बुजुर्गों का सहारा बने युवा: बुड्ढे होते चीन को टेंप्रेरी बच्चों का सहारा! देश में तेजी से पनप रही लोनलीनेस इकोनॉमी, बच्चे बन कर लाखों कमा रहे युवा

बुड्ढे होते चीन को टेंप्रेरी बच्चों का सहारा! देश में तेजी से पनप रही लोनलीनेस इकोनॉमी, बच्चे बन कर लाखों कमा रहे युवा
चीन में अकेलेपन से जूझ रहे बुजुर्गों की मदद के लिए युवा पैसे लेकर उनका साथ दे रहे हैं। यह सेवा अब कमाई का नया जरिया बन रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप सोच सकते हैं कि किसी का सहारा बनना भी इनकम का एक जरिया हो सकता है? चीन ने आबादी को कंट्रोल करने के लिए कई प्रयास किए लेकिन इसका नतीजा यह हुआ कि बच्चे और युवाओं की संख्या घट गई। हालात ये हैं कि चीन में युवाओं से ज्यादा संख्या बुजुर्गों की हो गई है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा चुका है कि चीन जैसे देश अब युवाओं से ज्यादा बूढ़े हो रहे लोगों का देश बन चुके हैं। चीन में यही बूढ़े लोग अब अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। कई बुजुर्गों के बच्चे नौकरी या पढ़ाई के कारण दूसरे शहरों में रहते हैं जबकि कुछ के पास देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में चीन में एक नया कारोबार तेजी से उभर रहा है जिसे लोनलीनेस इकोनॉमी कहा जा रहा है। इसमें युवा पैसे लेकर बुजुर्गों का साथ देते हैं, उनके घर के छोटे-छोटे काम करते हैं, अस्पताल ले जाते हैं और उनसे बातचीत कर उनका अकेलापन कम करने की कोशिश करते हैं।

91 साल की यांग की कहानी

बीजिंग में रहने वाली 91 साल की यांग बताती हैं कि उनके पति की मौत के बाद उनकी जिंदगी अकेलेपन से भर गई थी। कई बार ऐसा भी हुआ कि उनके पास बात करने के लिए कोई नहीं होता तब वह टीवी से बात किया करती थीं। उन्होंने बताया कि उन्हें आंखों की बीमारी के कारण रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम करने में भी परेशानी होती थी। फिर एक दिन उनकी मुलाकात वांग यिंगवेई की टीम से हुई। यह टीम रोज उनके घर पहुंचकर खाना देती है, घर के खराब सामान ठीक कराती है और जरूरत पड़ने पर हर तरह की मदद करती है। यांग का कहना है कि अब उनकी जिंदगी पहले से काफी बेहतर हो गई है। वांग यिंगवेई का कहना है कि उनकी टीम का काम सिर्फ सेवा देना ही नहीं है बल्कि बुजुर्गों को अपने माता-पिता की तरह रखना और उन्हें प्यार देना है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि बदले में बुजुर्ग भी उन्हें अपने बच्चों जैसा प्यार देते हैं।

क्या है टेम्पररी बच्चों का कॉन्सेप्ट

इस सेवा में कुछ लोग पैसे लेकर अकेले रहने वाले लोगों की मदद करते हैं। वे उनके लिए खाना लाते हैं, घर के छोटे-मोटे काम करते हैं, उन्हें अस्पताल ले जाते हैं, उनसे बातचीत करते हैं और उनका हाल-चाल पूछते रहते हैं। कई लोग इन्हें प्यार से कम्युनिटी चिल्ड्रन यानी समुदाय के बच्चे भी कहते हैं क्योंकि वे परिवार के सदस्य की तरह उनका ख्याल रखते हैं।

ससुर की देखभाल से आया अनोखा बिजनेस आइडिया

इस सेवा की शुरुआत वांग यिंगवेई ने की। वह पहले मोबाइल फोन बेचने का काम करते थे। लेकिन जब उनके ससुर को अल्जाइमर बीमारी हुई तो परिवार को उन्हें एक नर्सिंग होम में रखना पड़ा। वांग का कहना है कि वहां की सुविधाएं उन्हें अच्छी नहीं लगीं। तभी उनके मन में यह विचार आया कि अगर बुजुर्गों को अपने ही घर में समय पर मदद देखभाल और किसी अपने जैसा साथ मिल जाए तो उन्हें वृद्धाश्रम जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सबको मिल रहा सहारा

आपको बता दें कि, यह सुविधा सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। कई युवा, जो नौकरी के लिए दूसरे शहरों में अकेले रहते हैं, डॉक्टर के पास जाने या किसी जरूरी काम के लिए भी ऐसे साथियों को किराए पर रखकर इस सेवा की मदद लेते हैं। इससे उन्हें मानसिक सहारा मिलता है और अकेलेपन का डर भी कम होता है। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि चीन में कुछ लोग पैसे लेकर ट्रैवल या ट्रैकिंग पार्टनर भी बन रहे हैं। वे अपने ग्राहकों के साथ पहाड़ों पर जाते हैं, उनका हौसला बढ़ाते हैं, तस्वीरें खींचते हैं और पूरी यात्रा में उनका साथ देते हैं। कई लोगों का कहना है कि इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और वे पहले से बेहतर महसूस करने लगे।

Created On :   16 Oct 2026 5:09 PM IST

Tags

Next Story