अमरनाथ यात्रा 2026: 5 दिन में पूरी तरह पिघला शिवलिंग, जानिए कब-कब समय से पहले गायब हुआ बाबा बर्फानी का हिमलिंग और क्या है इसका कारण

5 दिन में पूरी तरह पिघला शिवलिंग, जानिए कब-कब समय से पहले गायब हुआ बाबा बर्फानी का हिमलिंग और क्या है इसका कारण
इस साल 57 दिवसीय वार्षिक अमरनाथ यात्रा बीते शुक्रवार यानि कि 3 जुलाई से विधिवत शुरू हुई थी। लेकिन, यात्रा के महज पांच दिन बाद ही हिमलिंग के पिघलने की खबर से श्रद्धालुओं को निराश कर दिया।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। अमरनाथ यात्रा करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार करते हैं। वहीं इस साल 57 दिवसीय वार्षिक अमरनाथ यात्रा बीते शुक्रवार यानि कि 3 जुलाई से विधिवत शुरू हुई थी। लेकिन, यात्रा के महज पांच दिन बाद ही हिमलिंग के पिघलने की खबर से श्रद्धालुओं को निराश कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यात्रा के दौरान एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा तक पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं। लेकिन, अब हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है।

इस खबर के बाद अधिकांश श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल है कि आखिरकार महज पांच दिनों में हिमलिंग कैसे पूरी तरह से गायब हो गया और क्या ऐसा पहली बार हुआ है? लेकिन, बीते वर्षों में कई बार ऐसा हुआ है कि यात्रा पूरी होने से पहले ही मौसम, बढ़ते तापमान और अन्य गतिविधियों के कारण हिम शिवलिंग समय से पहले ही काफी छोटा हो गया या पूरी तरह पिघल गया। आइए जानते हैं इसका कारण और बीते वर्षों का इतिहास।

इस साल कितनी रही हिमलिंग की ऊंचाई

इस साल अमरनाथ गुफा में 23 मई को हिमलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी, वहीं 29 जून को यह घटकर पांच फीट तक रह गई। यह यात्रा 7 जुलाई को शुरू हुई, लेकिन इससे पहले यानि कि 6 जुलाई तक हिमलिंग का अधिकांश हिस्सा पिघल चुका था। इसके बाद 7 जुलाई तक खबरें सामने आईं कि हिमलिंग का 90 प्रतिशत हिस्सा पिघल चुका है। लेकिन अब जो खबरें सामने आईं उनके अनुसार, हिम शिवलिंग पूरी तरह से अंतर्ध्यान हो गया है।

हिमलिंग के पिघलने का वैज्ञानिक कारण?

- विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में औसत तापमान बढ़ने से बर्फ के प्राकृतिक निर्माण और उसके टिके रहने की अवधि कम हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग इसका सबसे बड़ा कारण मानी जा रही है।

इसके अलावा हर दिन हजारों श्रद्धालुओं के गुफा तक पहुंचने से आसपास का तापमान और नमी प्रभावित होती है। मानव शरीर की गर्मी और लगातार आवाजाही भी हिम शिवलिंग पर असर डालती है।

- गुफा के भीतर प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा उपकरण और अन्य व्यवस्थाओं से निकलने वाली गर्मी भी लोकल टेंपरेचर बढ़ने के कारण में से एक है।

- विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क निर्माण, बढ़ती यातायात, प्लास्टिक कचरा और आसपास के पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव भी इस सेंसेटिव एरिया को प्रभावित कर रहे हैं।

बीते सालों में कब- कब पिघला हिम शिवलिंग

अब लोगों के मन में आने वाले सबसे अहम सवालों में से एक कि, क्या ऐसा पहली बार हुआ जब यात्रा के दौरान अमरनाथ गुफा का हिम शिवलिंग पिघल गया? इसके लिए बीते वर्षों पर गौर करें तो साल 2024, 2025 और 2026 सहित पिछले कई वर्षों में यात्रा के शुरुआती दिनों में ही शिवलिंग के तेजी से छोटे होने या लगभग समाप्त हो जाने की खबरें सामने आई हैं।

साल 2000 के बाद कई बार चिंता बढ़ी

- विशेषज्ञों के अनुसार 2000 के दशक के बाद से अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग पहले की तुलना में जल्दी पिघलने लगा। इसका कारण बढ़ते तापमान और यात्रा के दौरान बढ़ती ह्यूमन एक्टिविटी सामने आईं। वर्ष 2017 में गर्मी अधिक रहने के कारण हिम शिवलिंग जल्दी छोटा हो गया था। उस समय भी पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा हुई थी।

- साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम रही। इसके बावजूद हिम शिवलिंग पिघल गया। इस दौरान मौसम की परिस्थितियों को कारण बताया गया था। इसके 4 साल बाद यानि कि साल 2024 में यात्रा शुरू होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर ही बढ़ती गर्मी के कारण हिम शिवलिंग के समय से पहले पिघलने की खबरें सामने आईं।

- बीते साल 2025 में भी ऐसा देखने को मिला जब यात्रा शुरू होने से पहले ही हिम शिवलिंग 50 प्रतिशत से अधिक पिघल चुका था। जुलाई के मध्य तक अधिकांश श्रद्धालुओं को पूर्ण आकार का हिमलिंग देखने का अवसर नहीं मिला था।

कैसे बनता है अमरनाथ का हिम शिवलिंग?

विशेषज्ञों के अनुसार, हिम शिवलिंग का निर्माण पूरी तरह से प्राकृतिक प्रक्रिया है। अमरनाथ गुफा में छत की दरारों से टपकने वाला पानी बहुत ही कम तापमान में जमकर नीचे की ओर बर्फ के खंभे का रूप ले लेती हैं। विज्ञान की भाषा में इसे आइस स्टैलेग्माइट (Ice Stalagmite) कहा जाता है। कभी यह 10–12 फीट तक ऊंचा बनता है तो कभी छोटा रहता है। यही ठोस बर्फ का खंभा हिंदू धर्म में बाबा बर्फानी का रूप है, जिसके दर्शन के लिए करोड़ों श्रद्धालु इंतजार करते हैं। इसका आकार हर वर्ष मौसम, बर्फबारी, तापमान और जल प्रवाह के अनुसार अलग-अलग होता है। इसमें यदि जरा भी बदलाव होता है तो य​ह धीरे- धीरे पिघलने लगता है।

Created On :   8 July 2026 6:52 PM IST

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