से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। यहां स्थित मुवाफ्फक अल साल्ती एयर बेस पर अमेरिकी वायु सेना की 332वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग तैनात है। यह यूनिट लेवांत क्षेत्र में अलग-अलग मिशनों को अंजाम देती है।

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Created On :   28 Feb 2026 4:03 PM IST

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