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सहारनपुर में शिवालिक के जंगल से मिला 50 लाख वर्ष पुराना हाथी का जीवाश्म (आईएएनएस स्पेशल)

June 19th, 2020 22:30 IST
 सहारनपुर में शिवालिक के जंगल से मिला 50 लाख वर्ष पुराना हाथी का जीवाश्म (आईएएनएस स्पेशल)

हाईलाइट

  • सहारनपुर में शिवालिक के जंगल से मिला 50 लाख वर्ष पुराना हाथी का जीवाश्म (आईएएनएस स्पेशल)

सहारनपुर (उत्तर प्रदेश), 19 जून (आईएएनएस)। अच्छे इरादों के कारण कई बार बेहतर परिणाम सामने आते हैं। देहरादून के पास के आरक्षित वनों में एक नया बाघ अभ्यारण्य विकसित करने के लिए कैमरा-ट्रैप अध्ययन के दौरान हाथी का जीवाश्म मिला है। बताया जा रहा है कि यह करीब 50 लाख साल पुराना है, जो कि दुनिया के सबसे पुराने जीवाश्मों में से एक है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सीमा से लगते उत्तर प्रदेश के सहारनपुर डिवीजन के कमिश्नर संजय कुमार ने कहा, लॉकडाउन के दौरान इस तरह की दुर्लभ खोज एक सुखद आश्चर्य है। हम और अधिक खोज के लिए वन गुर्जरों की मदद भी ले रहे हैं।

हाथियों के दुर्लभ जीवाश्म से पता चलता है कि हिमालय की तलहटी और उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के सुंदर हरे-भरे तराई क्षेत्रों में कभी विशालकाय हाथियों, जिराफों, घोड़ों और दरियाई घोड़ों का बसेरा होता था।

2002 बैच के आईएएस अधिकारी संजय कुमार ने कहा, हो सकता है कि अध्ययन के अगले चरण में हम कुछ और दुर्लभ जानवरों (बड़े हाथियों के विलुप्त परिवार से संबंध रखने वाले स्टेगोडॉन) के जीवाश्मों की खोज में भाग्यशाली हो सकते हैं। हिमालयी भूविज्ञान के प्रतिष्ठित वाडिया इंस्टीट्यूट के शीर्ष वैज्ञानिक इस प्रयास में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान कर रहे हैं।

हाथियों के सबसे पुराने निवास स्थान का पता तब चला, जब सरकार ने तराई क्षेत्र में बाघों के लिए एक नया रिजर्व बनाने की सोची। राजाजी नेशनल पार्क की सीमा वाले सहारनपुर डिवीजन में शिवालिक रेंज के 33,000 हेक्टेयर के वनों में एक समय बाघों का बसेरा होता था। मगर अवैध शिकार और मानव हस्तक्षेप के कारण क्षेत्र से बाघ गायब हो गए।

नए कमिश्नर संजय कुमार ने इस वन परिक्षेत्र में एक नया बाघ अभ्यारण्य विकसित करने के लिए एक कैमरा ट्रैप अध्ययन की शुरुआत की।

वन्यजीवों में रुचि रखने वाले संजय कुमार ने आईएएनएस से कहा, जिम कॉर्बेट और पूर्वी राजाजी पार्क में बाघों की बढ़ती आबादी धीरे-धीरे पश्चिम की ओर पलायन कर रही है, जिसमें शिवालिक के जंगल भी शामिल हैं। इसलिए हमने यहां वन्यजीवों का अध्ययन करने के बारे में सोचा।

शिवालिक रेंज में कैमरा ट्रैप अध्ययन विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की मदद से किया गया, जिसके अंर्तगत विभिन्न स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाकर वन्य जीवों को कैमरे में कैद किया जाता है। साथ ही इस क्षेत्र में विशेष सर्वेक्षण भी किया गया। सर्वेक्षण के दौरान हाथी का जीवाश्म भी मिला।

जानवरों की उपस्थिति की जांच करने के लिए इस शक्तिशाली उपकरण की मदद से पिछले महीने मई में वन अधिकारियों को नदी के पास एक हाथी का दुर्लभ जीवाश्म मिला। मुख्य वन संरक्षक वीके जैन और उनकी टीम ने बाद में इस जीवाश्म का नमूना देहरादून स्थित वाडिया संस्थान में परीक्षण के लिए भेजा।

संजय कुमार ने कहा, वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों ने अब इस हाथी के जीवाश्म की उम्र 50 लाख से 80 लाख वर्ष तक पुरानी होने की बात कही है।

जैन की अगुवाई में वन अधिकारियों और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की एक टीम ने दावा किया कि उनके द्वारा खोजे गए जीवाश्म क्षेत्र में हाथी का पहला नमूना है।

इस परीक्षण में डॉ. आर. के. सहगल और डॉ. ए. सी. नंदा भी शामिल हैं, जिन्होंने हाथी के जीवाश्मों से संबंधित अध्ययनों पर बड़े पैमाने पर काम किया है। उन्होंने कहा कि यह नमूने 50 से 80 लाख वर्ष पुराने हैं, जो कि क्षेत्र में स्टेगोडॉन की उपस्थिति का संकेत देते हैं। इससे संकेत मिलता है कि कभी इस क्षेत्र में विशालकाय जानवरों का बसेरा होता था और हिमालय की तलहटी का यह क्षेत्र घने जंगलों से ढका हुआ था, जहां कई सारी नदियां भी बहती होंगी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।