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WHO ने बनाया कोरोनावायरस वेरिएंट के नामकरण का सिस्टम, इंडियन म्यूटेशन का नाम रखा डेल्टा और कप्पा

WHO ने बनाया कोरोनावायरस वेरिएंट के नामकरण का सिस्टम, इंडियन म्यूटेशन का नाम रखा डेल्टा और कप्पा

हाईलाइट

  • SARS-CoV-2 वायरस के वेरिएंट के नामों के लिए नए नेमिंग सिस्टम की घोषणा
  • हर एक वेरिएंट को ग्रीक अल्फाबेट से लेबल दिया गया
  • भारत में पाए गए वेरिएंट B.1.617.2 का WHO लेबल डेल्टा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने SARS-CoV-2 वायरस के वेरिएंट के नामों के लिए नए नेमिंग सिस्टम बनाया है। हर एक वेरिएंट को ग्रीक अल्फाबेट से लेबल दिया गया है। जैसे यूनाइटेड किंगडम में सबसे पहले पाए गए B.1.1.7 वेरिएंट का WHO लेबल अल्फा है, साउथ अफ्रिका के वेरिएंट B.1.351 का  WHO लेबल बीटा, ब्राजील में पाए गए वेरिएंट P.1 का लेबल गामा और भारत में पाए गए वेरिएंट B.1.617.2 का WHO लेबल डेल्टा है। वेरिएंट B.1.617.1 को कप्पा कहा जाएगा।

WHO में कोविड-19 की टेक्नीकल लीड डॉ. मारिया वान केरखोव ने कहा, जब ग्रीक अल्फाबेट के 24 अक्षर समाप्त हो जाएंगे, तो उसके जैसी एक और सीरीज की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि WHO के वायरस इवोल्यूशन वर्किंग ग्रुप के नेतृत्व में कई महीनों से वेरिएंट के नामकरण को सरल बनाने की योजना पर काम चल रहा था। वहीं डब्ल्यूएचओ में वर्किंग ग्रुप को लीड कर रहे फ्रैंक कोनिंग्स ने बताया कि प्रारंभिक योजना दो-अक्षर वाले नामों का एक बंच बनाने की थी जो शब्द नहीं हैं - पोर्टमंटियस। लेकिन इससे बात नहीं बनी। तीन और चार अक्षरों ने भी प्रॉबलम को सॉल्व नहीं किया।

कुछ समय के लिए, ग्रुप ने ग्रीक देवी-देवताओं के नामों पर विचार किया, लेकिन अंततः ये भी काम नहीं आया। इसके बाद एक, दो, तीन, और इसी तरह नंबर देने के विचार किया गया, लेकिन इसे यह सोचकर खारिज कर दिया गया कि यह संभवतः उन नामों के साथ भ्रम पैदा करेगा जो जेनेटिक सिक्वेंस डेटाबेस में वायरस को दिए गए हैं जो SARS-2 के इवोल्यूशन को ट्रैक करते हैं। WHO अपनी वेबसाइट पर वेरिएंट के नए नामों के साथ लिस्ट को मेंटेन करेगा।

बता दें कि अभी तक आम बोल-चाल की भाषा में जिस भी देश में कोरोनावायरस का नया वेरिएंट पाया जाता था उसी देश के नाम से उसे बोला जाता था। डॉ. मारिया वान ने कहा, किसी भी देश को कोरोना के वेरिएंट खोजने या उसकी जानकारी देने की सजा नहीं मिलनी चाहिए। वहीं इन लेवल से मौजूदा वैज्ञानिक नामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनसे अहम वैज्ञानिक जानकारियां मिलती हैं और रिसर्च में इनका इस्तेमाल जारी रहेगा।

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