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अनलॉक-1 : मप्र में सड़कों पर फिर दिखी चहल-पहल

June 01st, 2020 13:31 IST
 अनलॉक-1 : मप्र में सड़कों पर फिर दिखी चहल-पहल

हाईलाइट

  • अनलॉक-1 : मप्र में सड़कों पर फिर दिखी चहल-पहल

भोपाल, 1 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लॉकडाउन चार चरण मे चला और पांचवें चरण में अनलॉक के पहले चरण की सोमवार से शुरुआत हुई है। इसके चलते जहां सड़कों पर एक बार फिर चहल-पहल नजर आने लगी है। आम लोग अपने कामों को निपटाने में लगे हैं तो सरकारी दफ्तरों में भी आवाजाही बढ़ गई है।

राज्य में सार्वजनिक परिवहन को छोड़कर निजी वाहनों से पूरे प्रदेश में आने-जाने की छूट मिल गई है और कहीं भी जाने के लिए ई-पास की जरुरत नहीं है। सड़कों मे लगभग दो माह बाद इतनी चहल पहल नजर आ रही है। बाजारों में लोगों की निर्बाध गति से आवाजाही शुरू हो गई है। सेाशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोग बाजारों में खरीदी करने पहुंच रहे है। सब्जी दुकानें पर्याप्त संख्या में खुली है। राशन से लेकर दीगर दुकानों पर भी आवश्यक सामान खरीदने वालों की भीड़ है।

राजधानी के शिवाजी नगर में एक दुकान के संचालक महेश कुमार का कहना है कि कोरोना से बचने के लिए आवश्यक दिशा निर्देशों का पालन करते हुए ग्राहकों को सामान दिया जा रहा है। सरकार द्वारा अनलॉक का पहला चरण शुरू किए जाने से लोगों में एक तरफ जहां कोरोना का भय कम होगा वहीं सोशल डिस्टेंसिंग के साथ और तमाम एहतियात बरतते हुए जिंदगी जीने की आदत पड़ेगी।

इसी तरह वहीं विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में भी गतिविधियां जारी है। इन संस्थानों के कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के आधार पर सरकार ने बसें चलाने की भी अनुमति दे दी है। इसके चलते औद्योगिक संस्थानों में भी कर्मचारियों की उपस्थिति बढ़ी है।

राज्य सरकार ने इंदौर, उज्जैन, नीमच और बुरहानपुर के नगरीय क्षेत्रों के बाजारों की एक चौथाई दुकानें, भोपाल के बाजारों की एक तिहाई दुकानें बारी-बारी, देवास, खंडवा नगर निगम तथा धार एवं नीमच नगर पालिका क्षेत्र की आधी-आधी दुकानें बारी-बारी से खुलने की व्यवस्था की है और इसके अलावा शेष प्रदेश में दुकानों के खुलने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

सभी शासकीय और प्राइवेट कार्यालय इंदौर, उज्जैन और भोपाल नगर निगम क्षेत्र में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ और शेष प्रदेश में पूरी क्षमता से खुल रहे हैं। उन्हें स्क्रीनिंग और स्वच्छ रखने की हिदायत दी गई है। साथ ही थर्मल स्कैनिंग, हैंड वाश और सैनिटाइजर का प्रावधान सभी प्रवेश और निकास द्वारों और सामान्य क्षेत्रों में किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए चरणबद्घ तरीके से आर्थिक गतिविधियों को संचालित किया जाएगा। अब रात नौ बजे से सुबह पांच बजे तक ही कर्फ्यू रहेगा। इस दौरान आवश्यक गतिविधियों को छोड़कर आवागमन पूरी तरह प्रतिबािंधत रहेगा। अभी शिक्षण संस्थाओं केा नहीं खोला जा रहा है।

एक तरफ जरुरी सामान की दुकानें खुलने से आम लोग राहत की सांस ले रहे है। वहीं सरकारी और निजी कार्यालयों में रेड जोन भोपाल, इंदौर और उज्जैन को छोड़कर सभी स्थानो ंपर सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति सोमवार से बढ़ गई है।

तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के महामंत्री लक्ष्मी नारायण शर्मा का कहना है, कोरोना से बचाव का सबसे बड़ा हथियार सोशल डिस्टेंसिंग है, मगर सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से इस पर अमल करने के इंतजाम नहीं किए गए है। वही गर्मी होने से कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का भी इंतजाम नहीं है। सरकार का कार्यालयों मे ंउपस्थ्ििात बढ़ाने का फैसला घातक सिद्घ होगा और मरीजों की संख्या भी बढ़ने से रोकी नहीं जा सकेगी, क्योंकि हमारे पास इस बीमारी से लड़ने के लिए आवश्यक साधन नहीं है।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।