Places Of Worship Act, 1991: प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट अब हुआ पहले से भी सख्त, उल्लंघन पर लगेगा भारी जुर्माना और हो सकती है कई साल की जेल, जानिए हर कानूनी धारा के क्या हैं मायने

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट अब हुआ पहले से भी सख्त, उल्लंघन पर लगेगा भारी जुर्माना और हो सकती है कई साल की जेल, जानिए हर कानूनी धारा के क्या हैं मायने
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (18 फरवरी) को प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 पर सुनवाई की गई है। ऐसे में चलिए इस कानून से संबंधित अहम बातों के बारे में जानते हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (18 फरवरी) को प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को लेकर सुनवाई हुई है। ये कानून अभी देश में सबसे ज्यादा चर्चित मुद्दों में से एक बना रहा है। बतदा दें, 1991 में लागू किए गए कानून के मुताबिक, 15 अगस्त 1947 से पहले बने किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी भी दूसरे पूजा स्थल में बदला नहीं जाएगा। अगर कोई भी इस कानून का उल्लंघन करता है तो उसको जुर्माना और तीन साल तक जेल की सजा भी मिल सकती है। ऐसे में चलिए इस कानून से संबंधित अन्य जानकारियों के बारे में जानते हैं।

क्या है प्लेसज ऑफ वर्शिप एक्ट?

साल 1991 में लागू हुए इस कानून के मुताबिक, आजादी से पहले यानि 15 अगस्त 1947 से पहले बने हुए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी भी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में बदला नहीं जा सकता है। अगर कोई भी इस कानून का उल्लंघन करता है तो उसको जुर्माना देना होगा। साथ ही तीन साल की जेल भी हो सकती है। साथ ही अगर ये कानून तत्कालीन कांग्रेस प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव सरकार की तरफ से तब लिया गया था जब बाबरी मस्जिद और अयोध्या का मुद्दा देश में बहुत ही ज्यादा गर्माया हुआ था।

धारा 2 का क्या है कहना?

धारा 2 का कहना है कि 15 अगस्त 1947 में मौजूद किसी भी धार्मिक स्थल में बदलाव करने के लिए अगर कोई याचिका कोर्ट में पेंडिंग होती है तो उसको बंद कर दिया जाए।

धारा 3 का मतलब क्या है?

धारा 3 के मुताबिक, किसी भी धार्मिक स्थल को पूरी तरह से या आंशिक तौर से किसी दूसरे धर्म में बदलने की अनुमति नहीं है। साथ ही ये भी निश्चित करना होगा कि एक धर्म के पूजा स्थल को किसी भी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में या उसी धर्म के अलग खंड में बदला ना जाए।

धारा 4 का क्या है मतलब?

धारा 4(1) का कहना है कि 15 अगस्त 1947 को एक पूजा स्थल का चरित्र जैसा था उसको वैसा ही रहने दें।

धारा 4(2) के मुताबिक, उन मुकदमों और कानूनी कार्यवाहियों को रोकने की बात करता है जो इस कानून के लागू होने की तारीख पर पेंडिंग थे।

धारा 5 में क्या है प्रावधान?

धारा 5 में ये प्रावधान है कि ये एक्ट रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले और उससे संबंधित किसी भी मुकदमे, अपील या कार्यवाही पर लागू नहीं होगा।


क्या है इस कानून का उद्देश्य?

ये कानून उस वक्त बनाया गया था जब राम मंदिर आंदोलन बहुत ही ज्यादा गर्माया हुआ था और इसके असर से ही देश के अन्य मंदिरों और मस्जिदों में विवाद बढ़ा हुआ था। इसको थामने के लिए तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने इस कानून को लाया था।

Created On :   18 Feb 2026 4:40 PM IST

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