'फेक फैसले' पर चिंता: AI से बनें फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! कैसे कर सकते हैं आर्टिफिशियल फोटो, वीडियो और टेक्स्ट की पहचान, इन आसान तरीकों से मिटेगा असली नकली का भेद

AI से बनें फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! कैसे कर सकते हैं आर्टिफिशियल फोटो, वीडियो और टेक्स्ट की पहचान, इन आसान तरीकों से मिटेगा असली नकली का भेद
दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का यूज तेजी से बढ़ रहा है। रोजमर्रा की चीजों से लेकर काम काज में एआई तकनीकि की मदद से घंटों का मिनटों में पूरा हो रहा है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का यूज तेजी से बढ़ रहा है। रोजमर्रा की चीजों से लेकर काम काज में एआई तकनीक की मदद से घंटों का मिनटों में पूरा हो रहा है। अगर इसके फायदे है तो नुकसान भी कई ज्यादा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आज के समय में एआई की मदद से किसी भी फोटो वीडियो या कंटेंट को अपनी मर्जी का प्रॉम्पट देकर तैयार किया जा रहा है। जिससे एआई के दुरुपयोग का खतरा बढ़ गया है। भविष्य में एआई आधारित कंटेंट से जुड़े तथ्यों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है। आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे की सुप्रीम कोर्ट ने एआई के दुरुपयोग से जुड़े किन चीजों पर चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर आप एआई बेस्ड कंटेट, फोटोज या वीडियो की पहचान कैसे कर सकते हैं।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का कहना?

एआई के न्यायिक प्रक्रिया में प्रयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने नेशनल लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेशों को पूरी तरह रद्द कर दिया है। यह आदेश AI की उपलब्ध करवाए गए काल्पनिक फैसलों को आधार बना कर दिए गए थे।

जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने AI की काल्पनिक जानकारी को न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। जजों ने इसकी तुलना भोपाल गैस कांड से की। उन्होंने इसे 'मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव’ जैसा बताया। बेंच ने कहा कि अगर इसे नियंत्रित न किया गया तो यह एक अदृश्य विनाश को निमंत्रण देने जैसा हो सकता है।

किस मामले पर हुई सुनवाई

दरअसल, यह मामला जम्मू कश्मीर बैंक और पैन इंडिया यूटिलिटीज नाम की कंपनी से जुड़ा है। जम्मू कश्मीर बैंक ने पैन इंडिया यूटिलिटीज कंपनी ने कॉरपोरेट गारंटी दी थी। लोन के 87.43 करोड़ रुपये बकाया होने को आधार बनाकर बैंक ने एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आवेदन दिया। NCLT ने इसे स्वीकार करते हुए अगस्त 2024 में दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी। इस आदेश को सितंबर 2025 में NCLAT ने भी बरकरार रखा।

आदेशों में किन कमियों का जिक्र

एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़ी पूजा रमेश सिंह की तरफ से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं। उन्होंने बताया कि दोनों ट्रिब्यूनल ने अपने फैसलों में अपने फैसले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और ICICI बैंक से जुड़े 6 ऐसे अदालती फैसलों का हवाला दिया जो सच में कभी हुए ही नहीं थे। वह पूरी तरह किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल की तरफ से गढ़े गए काल्पनिक केस थे।

सुनवाई के दौरान जम्मू एंड कश्मीर बैंक ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके वकीलों ने इन फैसलों का जिक्र कभी नहीं किया था। ट्रिब्यूनल ने खुद अपनी तरफ से इन फैसलों को आदेश में दर्ज किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ट्रिब्यूनल के फैसलों पर चिंता जताते हुए उन्हें रद्द कर दिया है। इस मामले के नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस NCLT को भेज दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि वह न्यायिक आदेशों में मनगढ़ंत फैसलों को आधार बनाए जाने को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगा।

न्यायिक कामकाज में एआई की सहायता लेने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इंसानी निगरानी अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से भी कहा है कि वह कानूनी पेशे पर एआई के असर और उससे जुड़ी चुनौतियों पर अध्ययन के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करें।

एआई कंटेंट की पहचान करने के लिए ऑनलाइन एआई डिटेक्टर टूल्स का उपयोग करें। लिखे हुए टेक्स्ट में एक जैसी वाक्य-संरचना और भारी-भरकम शब्दों की जाँच करें। तस्वीरों में अजीब उंगलियों या विकृत चेहरों को देखें, और वीडियो में आवाज व चेहरे के भावों के बेमेल होने पर ध्यान दें।

टेक्स्ट की पहचान कैसे करें

1. इमोशंस की कमी

एआई द्वारा लिखे गए लेख बहुत सीधे और नीरस होते हैं। इनमें इंसानों जैसी क्रिएटिविटी और पर्सनल एक्सपीरियंस नहीं होते।

2. रिपीटेशन

एआई टूल एक ही बात को बार-बार और अलग-अलग शब्दों में लिखते हैं।

3. डिटेक्टर का इस्तेमाल

यह कंफर्म करने के लिए कि कोई कंटेंट इंसान ने लिखा है या नहीं। इसके लिए आप प्ले स्टोर या एप स्टोर में जाकर मुफ़्त में एआई डिटेक्टर से जुड़े एआई डिटेक्टर टूल्स को डाउनलोड कर सकते हैं। इनके जरिए का उपयोग कर सकते हैं। ये टूल्स स्कैन करके बता देते हैं कि कंटेंट के एआई होने की संभावना कितनी है।

4. परफेक्ट ग्रामर

एआई की अंग्रेजी या हिंदी एकदम सटीक होती है। इसमें कोई छोटी-मोटी टाइपिंग गलती नहीं होती।

फोटोज की पहचान कैसे करें

1. अजीब डिटेलिंग

एआई द्वारा बनाई गई तस्वीरों में उंगलियां, पैर या दांत अजीब या टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं।

2. चेहरे और बाल

तस्वीरों में लोगों के बाल या दाढ़ी के किनारे बहुत धुंधले या फेक दिख सकते हैं।

3. टेक्स्ट का उल्टा होना

एआई अक्सर शब्दों या अक्षरों को उल्टा या गलत लिखता है।

वीडियो की पहचान कैसे करें

एआई जनरेटिड वीडियोज के लिए इन 5 बातों का ध्यान रखें

1. पलकें झपकना

एआई वीडियो में लोग ठीक से पलकें नहीं झपकाते।

2. आवाज और होंठ

आवाज का टोन रोबोटिक लगता है। आवाज और होंठ हिलने के समय में अंतर हो सकता है।

3. स्किन और रोशनी

चेहरे की त्वचा का रंग यानी स्किन टोन बदलता रहता है। इसके अलावा रोशनी में अजीब चमक होती है।

Created On :   3 July 2026 7:23 PM IST

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