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नूरावाद की महिलाओं को दीदी कैफे से आत्मनिर्भर बनने की आस

June 19th, 2020 16:00 IST
 नूरावाद की महिलाओं को दीदी कैफे से आत्मनिर्भर बनने की आस

हाईलाइट

  • नूरावाद की महिलाओं को दीदी कैफे से आत्मनिर्भर बनने की आस

मुरैना, 19 जून (आईएएनएस)। कोरोना महामारी ने आम आदमी की जिंदगी पर बड़ा असर डाला है। ऐसे में मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में महिलाओं ने हालात बदलने के मकसद से दीदी कैफे की शुरुआत की और उन्हें आस इस बात की है कि यह पहल आने वाले समय में उनकी जिंदगी में नई रोशनी लाएगी।

कोरोना महामारी के कारण लोगों की रोजी-रोटी पर संकट बना हुआ है। काम-धंधे बंद हैं और लोगों को दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे समय में मुरैना के नूरावाद गांव की महिलाओं ने अपनी आजीविका के लिए मां शीतला जनहितकारी महिला मंडल बनाया। ये महिलाएं रुई की दीपक-बाती बनाने का काम करती थी। अब उन्होंने जिला पंचायत कार्यालय के परिसर में दीदी कैफे शुरू किया है।

समूह की अध्यक्ष द्रोपदी बाधम ने आईएएनएस को बताया कि कोरोना महामारी के दौर में उनके समूह ने ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिला पंचायत कार्यालय में दीदी कैफे शुरू किया, मगर वर्तमान में उनकी आमदनी उतनी नहीं हो रही है, जितने की वे अपेक्षा कर रही थीं। दीपक-बाती बनाकर उनके समूह की महिलाएं औसत तौर पर 100 रुपये दिन कमा लिया करती थीं, मगर कैफे से उतनी भी आमदनी नहीं हो रही है, क्योंकि जिला पंचायत कार्यालय में अभी कम कर्मचारी आ रहे हैं।

बाथम बताती हैं कि जिस स्थान पर उन्होंने कैफे खोला है, उसका मासिक किराया पांच हजार रुपये माह है, वर्तमान में तो यह स्थिति है कि अभी जो सामान लाती हैं या यूं कहें कि लागत की रकम ही मुश्किल से निकल पाती है। वर्तमान में औसत तौर पर कुल बिक्री पांच से छह सौ रुपये मात्र की है।

रेखा बाथम बताती हैं कि समूह की 12 महिलाएं इस कैफे से जुड़ी हैं, इनमें से दो या तीन सदस्य ही नियमित रूप से यहां आती हैं। कैफे में आने वाले व्यक्ति को ऑर्डर देने पर ही खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। वैसे, यहां कई व्यंजनों के कच्चे माल को तैयार रखा जाता है, कई बार तो स्थिति हो जाती है कि कच्चा सामान, उदाहरण के तौर पर आलू आदि को उबालकर रखा जाता है, मगर किसी भी ग्राहक के न आने पर उसके खराब होने का खतरा रहता है। इस स्थिति में समूह की सदस्य घर ले जाकर उसका उपयोग कर लेती हैं।

आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार, इस समूह की महिलाओं ने कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए एक लाख 50 हजार मास्क बनाए, उन्हें बेचकर समूह की महिलाओं को 90 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तरुण भटनागर ने मां शीतला स्व-सहायता समूह के कार्यो को देखकर जिला पंचायत कार्यालय परिसर में दीदी कैफे (कैंटीन) चलाने की अनुमति दी। स्व-सहायता समूह द्वारा 15 हजार रुपये का ऋण लेकर कच्ची सामग्री खरीदकर समूह की अध्यक्ष द्रोपदी बाथम ने दीदी कैफे का संचालन शुरू किया।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद आम जिंदगी सामान्य होने पर उनकी आमदनी बढ़ेगी और पारिवारिक स्थिति में भी सुधार आएगा। इन महिलाओं के परिवार को कई बार साहूकारों से भी कर्ज लेना पड़ा है, लेकिर ये कैफे से आमदनी बढ़ने पर इससे भी निजात की आस लगाए हुई हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।