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दोस्त अटल के लिए खास चाय बनाते थे आडवाणी, दिल्ली की सड़कों पर खाते थे चाट और गोलगप्पे

दोस्त अटल के लिए खास चाय बनाते थे आडवाणी, दिल्ली की सड़कों पर खाते थे चाट और गोलगप्पे

हाईलाइट

  • पूर्व पीएम और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का 93 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
  • राजधानी दिल्ली के एम्स में उनका इलाज चल रहा था, यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।
  • अटल जी के जाने के बाद पूरा देश शोक में डूबा हुआ है, आम लोगों के साथ साथ खास लोग सभी शोक में डूबे हुए हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का 93 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। राजधानी दिल्ली के एम्स में उनका इलाज चल रहा था, यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। अटल जी के जाने के बाद पूरा देश शोक में डूबा हुआ है, आम लोगों के साथ साथ खास लोग सभी शोक में डूबे हुए हैं। अटल-आडवाणी की जोड़ी को भी याद करते हुए त्याग व एक दूसरे के अटूट प्रेम की मिसाल के रूप में पेश किया जाता है। 90 दशक में पार्टी अध्यक्ष रहते आडवाणी का कद बहुत तेजी से बढ़ गया था, तब मुंबई अधिवेशन में ये माना  जा रहा था कि1996 के चुनाव में आडवाणी भाजपा के प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवार होंगे, तब आडवाणी ने खुद  मंच से घोषणा कर दी थी कि भाजपा सत्ता में आई तो अटलजी प्रधानमंत्री होंगे।

भारतीय राजनीति में अगर सच्ची दोस्ती की बात करें तो लोग अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की दोस्ती की मिसाल देते हैं। इन दोनों ही दिग्गज नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। अटलजी ने देश को विकास की एक नई राह दिखाई थी। यह कहना गलत नहीं होगा कि जहां देश में उस वक्‍त जाति, धर्म और क्षेत्र की राजनीति चरम पर होती थी उन्‍होंने उस वक्‍त अपने एजेंडे में विकास की राजनीति को शामिल कर एक नए युग का आरंभ किया था। इस दौरान उनके मित्र आडवाणी सदैव उनके साथ नजर आए।

आडवाणी खुद अटल की तारीफ करते हुए नहीं थकते हैं। उन्‍होंने ही नवंबर 1995 में पार्टी के मुंबई अधिवेशन में अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री उम्‍मीदवार बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद बीजेपी पार्टी 1996 के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और अटल जी देश के प्रधानमंत्री बने। यह सरकार सिर्फ 13 दिन ही चल सकी, क्योंकि भाजपा के पास बहुमत के लिए जरूरी सांसद नहीं थे।

आडवाणी को बनाया था उप प्रधानमंत्री
इसके बाद अटलजी ने एक बार फिर 1998 में पीएम पद की शपथ ली और 2004 तक एनडीए सरकार का नेतृत्व किया। अटलजी ने 2002 में गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को देश का उप प्रधानमंत्री बना दिया। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने एक कार्यक्रम में अटलजी को विकास पुरुष और लालकृष्ण आडवाणी को लौह पुरुष की संज्ञा दी थी। वहीं अटलजी के साथ अपनी दोस्ती को याद करते हुए आडवाणी ने एक इंटरव्यू में बताया था, 'अटलजी जब प्रधानमंत्री थे तब अगर कोई उनसे सरकार या पार्टी के बारे में कुछ बात करने आता था तो वो बोलते थे, आडवाणी जी से बात हो गई? कर लो एक बार. ऐसी दोस्ती कहां देखने को मिलेगी।'

अटलजी के लिए चाय बनाते थे आडवाणी जी
राजनीति से हटकर भी इन दोनों की दोस्ती का एक अलग ही रंग था। वो 50 का ही दशक था, जब ये दोनों दोस्त दिल्ली में एक ही कमरे में रहा करते थे। यहां वे एक दूसरे से हमेशा अपने सुख-दुख साझा किया करते थे। इस दौरान आडवाणी जी कभी-कभी अटल जी के लिए चाय बना दिया करते थे, क्योंकि आडवाणी जी को चाय के अलावा कुछ और बनाना उस समय नहीं आता था।

दिल्ली की गलियों में स्कूटर से घूमते थे दोनों दोस्त
यह भी कहा जाता है कि दोनों नेताओं को जब भी कुछ चटपटा खाने का मन होता था तो वह एक साथ पुरानी दिल्ली के लिए निकल पड़ते थे। उस समय आडवाणी स्कूटर चलाते थे और वाजपेयी जी पीछे बैठा करते थे। दोनों दोस्त दिल्ली की गलियों में स्कूटर से घूमा करते थे। आडवाणी ने बताया था कि दिल्ली के रिवोली और रीगल सिनेमा हॉल के बीच में बैठे गोलगप्पे वालों के पास जाकर ये दोनों नेता चाट खाते थे।

नरेंद्र मोदी के लिए दोनों दोस्तों के बीच थे मतभेद
अटल-आडवाणी की दोस्ती के बीच में एक समय बड़ा राजनीतिक मतभेद भी सामने आया था। इस दौरान कहा गया कि नरेन्द्र मोदी को लेकर दोनों नेताओं में मतभेद पैदा हो गए थे। 2002 में गुजरात दंगे के बाद अटल बिहारी वाजपेयी तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पद से इस्तीफा दिलाने के मूड में दिख रहे थे। लालकृष्ण आडवाणी इस दौरान नरेंद्र मोदी के पक्ष में अड़ गए थे और फिर अटलजी को बैकफुट पर जाना पड़ा।

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