मिडिल ईस्ट में संघर्ष: भारत से महज 1600 किमी दूर, हिंद महासागर के इस द्वीप को खरीदना चाहते हैं ट्रंप, मुंह मांगी रकम चुकाने को तैयार! जानें क्यों है जरूरी?

भारत से महज 1600 किमी दूर, हिंद महासागर के इस द्वीप को खरीदना चाहते हैं ट्रंप, मुंह मांगी रकम चुकाने को तैयार! जानें क्यों है जरूरी?
अमेरिका ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक अहम योजना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हिंद महासागर के एक द्वीप पर ट्रंप की नजर है।

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिका ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक अहम योजना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हिंद महासागर के एक द्वीप पर ट्रंप की नजर है, जिसे वो खरीदना चाहते हैं। इस दावे की एक खास बात बताई जा रही है कि अमेरिकी सरकार इसे खरीदने के लिए एक अच्छी खासी रकम चुकाने के लिए भी राजी है। इस द्वीप की बात की जाए तो भारत से इसकी दूरी महज 1600 किमी है।

मॉरीशस के जरिए इस द्वीप की होगी डील

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप जिस द्वीप में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, उसका नाम चागोस द्वीप बताया जा रहा है। द टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चागोस को खरीदने के लिए ट्रंप प्रशासन मॉरीशस को जरिया बना रहा है। यानी मॉरीशस के जरिए इस द्वीप को खरीदने के लिए डील होने वाली है। ये घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब हाल ही के दिनों में चर्चा हो रही थी कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर बहुत जल्द रणनीतिक रूप से चागोस द्वीप की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने वाले हैं।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन अब ब्रिटेन को दरकिनार कर रहे हैं और मॉरीशस से सीधी बातचीत के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

ट्रंप के लिए क्यों जरूरी है चागोस द्वीप?

चागोस द्वीप समूह का सबसे अहम हिस्सा डिएगो गार्सिया है, जहां पर अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा बना हुआ है। लेकिन अब ब्रिटेन इस द्वीप की जिम्मेदारी मॉरीशस को सौंपने वाला है और मॉरीशस के संबंध चीन से बेहत बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही ईरान से भी रिश्ते अच्छे हैं। चीन और ईरान से मॉरीशस के अच्छे संबंध होने की वजह से अमेरिकी प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इस वजह से ट्रंप इसका कंट्रोल अपने हाथों में रखना चाहते हैं।

अमेरिकी नौसेना के लिए जरूरी?

बताया जा रहा है कि डिएगो गार्सियो को अमेरिका अपनी नौसेना के लिए बेहद जरूरी मान रहा है। यहां से ईरान जैसे देशों पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर आसानी से सैन्य कार्रवाई की जा सके।

मॉरीशस ने डील से किया इनकार?

इस खबर के सामने आने के बाद मॉरीशस ने एक बयान जारी किया है, जिसमें उसने इस प्रकार की किसी भी डील होने से इनकार कर दिया है। इसकी पुष्टि न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में की है। उसमें आगे बताया गया है कि मॉरीशस का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है।

Created On :   8 Jun 2026 8:26 PM IST

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