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प्रवासी मजदूरों की जिंदगी बदलने में लगे नवनीत सहगल (विशेष बातचीत)

June 13th, 2020 13:30 IST
 प्रवासी मजदूरों की जिंदगी बदलने में लगे नवनीत सहगल (विशेष बातचीत)

हाईलाइट

  • प्रवासी मजदूरों की जिंदगी बदलने में लगे नवनीत सहगल (विशेष बातचीत)

लखनऊ, 13 जून (आईएएनएस)। वह अपने काम की वजह से पहचाने जाते हैं। विभाग कोई भी हो, अपनी कार्यशैली की वजह से कुछ दिनों में वह सुर्खियों में आ ही जाते हैं। अपनी खूबियों के नाते अब तक वह कई सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

बात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल की हो रही है। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश सरकार के खादी एवं ग्रामोद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग व निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के प्रमुख सचिव हैं। कोरोना के कारण जारी लॉकडाउन में दूसरे प्रदेशों से अपनी रोजी-रोटी छोड़ घर लौटे प्रवासी श्रमिकों व कामगारों को स्थानीय स्तर पर उनके हुनर के अनुसार रोजगार देने की अपेक्षा के कारण उनका विभाग इस समय खासा महत्वपूर्ण हो गया है। चूंकि एमएसएमई में न्यूनतम पूंजी, कम जोखिम और कम इन्फ्रास्टक्चर में सर्वाधिक रोजगार देने की संभावना है। केंद्र सरकार भी मौजूदा समय में इस सेक्टर की अहमियत से वाकिफ है। यही वजह है कि केंद्र ने इस सेक्टर को तीन लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि प्रदेश की सर्वाधिक आबादी और देश में सर्वाधिक (14 फीसद) एमएसएमई इकाईयों की संख्या के मद्देनजर पैकेज का सर्वाधिक हिस्सा भी उप्र को ही मिले। फिलहाल विभाग के प्रमुख हाकिम नवनीत सहगल मुख्यमंत्री की मंशा को परवान चढ़ाने में जुटे हैं।

आईएएनएस से एक विशेष वार्ता में सहगल ने बताया, एमएसएमई का पहिया तेजी से घूमे, मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार इसमें अधिकतम लोगों को रोजगार मिले और इनके बूते उप्र कई उत्पादों के उत्पादन का हब बने, इसके लिए हर संभव प्रयास हो रहे हैं। इस क्षेत्र की समस्याओं की पहचान और उद्यमियों से संवाद के लिए हाल ही में साथी एप लांच किया गया। एप से हमने योजनाओं का लिंक दिया है। इससे योजनाओं की जानकारी पारदर्शी हो गयी। सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या पूंजी की है। इसके लिए हम बैंकर्स से लगातार बात कर रहे हैं। इसके नतीजे भी सकारात्मक रहे हैं। केंद्र से आर्थिक पैकेज की घोषणा होने के 24 घंटे के भीतर है ऑनलाइन लोन मेला के जरिए 57 हजार से अधिक उद्यमियों को ऋण मुहैया कराना इसका सबूत है।

सहगल ने बताया कि जून में एक लाख और जुलाई-अगस्त में सवा-सवा लाख उद्यमियों को ऋण मुहैया कराने के बारे में भी बैंकर्स से सहमति बन चुकी है। स्थिति सामान्य होने पर इसके लिए जगह-जगह लोन मेले भी लगेंगे। क्षमता विस्तार और तकनीकी रूप से अपग्रेड करने के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के साथ हम सरकारी विभाग बकाया दिलाने या जीएसटी को रिफंड कराने में भी मदद कर रहे हैं।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, यह आशंका निराधार है कि केंद्र द्वारा एमएसएमई का दायरा बढ़ाने से छोटी ईकाइयां प्रभावित होंगी। हम सबको साथ लेकर चलेंगे। उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में इस सेक्टर में 10-12 लाख लोग समायोजित हो जाएंगे।

उन्होंने बताया, योगी सरकार की चौंपियन स्कीम, एक जिला एक उत्पाद के तहत हमने 20 सेक्टरों की पहचान की है। मसलन बनारस का सिल्क, भदोही की कालीन, कानपुर का चमड़ा, मुरादाबाद के पीतल के सामान, सहारनपुर के लकड़ी के सामान, अलीगढ़ का हार्डवेयर, बरेली का हैंडीक्राफ्ट, लखनऊ का चिकनकारी और गोरखपुर का टेराकोटा आदि। ये उत्पाद खुद में ब्रांड हैं। संबंधित जिलों में इन उत्पादों के क्लस्टर भी हैं। यहां के उत्पाद गुणवत्ता और कीमत में और प्रतिस्पद्र्घी बनें, इसके लिए हर संभव मदद दी जा रही है। इसके अलावा नोएडा के गारमेंट हब को और बेहतर बनाया जाएगा। फार्मा और चिकित्सा उपकरणों के फार्म स्थापित करने पर भी केंद्र और प्रदेश सरकार में बात चल रही है।

यह पूछने पर कि अभी तक कितने प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिया गया है, उन्होंने बताया, दूसरे प्रदेशों से आने वाले श्रमिकों को उनके हुनर के अनुसार स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता है। हमने 2़ 80 लाख ऐसे लोगों के नाम अलग- अलग सेक्टर के उद्यमियों को दे दिया है। उनको रोजगार मिलने की प्रक्रिया शुरू भी हो गयी है। अभी नोएडा के गारमेंट हब से भी दो लाख लोगों की मांग आयी है, जितने लोग उपलब्ध हैं उनको भेज रहे हैं। स्किल मैपिंग के अनुसार सूची अपडेट होने के साथ ही इकाईयों की मांग के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराएंगे। एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाने की योजना के पीछे यही मकसद है।

एक अन्य सवाल के जवाब में प्रमुख सचिव ने बताया कि कोरोना काल में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा भारी मात्रा में फेस मास्क बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खादी के छह लाख मीटर कपड़ों से बने 50 लाख मास्क में से हम 40 लाख बेच भी चुके हैं।

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