ब्राजील में सत्ता की लड़ाई: लोकतंत्र के नाम पर लूला की जीत, चुनाव रद्द कराने पर अड़े बोल्सोनारो, नतीजे मानने से किया इनकार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर जीत दर्ज की। लूला को 51.8 फीसदी वोट मिले और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को करीब 44 लाख मतों से पीछे छोड़ दिया। उनकी जीत को लैटिन अमेरिका की राजनीति में वामपंथी विचारधारा के लिए अहम माना जा रहा है। वहीं, हार के बाद बोल्सोनारो ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नतीजे रद्द करने की मांग की। लूला का राजनीतिक सफर भी विवादों से जुड़ा रहा है। भ्रष्टाचार के मामले में उनकी सजा रद्द होने के बाद उन्होंने राजनीति में वापसी की और राष्ट्रपति चुनाव में बोल्सोनारो को चुनौती दी।
यह भी पढ़े -फ्रांस में प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस वालों ने महिला को गोली मारी? जानें वायरल वीडियो का सच
मतदान के समय पर उठे सवाल
बोल्सोनारो ने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे असाधारण कदम बताते हुए चुनाव रद्द करने की मांग की। हालांकि, मतदान का समय बढ़ाने की मांग दोनों उम्मीदवारों की ओर से की गई थी। कुछ इलाकों में परिवहन संबंधी परेशानियों और भारी बारिश के कारण मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने में दिक्कत हुई थी। समय बढ़ाए जाने के बाद कुछ केंद्रों पर भ्रम की स्थिति भी बनी।
महंगाई और रोजगार बने प्रमुख मुद्दे
चुनाव प्रचार के दौरान महंगाई, रोजगार और अपराध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्ती और कीमतें कम करने का वादा किया, जबकि लूला ने सामाजिक कल्याण योजनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दी। लूला ने जीत के बाद सरकार के कामकाज में बदलाव और निर्णय प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही।
लूला के समर्थकों ने मनाया जश्न
नतीजों की घोषणा के बाद साओ पाउलो और रियो डी जनेरियो समेत कई शहरों में लूला के समर्थक सड़कों पर उतर आए। लोगों ने गाड़ियों के हॉर्न बजाकर और जश्न मनाकर अपनी खुशी जाहिर की। जीत के बाद लूला ने कहा कि उनकी पार्टी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान के महत्व को लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने ब्राजील की संप्रभुता पर जोर देते हुए कहा कि देश अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है।
Created On :  
