Hight Court Decision: पत्नी के रंग और बात करने के तरीके का मजाक उड़ाने वाले पति पर अदालत का हैरान करने वाला फैसला, तर्क सुनकर आप ही बताएं क्या सही-क्या गलत?

डिजिटल डेस्क, रांची। क्या आप अपनी पत्नी की स्किन टोन का मजाक उड़ाते हैं। क्या आप इतनी हिम्मत जुटा पाते हैं कि अपनी पत्नी की समझ या बात करने के तरीके की हंसी उड़ा सकें। अगर हां, तो ये खबर आपको जरूर पढ़नी चाहिए। ऐसे मामलों पर अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। मामला झारखंड हाईकोर्ट में पहुंचा एक वैवाहिक विवाद इन्हीं सवालों को लेकर चर्चा में आ गया। पत्नी ने पति पर कई तरह के ताने देने और उसे मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया था। मामला जब अदालत के सामने आया तो कोर्ट ने सिर्फ पति-पत्नी के बीच हुए विवाद को नहीं देखा, बल्कि यह भी समझा कि धारा 498A किन हालात में लागू होती है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पति को राहत दी और उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी।
यह भी पढ़े -एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय कबड्डी टीम में केसीएल का जलवा, खिलाड़ियों ने कहा- देश के लिए खेलना सपना सच होने जैसा
शादी के बाद शुरू हुआ विवाद
दोनों की शादी एक ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई। पत्नी का कहना था कि पति उसके रंग, शर्मीले स्वभाव, कम समझ और ठीक से बात न कर पाने को लेकर मजाक उड़ाता था। वहीं, पति ने भी पत्नी पर कुछ आरोप लगाए। उसका कहना था कि पत्नी की वजह से उसे एक बीमारी हो गई, जिससे वह अब भी परेशान है। विवाद बढ़ने के बाद पति ने पत्नी से घर छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद पत्नी पहले बेंगलुरु में अपनी छोटी बहन के पास और फिर कोलकाता में अपनी बड़ी बहन के पास रहने लगी।
तलाक के बाद पत्नी ने दर्ज कराया केस
पति ने रांची की फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगा दी। इसके बाद पत्नी ने भी कानूनी कदम उठाया। उसने पति पर IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का आरोप लगाया। साथ ही 35 लाख रुपये के स्त्रीधन का सामान वापस नहीं करने की शिकायत भी की। 11 जून 2024 को रांची की निचली अदालत ने पति को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेज दिया। पति ने इस आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया मामला?
जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की बेंच ने पूरे मामले को देखा। कोर्ट ने कहा कि 498A के तहत हर अपमान या ताने को आपराधिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी देखा कि पत्नी की शिकायत में दहेज या किसी गैरकानूनी संपत्ति की मांग का आरोप नहीं था।
कोर्ट के मुताबिक, 498A तब लागू होती है जब पति का व्यवहार इतना गंभीर हो कि उससे महिला आत्महत्या के लिए मजबूर हो सकती हो या उसकी जान, शरीर या स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो। अदालत ने माना कि किसी के रंग, IQ या बातचीत करने के तरीके पर ताना मारना गलत और दुख पहुंचाने वाला हो सकता है। लेकिन केवल ऐसे आरोपों के आधार पर 498A के तहत आपराधिक मामला चलाना सही नहीं होगा।
पति को मिली बड़ी राहत
झारखंड हाईकोर्ट ने निचली अदालत का समन आदेश और पति के खिलाफ धारा 498A की कार्रवाई रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि दिए गए आरोपों को सच मान लेने के बाद भी इस मामले में 498A के तहत अपराध नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि पति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाना कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा।
Created On :   25 Aug 2026 5:24 PM IST












