तालिबान की नई दंड संहिता मानवाधिकार की चिंता: UN ने अफगान सरकार से नए कानून वापस लेने की अपील की, कहा महिलाओं को समाज से अलग कर कोई देश आगे नहीं बढ़ सकता

UN ने अफगान सरकार से नए कानून वापस लेने की अपील की, कहा महिलाओं को समाज से अलग कर कोई देश आगे नहीं बढ़ सकता
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा अफगान की तालिबान सरकार के नए कानून अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है और महिलाओं के साथ कानूनी रूप से भेदभाव करता है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से हाल ही में आई नई दंड संहिता पर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने तालिबान के नए कानूनों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताया है, उन्होंने इन कानूनों को महिलाओं के साथ कानूनी रूप से भेदभाव होना बताया गया है।

आपको बता दें नए कानून पर तालिबान सरकार के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने साइन किए थे। तालिबान के नए कानून में कुल 119 धाराएं हैं, इसमें शामिल कुछ प्रावधानों पर संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने आपत्ति जताई है। UN वुमेन की प्रतिनिधि सुसान फर्ग्यूसन ने भी कहा कि अफगान सरकार ने अपने नए कानून से पुरुषों को महिलाओं पर अधिकार की स्थिति में रखा है और महिलाओं के लिए न्याय पाना और कठिन हो जाएगा। अफगान के नए कानून में जानवरों की लड़ाई की सजा पत्नी को गंभीर रूप से पीटने की सजा से कहीं अधिक है।

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के नए कानून में पत्नी को पीटने पर सजा सिर्फ 15 दिन की जेल रखी गई है, वह भी तब जब वाइफ कोर्ट में साबित कर दे। उसे चोट लगी है और शरीर पर कट, घाव या नीला निशान दिखाई दे रहा है। दूसरी तरफ बिना पति की अनुमति के किसी महिला के मायके जाने पर और वहां रुकने पर उसे तीन महीने की जेल हो सकती है। इसके अलावा अगर उसके मायके वाले महिला को वापस उसके हसबैंड के पास नहीं भेजते, तो उन्हें भी सजा दी जा सकती है।

Created On :   27 Feb 2026 4:09 PM IST

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