comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

फर्जी वोटर मामला : ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उठाए EC की जांच पर सवाल

June 12th, 2018 11:16 IST

हाईलाइट

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उठाए जांच पर सवाल।
  • जांच पर सिंधिया ने जाताया आश्चर्य। कहा दोबारा हो जांच।
  • सिंधिया के अनुसार यह प्रदेश प्रशासन की मानसिकता को दर्शाता है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में 60 लाख कथित फर्जी वोटर कार्ड जारी करने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को चुनाव आयोग द्वारा की गयी मामले की जांच पड़ताल पर सवाल उठाते हुए, आयोग से दोबारा जांच कराने का आग्रह किया है।

सिंधिया ने जताया आश्चर्य
कांग्रेस के गुना क्षेत्र से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनाव आयोग पर की जांच पर सवाल उठा दिए और आयोग से दोबारा निष्पक्ष जांच कराए जाने का अनुरोध किया है। सिंधिया ने कहा कि उन्हें हैरत है कि कैसे चुनाव आयोग की टीम ने भोपाल पहुंचकर इतने गंभीर मामले की जांच को दो दिनों में खत्म कर दिया। इससे पहले भी सिंधिया ने प्रेस कांफ्रेंस में कमलनाथ के साथ मिलकर भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था की यह प्रदेश प्रशासन कि मानसिकता को दर्शाता है।

चुनाव आयोग ने जांच के बाद कांग्रेस के भाजपा पर लगाए सभी आरोपों को नकार दिया है। कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा था कि जांच में हमें कुछ भी असामान्य नहीं मिला है।

क्या थे आरोप
बीते फरवरी माह में कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह ने दिल्ली स्थित पार्टी दफ्तर में एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। कांफ्रेंस में कांग्रेस के इन नेताओं ने भारतीय जानता पार्टी के प्रशासनिक अधिकारियों पर 60 लाख फर्जी वोटर कार्ड जारी कर आने वाले चुनाव को प्रभावित करने आरोप लगाए थे।

अपने आरोप में कांग्रेस ने कहा था कि मध्यप्रदेश में अधिकारियों ने भाजपा के पक्ष में मतदान करने की दृष्टि से 60 लाख फर्जी वोटर बना दिए हैं। पार्टी ने इस आरोप पर चुनाव आयोग से मतदाताओं की सूची की जांच कराने का अनुरोध किया। साथ ही कांग्रेस ने आयोग से उक्त अधिकारियों के खिलाफ भी जांच की मांग की जो इस सूची फर्जीवाड़े में लिप्त हैं।

कमलनाथ के अनुसार बीते सालों में मध्यप्रदेश की जनसंख्या में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन वोटर लिस्ट के हिसाब से देखें तो 40 फीसदी जनसंख्या बढ़ गई है। इस हिसाब से प्रदेश में करीब 60 लाख फर्जी वोटर हैं।

कमेंट करें
gGrLH
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।