दैनिक भास्कर हिंदी: रजिस्ट्रार जनरल और NRC प्रेसिडेंट को सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ा, कहा- आपको जेल भेज देना चाहिए

August 7th, 2018

हाईलाइट

  • नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन के अध्यक्ष और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा।
  • दोनों अफसरों ने असम NRC के सम्बंध में मीडिया को दिए थे बयान।
  • कोर्ट ने कहा- आपका काम मीडिया को बयान देना नहीं है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन के अध्यक्ष प्रतीक हजेला और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया एस शैलेष को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। कोर्ट ने यह फटकार असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन के फाइनल ड्राफ्ट को लेकर मीडिया में आए इनके बयानों को लेकर लगाई है। कोर्ट ने हजेला और शैलेष द्वारा मीडिया में दिए बयानों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा है कि आपका काम रजिस्टर तैयार करना है न कि मीडिया में बेवजह बयानबाजी करना। आपके बयान कोर्ट की अवमानना है। इसके लिए आप दोनों को जेल भेज दिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि दोनों अफसरों के द्वारा पिछले दिनों मीडिया में बयान दिया गया था कि जिनके नाम NRC में छूटे हैं, उन्हें अभी मौका दिया जाएगा। NRC अध्यक्ष हजेला ने मीडिया में यह भी बयान दिया था कि रजिस्टर में नाम दर्ज करवाने के लिए फ्रेश डॉक्यूमेंट देने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों के इन बयानों पर स्वतः संज्ञान लिया और कहा, 'आप कौन होते हैं यह कहने वाले कि फ्रेश डॉक्यूमेंट दें। आप ने ये कैसे कहा कि लोगों को मौके देंगे। आपका काम केवल त्रुटि रहित NRC तैयार करना है न कि प्रेस में जाना। आप लोगों ने कोर्ट की अवमानना की है। इसके लिए क्यों न आपको जेल भेज दिया जाए?'

कोर्ट ने इसके साथ ही NRC अध्यक्ष और रजिस्टार जनरल को कहा कि भविष्य में सतर्क रहें और न्यायालय के आदेश के अनुसार काम करें। सुनवाई के दौरान NRC अध्यक्ष हजेला ने कोर्ट से माफी भी मांगी है। गौरतलब है कि असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) का फाइनल ड्राफ्ट 30 जुलाई को जारी किया गया था। इसमें 3, 29,91,380 लोगों में से 2,89,38, 677 को असम की नागरिकता के लिए योग्य पाया गया था। इस ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए थे। इन 40 लाख लोगों को अवैध भारतीय माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट में शामिल नहीं किए गए हैं, उन्हें अपने दावे और आपत्तियों के लिए समय दिया गया है। इस मामले पर जमकर सियासी बहस छिड़ी हुई है। संसद के मानसून सत्र में भी इसे लेकर जमकर हंगामा मचा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल सरकार को कोई एक्शन न लेने के लिए कहा है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से कहा था कि जिन लोगों के नाम इस ड्राफ्ट में शामिल नहीं है, उन्हें अपने दावे और आपत्तियां जताने के लिए पूरा समय दिया जाना चाहिए। जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच इस मामले को सुन रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होनी है।