comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

पाकिस्तान के मुल्ला-सैन्य सांठगांठ का परिणाम है 26/11 हमला

November 26th, 2020 22:00 IST
 पाकिस्तान के मुल्ला-सैन्य सांठगांठ का परिणाम है 26/11 हमला

हाईलाइट

  • पाकिस्तान के मुल्ला-सैन्य सांठगांठ का परिणाम है 26/11 हमला

नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। मुंबई में 2008 के आतंकवादी हमलों की गुरुवार को 12वीं वर्षगांठ है, जिसे 26/11 के नाम से भी जाना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हर कोई जानता है कि पाकिस्तान से आए दस लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के 10 आतंकवादियों ने मुंबई में कहर बरपाया था। यह आतंकवादी समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे और इन्होंने 60 घंटों तक चले नरसंहार में कई जगहों पर गोलीबारी की और लोगों को बंधक बनाया। आतंकियों ने की गोलीबारी में 18 सुरक्षाकर्मियों सहित 166 लोगों की जान चली गई।

पाकिस्तान के सर्वोच्च जांच संगठन फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) ने कबूल किया कि 26/11 के मुंबई हमलों में शामिल आतंकवादी पाकिस्तानी नागरिक थे। भारत का पश्चिमी पड़ोसी पाकिस्तान इस्लामिक आतंकवादियों का केंद्र बन गया है, जो इसे भारत के खिलाफ और अफगानिस्तान के खिलाफ एक राष्ट्र नीति के रूप में उपयोग करता है।

अंतर्राष्ट्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर पाकिस्तान के कई बार आतंकवादी समूहों के साथ घनिष्ठ संबंध साबित हुए हैं। सबसे प्रमुख तब था, जब अमेरिकी सेनाओं ने ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में उसके ठिकाने से मार गिराया था, जहां उसे पाकिस्तानी सेना और खुफिया विभाग द्वारा एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया था।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारत 1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद से कट्टरपंथी इस्लाम का सबसे बड़ा शिकार रहा है।

पाकिस्तान ने अपनी उपस्थिति एक दुष्ट राष्ट्र के तौर पर साबित की है, जिसका अस्तित्व धर्म के आधार पर ही टिका हुआ है। भारत में दुनिया में मुसलमानों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है, लेकिन देश के बहुसंख्यक हिंदुओं और अल्पसंख्यक मुसलमानों के बीच सामंजस्य और धर्म को राष्ट्र की नीति के रूप में उपयोग नहीं करने के कारण संबंध फिर भी सामंजस्यपूर्ण रहे हैं। इसका श्रेय भारत के मुसलमानों को भी जाता है, जिनमें से अधिकांश इस्लाम के सूफ वर्जन को अपनाते हैं।

वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान में कट्टरपंथी इस्लाम हावी है। पाकिस्तान अपने संबंधित आतंकी नेटवर्क के साथ, इस्लाम के नाम पर फंड इकट्ठा करता है और हिंसक गतिविधियों के लिए दान का भी इस्तेमाल करता है।

हरकत-उल-मुजाहिदीन और जमात-उल-फुरकान, जो कि टीटीपी और अलकायदा से जुड़े दो प्रतिबंधित आतंकी संगठन हैं, उन्होंने खुद को दान के तौर पर ही स्थापित किया है।

ये संगठन पाकिस्तानी मुसलमानों की उदारता का लाभ उठाते हैं, जो सालाना जकात और फितरा के हिस्से के रूप में अरबों रुपये का योगदान करते हैं। इनमें भोजन या धनराशि से जुड़े उपहार शामिल रहते हैं।

इन फंड्स का उपयोग डावा (उपदेश) और जिहाद के लिए किया जाता है, जिसमें आतंक के लिए भर्ती, प्रशिक्षण, उपकरण और हथियारों की खरीद शामिल है। हालांकि, कट्टरपंथी इस्लाम ने पाकिस्तान के प्रभाव और कई मदरसों की उपस्थिति के कारण भारतीय मुसलमानों के एक वर्ग के बीच भारत में भी लोकप्रियता हासिल की है, जो कि इस्लाम के वहाबी वर्जन (संस्करण) का प्रचार करते हैं।

एक विचारधारा के रूप में कट्टरपंथी इस्लाम एक या दो देशों के लिए नहीं बल्कि एक पूरी सभ्यता के लिए खतरा है और इसे उदार लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा माना जाता है, जो कई राष्ट्रों ने समय के साथ अपनाए हैं। यह विचारधारा एक सार्वभौमिक यूटोपियन अधिनायकवादी राष्ट्र में विश्वास करती है, जिसे ओम्मा कहा जाता है, जहां मुसलमान शासन करेंगे और अन्य धर्मों से संबंधित लोगों को या तो नष्ट कर दिया जाएगा या उन्हें तथाकथित यूटोपियन राष्ट्र में द्वितीय श्रेणी के नागरिकों के रूप में रहने के लिए छोड़ दिया जाएगा।

यह एक वैश्विक समस्या है, क्योंकि कई आतंकवादी संगठन इस वर्जन में विश्वास करते हैं। इस विचारधारा को मानने वाले कई बड़े आतंकी संगठन विश्वभर में मौजूद हैं, जिनमें आईएसआईएस, अलकायदा, अल शबाब, जेईएम, एलईएल या सिमी जैसे संगठन प्रमुख हैं। इनमें से कई संगठनों को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए पाकिस्तानी प्रतिष्ठान द्वारा सक्रिय रूप से समर्थन दिया जाता है। इसी के तहत 2001 में भारत में संसद हमला, अक्षरधाम मंदिर हमला, जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला, 26/11 मुंबई हमला जैसी घटनाओं के साथ ही दिल्ली, वाराणसी और रामपुर में हुए धमाके किए गए थे। इसके अलावा भी पाकिस्तान प्रायोजित कई हिंसक घटनाएं देखने को मिलती रहती हैं।

पाकिस्तान न केवल एक असफल देश है, जिसकी अपनी खुद की समस्याएं ही खत्म नहीं होती हैं, बल्कि वह आतंकवाद का केंद्र भी है। पाकिस्तान अपने नागरिकों को बुनियादी आर्थिक और सामाजिक न्याय प्रदान करने में भी विफल रहा है। अपनी स्थिति को सुधारने के बजाय पाकिस्तानी सेना और वहां की जासूसी एजेंसी आईएसआई इन जिहादी समूहों का इस्तेमाल अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए करती रही है।

निष्कर्ष निकाला जाए तो कहा जा सकता है कि आतंकवाद मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जहां जिहाद के नाम पर निर्दोष लोगों की जान ले ली जाती है और इस काम में पाकिस्तान वर्षों से लिप्त है।

(यह कंटेंट इंडिया नैरेटिव डॉट कॉम के साथ एक व्यवस्था के तहत तैयार किया गया है)

एकेके/एएनएम

कमेंट करें
ymfZN
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।