सूडान गृहयुद्ध: सूडानी सेना और RSF आमने-सामने, खार्तूम के बाद अब दोबारा निशाने पर अल-फाशर, क्यों है अहम?

सूडानी सेना और RSF आमने-सामने, खार्तूम के बाद अब दोबारा निशाने पर अल-फाशर, क्यों है अहम?
सूडान में तेजी से गृहयुद्ध बढ़ रहा है, इससे बड़े मानवीय संकट की आशंका जताई जा रही है। वहां की रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने नॉर्थ कोर्डोफान की राजधानी अल-ओबेदी को तीनों तरफ से अपने कब्जे में ले लिया है।

डिजिटल डेस्क, खार्तूम। सूडान में तेजी से गृहयुद्ध बढ़ रहा है, इससे बड़े मानवीय संकट की आशंका जताई जा रही है। वहां की रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने नॉर्थ कोर्डोफान की राजधानी अल-ओबेदी को तीनों तरफ से अपने कब्जे में ले लिया है। उत्तर और पश्चिम की ओर से आरएसएफ की सेनाएं आगे की तरफ बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि ड्रोन हमले भी हुए है, इसमें पांच ऑयल टैंक फार्म तबाह हो चुके हैं।

नरसंहार की आशंका

अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी देते हुए कहा कि सूडान में बड़े पैमाने पर नरसंहार होने की आशंका है। ये अनुमान नहीं है, बल्कि अल-फाशर के अनुभव पर कहा जा रहा है। अल-फाशर पर अक्टूबर, 2025 में आरएसएफ ने कब्जा किया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने एक जांच की थी, इस दौरान हमले में नरसंहार के सबूत मिले थे। अब दोबारा से अल-ओबेद इसी रास्ते पर चल पड़ है।

अल-ओबेद क्यों है जरूरी?

सूडान के मध्य में स्थित शहर है, जिसे अल-ओबेद कहा जाता है। यहां से निकलने वाले हाईवे पश्चिमी दारफुर को पूर्वी क्षेत्रों के जोड़ने का काम करती है। इसके साथ ही इसी इलाके से ऑयल पाइपलाइन भी निकलती है। अगर आरएसएफ इस पर दोबारा से कब्जा करने में सफलता हासिल कर लेता है तो साथ ही उनका पूरे पश्चिम सूडान पर कंट्रोल मजबूत हो जाएगा।

72 घंटे में बड़ी तबाही की आशंका

जानकारी के मुताबिक, अगर आरएसएफ अल-ओबेद पर कब्जा कर लेती है तो यह खार्तूम के बाद दूसरी सबसे बड़ी क्षेत्रीय जीत हो जाएगी। आरएसएफ के हमलों का सूडानी आर्म्ड फोर्सेज (SAF) मजबूती के साथ जवाब दे रही है, लेकिन उसकी घेराबंदी तेज होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 72 घंटों में बड़ी तबाही हो सकती है।

RSF ने क्यों छेड़ी जंग?

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो सूडान में सत्ता संघर्ष की वजह से इस जंग का जन्म हुआ है। सेना और आरएसएफ के बीच लगातार हमले हो रहे हैं। आरएसएफ पहले जनजातीय मिलिशिया था, जो दारफुर में जांजावीड के नाम से पहचानी जाती थी। अब दोनों पक्ष विदेशी समर्थन के जरिए हमले कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस युद्ध ने देश को ताबह कर दिया है। इसके चलते अस्पताल खत्म हो गए, स्कूल बंद हैं और लाखों की संख्या में बच्चे भूख से जूझ रहे हैं।

Created On :   27 Jun 2026 4:30 PM IST

Tags

Next Story