comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

मोदी के राज में 45 साल की सबसे ज्यादा बेरोजगारी: राहुल

मोदी के राज में 45 साल की सबसे ज्यादा बेरोजगारी: राहुल

हाईलाइट

  • मोदी और खट्टर के भाषणों में लगातार झूठे वादे सुनाई दे रहे हैं
  • हमारी सरकार में हरियाणा में अर्थव्यवस्था बेहतर थी
  • हरियाणा के विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए नूंह में जनसभा को संबोधित किया

डिजिटल डेस्क, नूंह। पूरे देश में हर कोई भाजपा सरकार से परेशान है। नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स (gst) जैसे फैसलों से सबको बर्बाद कर दिया, उद्योग-धंधे चौपट कर दिए। एक आदमी ऐसा नहीं है, जिसको इससे फायदा हुआ हो। यह कहना है पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का। वे सोमवार को हरियाणा के विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए नूंह में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। 

नूंह विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार चौधरी आफताब अहमद के लिए प्रचार करते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आप याद कीजिए हमारी सरकार में हरियाणा में अर्थव्यवस्था कितनी बेहतर थी, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता था। आज मोदी के राज में देश में 45 साल की सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। 

उन्होंने पीएम मोदी और सीएम खट्टर पर आरोप लगाते हुए कहा कि मोदीजी और खट्टर जी के भाषणों में एक के बाद एक लगातार झूठे वादे सुनाई दे रहे हैं। रोजगार का झूठा वादा, किसानों को सही दाम का झूठा वादा किया।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पर तंज

राहुल ने कहा कि इनके मीडिया के मित्रों का ठेका लगा हुआ है। आपने कभी टीवी पर बेरोजगारी की खबर देखी है? ये लोग बिलकुल नहीं दिखाएंगे, ये बॉलीवुड की बात करेंगे, लेकिन जनता को सब मालूम है। उन्होंने वादा किया कि इस क्षेत्र की कुछ आवश्यकताएं हैं। गुड़गांव से अलवर की रेलवे लाइन, नूंह इंजीनियरिंग कॉलेज को यूनिवर्सिटी का दर्जा, कोटला झील का विस्तार और मेवात नहर। हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनते ही ये काम हो जाएंगे। 

अर्थव्यवस्था में तेजी लानी है ​तो गरीबों की जेब में पैसा डालना ही पड़ेगा

उन्होंने कहा कि हम गरीबों की शक्ति को समझते हैं। हम जानते हैं कि गरीब, किसान, मजदूर ही इस देश को बनाता और चलाता है। अगर अर्थव्यवस्था में तेजी लानी है, तो गरीब, किसान, मजदूर की जेब में पैसा डालना ही पड़ेगा। यूपीए सरकार की मनरेगा ने यही काम किया था। गरीबों की जेब में पैसा जाते ही, उनकी खरीदने की क्षमता बढ़ी, जिसका फायदा अर्थव्यवस्था को हुआ।
 

कमेंट करें
gM5Ns
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।