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मप्र में भाजपा की झटका मार सियासत

June 18th, 2020 13:31 IST
 मप्र में भाजपा की झटका मार सियासत

हाईलाइट

  • मप्र में भाजपा की झटका मार सियासत

भोपाल, 18 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सियासत की चौसर पर अपनी चालें जारी रखने का सिलसिला बनाए हुए है और वह कांग्रेस को लगातार झटके पर झटके दिए जा रही है। इसका आने वाले समय में राज्य की सियासत पर बड़ा असर पड़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

राज्य में भाजपा के हाथ में कांग्रेस के भीतर हुई बगावत के चलते फिर सत्ता की कमान आई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और तत्कालीन 22 विधायकों के कांग्रेस छोड़ने से कांग्रेस कमजोर हुई है। अब भाजपा ने उन बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों पर नजर गड़ा दी है जो अब तक कमलनाथ के साथ खड़े नजर आते थे और भाजपा की इस कोशिश का असर भी दिखने लगा है। सपा, बसपा और निर्दलीय कुल मिलाकर चार विधायक बुधवार को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के सामने उपस्थिति भी दर्ज करा चुके हैं।

सामने आई तस्वीरें बताती है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर व नरेंद्र सिंह तोमर से बसपा विधायक राम बाई, संजीव सिंह कुशवाहा, सपा विधायक राजेश शुक्ला और निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा ने मुलाकात की। इस मौके पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे।

भाजपा की तरफ बसपा, सपा व निर्दलीय विधायकों के बढ़ते कदमों के सवाल पर प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का कहना है, इस बारे में मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना है बाकी आप सब लोग सब जानते हैं। जहां तक सहभोज की बात है तो भाजपा की संगत की पंगत है और भाजपा की परंपरा आपस में मेल मुलाकात की है।

वहीं भाजपा के सूत्रों का कहना है की शुक्रवार को राज्यसभा के होने वाले चुनाव में कांग्रेस के कुछ विधायक भी मतदान के जरिए अपने इरादे जाहिर कर सकते हैं। क्या होने वाला है इसका खुलासा करने तैयार नहीं है।

वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा का कहना है ,संख्या बल के आधार पर कांग्रेस के एक उम्मीदवार की जीत तय है और वह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हैं, भाजपा तो महज दुष्प्रचार ही करती है और यही उसका काम है। भाजपा के भीतर क्या हाल चल रहा है उसकी वह पहले चिंता कर ले।

वहीं राजनीति विश्लेषक रवींद्र व्यास का मानना है कि आने वाले समय में राज्य की सियासत में बड़े उथल पुथल की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता। पहले राज्यसभा चुनाव और फिर 24 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उप-चुनाव के दौरान नई तस्वीर देखने को मिलेगी। दल-बदल जोरों पर चलेगा, लुभाने की हर संभव कोशिश होगी और आरोपों की झड़ी लगाने में कोई किसी से पीछे नहीं रहेगा। कुल मिलाकर आने वाले माह राज्य की राजनीति में गर्माहट भरे होंगे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।