जाति जनगणना पर घमासान!: कांग्रेस ने केंद्र पर किया जोरदार हमला, जयराम रमेश बोले- यह धोखा और विश्वासघात

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में आरक्षण विरोध को लेकर आंदोलन हुआ है। इस बीच कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ठीक तरीके से जाति जनगणना नहीं कराना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि इसका सामाजिक न्याय से कोई लेना-देना नहीं है। जाति जनगणना नहीं होने को लेकर उन्होंने कहा कि यह धोखा और विश्वासघात है।
कांग्रेस ने यह आरोप ऐसे समय लगाया है, जब जनगणना के फॉर्म में SC/ST का कॉलम दिया गया है, लेकिन अन्य जातियों के कॉलम गायब हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाया है।
जाति जनगणना पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया
जयराम रमेश ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा, "आप अगर ईमानदारी से सामाजिक न्याय पर विश्वास रखते हैं तो जो आप कर रहे हैं, उसको रद्द करिए। जो तरीका बिहार और तेलंगाना में अपनाया गया था, उसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करिए। विशेषज्ञों से बात करिए। सर्वदलीय बैठक बुलाइए। आरक्षण का प्रावधान जनसंख्या से जुड़ा हुआ है। अगर जाति जनगणना ठीक से नहीं होगी, तो आरक्षण की व्यवस्था मजबूती से नहीं रह पाएगी।"
उन्होंने आगे कहा, "जाति जनगणना सिर्फ एक सवाल पूछने तक सीमित नहीं हो सकती। इसे व्यापक, वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि देश के सभी वर्गों की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति सामने आ सके।"
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PM मोदी को लिखी थी चिट्ठी
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "20 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जातिगत जनगणना के संबंध में 21 पेज का पत्र लिखा है। यह कांग्रेस पार्टी की ओर से जातिगत जनगणना के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को लिखा गया तीसरा पत्र है। इससे पहले 16 अप्रैल 2023 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहला पत्र लिखा था। इसके बाद खरगे ने 5 मई 2025 को दूसरा पत्र लिखा था, जिसमें कुछ रचनात्मक सुझाव भी दिए गए थे। लेकिन अफसोस की बात है कि इन दोनों पत्रों का अब तक कोई जवाब नहीं मिला।"
जनगणना को लेकर क्या बोले?
कांग्रेस महासचिव ने कहा, "भारत में सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं। अलग-अलग जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो। लेकिन सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए ओपन-एंडेड प्रश्न का तरीका चुना है, जो भ्रामक है।"
Created On :   25 Aug 2026 2:20 PM IST












