छात्र आंदोलन पर विदेश में बवाल!: CJP प्रोटेस्ट पर 6 अमेरिकी सांसदों की रुबियो को चिट्ठी, भारत ने जताई नाराजगी, पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारी ने भी की आलोचना

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन की गूंज अब भारत तक सीमित नहीं रही है, बल्कि विदेश में भी सुनाई देने लगी है। अमेरिका से एक खबर सामने आई है कि वहां के 6 डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस प्रदर्शन को लेकर विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने भारत में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर हुए अत्यधिक बल प्रयोग का मुद्दा उठाने का अनुरोध किया है।
इसके अलावा, अमेरिकी सांसदों ने दिल्ली और भारत के कई इलाकों में आंदोलनकारियों पर हुई कार्रवाई, कथित दमन और गलत तरीके से हिरासत में लिए जाने पर चिंता जाहिर की है।
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इन 6 सांसदों ने लिखा लेटर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को जिन सांसदों ने लेटर लिखा है, उनमें प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया के नाम बताए जा रहे हैं। इन्होंने शुक्रवार को रुबियो को पत्र लिखकर भारत में छात्रों का मुद्दा उठाने की अपील की है।
सांसदों ने आरोप लगाते हुए बताया कि भारत में आंदोलनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, उन्होंने भारतीय दूतावास और अमेरिका के अन्य शहरों में स्थित वाणिज्य दूतावासों पर भी आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि इन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों की निगरानी करने के लिए फोटोग्राफरों को तैनात किया था।
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भारत ने इन आरोपों पर क्या कहा?
प्रमिला जयपाल ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का भी जिक्र करते हुए भारत की मतदाता सूची से लोगों के नाम काटे जाने पर चिंता व्यक्त की है। इसके साथ ही, उन्होंने CJP प्रोटेस्ट को अपना समर्थन दिया है। इस मामले में अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने सांसदों की इन टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे देश के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना किसी भी हाल में स्वीकार नहीं होगा।
अमेरिका में भी हुई आलोचना
भारत के अलावा, अमेरिका में भी इस पत्र की आलोचना हुई है। डेमोक्रेटिक नेता और व्हाइट हाउस के पूर्व सलाहकार अजय जैन भुटोरिया का कहना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और वहां अपनी अदालतें तथा स्वतंत्र प्रेस हैं। उन्होंने साफ कह दिया कि इन सांसदों को भारत के आंतरिक मामलों में उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही, उन्होंने उन्हें अमेरिका के आंतरिक मामलों पर ध्यान देने की हिदायत दी है।
Created On :   17 Oct 2026 12:14 PM IST













