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भारत सबसे बड़ा दोस्त, लेकिन भारतीय मीडिया की टिप्पणियां ठीक नहीं : बांग्लादेश विदेश मंत्री

June 23rd, 2020 23:01 IST
 भारत सबसे बड़ा दोस्त, लेकिन भारतीय मीडिया की टिप्पणियां ठीक नहीं : बांग्लादेश विदेश मंत्री

हाईलाइट

  • भारत सबसे बड़ा दोस्त, लेकिन भारतीय मीडिया की टिप्पणियां ठीक नहीं : बांग्लादेश विदेश मंत्री

ढाका, 23 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए. के. अब्दुल मोमेन ने मंगलवार को कहा कि भारत उनके देश का सबसे बड़ा दोस्त है। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और चीन के बीच सीमा तनाव को कूटनीतिक रूप से हल कर लिया जाएगा।

मोमेन ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में कहा, बांग्लादेश शांति के लिए सबसे आगे रहने वालों में है। हम हमेशा पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पक्षधर रहे हैं। हम प्रत्येक समस्या पर चर्चा कर समाधान निकालने में विश्वास करते हैं। हमने भारत-बांग्ला आपसी चर्चा से बहुत कुछ हासिल किया है।

उन्होंने कहा, भारत हमारे मुक्ति युद्ध के दिनों से वास्तव में हमारा सबसे बड़ा दोस्त है..भारत-चीन, दोनों हमारे अच्छे दोस्त और करीबी पड़ोसी हैं। दोनों हमारे विकास सहयोगी हैं।

हालांकि, विदेश मंत्री ने भारत-चीन विवाद में अपने देश की किसी भी भूमिका को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि बांग्लादेश को भारत और चीन के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों को हल करने में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। नई दिल्ली और बीजिंग ने एक शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है, रक्षा अधिकारियों और विदेश मंत्रियों के स्तर पर बैठकें शुरू कर दी हैं..यह उम्मीद की किरण है। हम एक कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

मंत्री ने भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हालिया टकराव में सैनिकों की जानों के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त की।

भारतीय टिप्पणीकारों और बांग्ला दैनिक आनंदबाजार पत्रिका में प्रकाशित खबर पर, जिसके कारण सोशल मीडिया पर हंगामा हुआ, अब्दुल मोमन ने कहा: किसने चीन को 97 प्रतिशत निर्यात के शून्य-टैरिफ द्विपक्षीय समझौते को बेहद कम विकसित बांग्लादेश के लिए दान के रूप में वर्णित किया..इस पर कई लोग निराश हैं। मैंने रविवार को कहा कि यह शब्द (खैराती/ दान) मुझे स्वीकार्य नहीं है।

हालांकि, उन्होंने अखबार द्वारा इस मामले में माफी मांगने का स्वागत किया।

मोमेन ने कहा, आनंदबाजार ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी है, यह अच्छा है। उन्हें अहसास हुआ, इसके लिए मेरी तरफ से उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद। आशा करते हैं कि उन्हें भी अहसास होगा कि भारत, बांग्लादेश का बहुत अच्छा दोस्त है।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, कई लोगों ने आधिकारिक तौर पर विरोध दर्ज करने के लिए कहा था लेकिन मैंने इनकार कर दिया क्योंकि, यह वास्तविक परिदृश्य को बिलकुल भी प्रतिबिंबित नहीं करता है। इसीलिए हमें नहीं लगता कि इन समाचार रिपोर्ट पर विरोध (आधिकारिक तौर पर) दर्ज कराने की आवश्यकता है।

कोलकाता स्थित बांग्ला दैनिक आनंदबाजार पत्रिका ने मंगलवार को कहा कि चीन को किए जाने वाले 97 प्रतिशत निर्यात के लिए शून्य-टैरिफ द्विपक्षीय समझौता, बांग्लादेश के लिए (चीन का) दान है।

मंगलवार के प्रिंट संस्करण के चौथे पृष्ठ पर, अखबार ने अपनी गलती स्वीकार की और बिना शर्त माफी मांगी।

आनंदबाजार ने 20 जून को, लद्दाख के बाद ढाका को अपने पक्ष में कर रहा बीजिंग शीर्षक से एक रिपोर्ट में लिखा था, भारत के साथ टकराव के बाद 5,161 बांग्लादेशी उत्पादों को शुल्क मुक्त करने का चीन का हालिया निर्णय एक धर्मार्थ कार्य है।

भारतीय मीडिया ने दावा किया कि चीन ने केवल भारत पर दबाव बनाने के लिए बांग्लादेश को ऐसा शुल्क मुक्त निर्यात अवसर दिया है। आनंदबाजार सहित कई भारतीय मीडिया संस्थान ने इसे धर्मार्थ कार्य बताकर प्रकाशित किया।

कुछ भारतीय समाचार प्रकाशनों ने कहा कि चीन ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के साथ तनाव के बीच बांग्लादेश को अपने पक्ष में करने के लिए समझौते का इस्तेमाल किया। इस आशय की रिपोर्ट पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने यह दूसरी बार प्रतिक्रिया दी है।

अब्दुल मोमेन ने कहा कि उन्हें रविवार को कुछ मीडिया ने गलत तरीके से उद्धृत किया।

रविवार को बांग्लादेश की मीडिया रिपोटरें में बताया गया कि विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय मीडिया के कुछ वर्गों में बांग्लादेश को अपमानजनक तरीके से पेश किया जाना स्वागत योग्य नहीं है। उन्होंने संकेत दिया है कि ढाका ने बांग्लादेश के बारे में भारतीय मीडिया की नकारात्मक रिपोटरें को गंभीरता से लिया और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे (सरकार) बहुत परेशान हैं।

मंत्री ने आईएएनएस से कहा, हम बहुत खुश हैं कि भारत सरकार ने चीन के साथ समझौते के बारे में कुछ नहीं कहा। हम भारत के आभारी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन के साथ बांग्लादेश के द्विपक्षीय समझौते से भारत को भी आर्थिक लाभ होगा। अगर बांग्लादेश विकसित होता है, तो भारत को इसका लाभ मिलेगा।

हालांकि, विदेश मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि बांग्लादेश-चीन व्यापार संतुलन असंतुलित है और यही बात भारत-बांग्लादेश व्यापार पर भी लागू होती है। उन्होंने कहा, हम भारत को केवल एक अरब डॉलर के उत्पादों का निर्यात करते हैं, लेकिन कई अरब डॉलर के भारतीय उत्पाद का भारी आयात करते हैं। बांग्लादेश इसी तरह चीन से भी भारी आयात करता है, निर्यात कम करता है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। हम सभी पड़ोसियों से हमारे विकास में भागीदार बनने का आग्रह कर रहे हैं। हम चीन के आभारी हैं कि वह इस संकट की घड़ी में हमारे लिए आगे आया है। उम्मीद है कि भारत भी आगे आएगा।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।