दैनिक भास्कर हिंदी: CAA और NRC के बाद NPR की तैयारी में मोदी सरकार, अप्रैल से होगा सर्वे

December 21st, 2019

हाईलाइट

  • नागरिकों की पहचान का डेटाबेस जमा करने हुई शुरुआत
  • सीएम ममता बनर्जी कर रही हैं विरोध

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन पर देशभर में बवाल मचा हुआ है। इस बीच मोदी सरकार नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) की तैयारी कर रही है। एनपीआर का उद्देश्य देश के सामान्य निवासियों का व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इसके लिए कैबिनेट से 3 हजार करोड़ रुपए की मांग की है। 

सीएए और एनआरसी की तरह एनपीआर का भी विरोध हो रहा है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने एनपीआर पर रोक लगा दी है। दरअसल, घुसपैठ की समस्या असम से ज्यादा पश्चिम बंगाल में है। 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद वहां से बड़ी संख्या में लोग आए। एनआरसी को लेकर पहले ही लोग सहमे थे। अब सीएए ने उनका डर बढ़ा दिया है। नागिरकता संशोधन कानून लागू होने से यहां के लोगों में खौफ है कि उन्हें निकाल दिया जाएगा। इन्हीं लोगों के समर्थन में बनर्जी खड़ी हैं। 

तीन चरणों की प्रक्रिया
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1951 में पहली जनगणना हुई थी। अबतक 7 बार जनगणना हो चुकी है। अभी साल 2011 में की गई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं, जबकि 2021 की जनगणना पर कार्य चल रहा है। इसे तैयार करने में करीब तीन साल का समय लगता है। इसकी प्रक्रिया तीन चरणों में होती है। पहले चरण यानी अगले वर्ष 1 अप्रैल 2020 से लेकर 30 सितंबर के बीच केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे। दूसरा चरण 2021 में 9 फरवरी से 28 फरवरी के बीच पूरा होगा। वहीं तीसरा चरण 1 मार्च से शुरू होगा। जिसमें संशोधन प्रक्रिया होगी। 

क्या है एनपीआर?
साल 2004 में नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 14क में संशोधन किया गया था। इसके अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरआईसी) में पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। भारतीय नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर एक राष्ट्रीय डाटा है। नागरिकता का सत्यापन करने के लिए एनपीआर का प्रयोग किया जाएगा। इसलिए सभी सामान्य नागरिकों के लिए एनपीआर के अंतर्गत पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। एनपीआर की प्रकिया साल 2010 और 2015 में दो चरणों में आयोजित की गई थी। एनपीआर में जो व्यक्ति स्थानीय क्षेत्र में 6 महीने या उससे अधिक समय से निवास कर रहा है। वह एनपीआर में पंजीकृत के लिए आवेदन कर सकता है।