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पाकिस्तान : पोलियो की दवा पिलाने के लिए फतवों का सहारा!

October 16th, 2019 17:30 IST
 पाकिस्तान : पोलियो की दवा पिलाने के लिए फतवों का सहारा!

इस्लामाबाद, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम पूरी दुनिया में कामयाब रहा है लेकिन पाकिस्तान में कुछ और वजहों के साथ-साथ दकियानूसी सोच ने इस कार्यक्रम को विफल कर दिया है। अब स्थिति यह है कि पोलियो की दवा के पक्ष में जारी फतवों की पुष्टि कराई जा रही है ताकि लोग अपने बच्चों को इसकी दवा पिलाने के लिए आगे आएं।

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में पाकिस्तान और अफगानिस्तान, दो ही ऐसे देश हैं जहां आज भी पोलियो की बीमारी मौजूद है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल में नाइजीरिया इस सूची से बाहर हो गया और अब वहां पोलियो का मामला नहीं पाया जाता।

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की धार्मिक मामलों की सर्वोच्च संस्था इस्लामी विचारधारा परिषद (सीआईआई) ने पोलियो की दवा पिलाने के पक्ष में समय-समय पर विभिन्न उलेमा द्वारा जारी सौ से अधिक फतवों की पुष्टि की है। सीआईआई को उम्मीद है कि इससे देश में पोलियो दवा के खिलाफ धर्म आधारित प्रतिरोध में कमी आएगी।

परिषद के सर्वोच्च निकाय ने सर्वसम्मति से इन फतवों की पुष्टि की है और लोगों से कहा है कि इस बीमारी की दवा को पिलाए जाने में कुछ भी गैर धार्मिक नहीं है।

पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार बाबर बिन अता ने बताया कि यह पहली बार है जब सरकार ने पोलियो वायरस के उन्मूलन के लिए सीआईआई की मदद मांगी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में 2014 के बाद से धार्मिक आधार पर पोलियो की दवा का विरोध शुरू हुआ। हालांकि, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए उलेमा ही नहीं बल्कि मिस्र के विख्यात अल अजहर विश्वविद्यालय से भी फतवा आया कि पोलियो वैक्सीन इस्लाम के खिलाफ नहीं है लेकिन इसे लेकर लोगों के एक हिस्से में संदेह बना रहा।

संदेह की वजह यह भी थी कि लोगों की तरफ से बार-बार पूछा जाता था कि सीआईआई का इन फतवों के बारे में क्या कहना है? क्या सीआईआई इनकी पुष्टि करती है? बाबर बिन अता ने कहा कि इन हालात में हमने सीआईआई से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि यह ताज्जुब की बात है कि इससे पहले किसी ने इस बारे में सीआईआई से आज तक संपर्क नहीं किया।

सीआईआई के चेयरमैन डॉ. किबला अयाज ने कहा कि उन्हें मिली सूचना के मुताबिक, जितने लोग अपने बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने से मना करते हैं, उनमें से कम से कम तीस फीसदी ऐसा धार्मिक कारणों से करते हैं।

धार्मिक कारणों के अलावा इसके राजनैतिक कारण भी हैं। समाज के एक हिस्से में यह धारणा पाई जाती है कि यह दवा पश्चिमी देशों से आती है और घातक होती है। इन्हें पीने के बाद मुस्लिम बच्चे आगे चलकर संतान पैदा करने की क्षमता खो देंगे। इसके पक्ष में रत्ती भर भी प्रमाण नहीं होने के बावजूद ऐसी अफवाहें फैला दी जाती हैं।

इन अफवाहों को उस वक्त भी बल मिला था जब डॉक्टर शकील अफरीदी ने देश में हेपेटाइटिस के खिलाफ कार्यक्रम चलाया। डॉ. अफरीदी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने अमेरिका को दुर्दात आतंकी ओसामा बिन लादेन का खात्मा करने में मदद दी थी। लोगों में अफरीदी के प्रति यह धारणा बनी कि पश्चिमी देशों का ऐसा एजेंट मुसलमानों के लिए कुछ अच्छा नहीं सोच सकता। नतीजा यह हुआ कि खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांत में टीकों के खिलाफ माहौल बन गया।

कुछ स्थानीय स्तर के मौलवियों ने भी लोगों को यह समझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि पोलियो जैसी दवाएं ईश्वर की जो इच्छा होती है और उसने जो जिंदगी किसी इनसान के लिए तय की है, उसके रास्ते में रुकावट डालने का काम करती हैं, इसलिए गैर इस्लामी हैं।

अब सरकार को उम्मीद है कि इस्लाम के सभी मत-संप्रदायों के विद्वानों को मिलाकर बनाई गई संस्था सीआईआई द्वारा पोलियो दवा के पक्ष में दिए गए फतवों की पुष्टि से हालात बेहतर होंगे और लोगों में भ्रांतियां दूर होंगी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।