अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी के दर्शन से पहले जानिए ये जरूरी डिटेल, कैसे कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन, रास्ते में खराब मौसम मिले तो क्या करें, ये तैयारियां हैं जरूरी

अगर आपके मन में अमरनाथ यात्रा से जुड़े सवाल हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए है।

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। बाबा बर्फानी के भक्तों का इंतजार खत्म हो गया है। अमरनाथ यात्रा 2026 की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस साल यह यात्रा 57 दिनों तक चलेगी। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा करते हैं। अगर आप भी इस साल यात्रा करने वाले हैं तो कई जरूरी बातों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। जैसे आपके बैग में क्या-क्या चीजें होनी चाहिए? रास्ते में मौसम खराब हुआ तो क्या करें? लेकिन सिर्फ नियमों के बारे में जानना ही काफी नहीं है। कई ऐसी चीजें भी हैं जिसको जानने के बाद यात्रा का मजा दुगना हो जाएगा। इसके लिए आपको अमरनाथ यात्रा की कथा और शिवलिंग के बदलते आकार के बारे में भी जानना चाहिए।

अमरनाथ यात्रा की कथा

मान्यता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर होने का रहस्य बताने के लिए एक ऐसी जगह चुनी जहां कोई और न हो। रास्ते में उन्होंने अपने साथ मौजूद सभी चीजों और साथियों को अलग-अलग जगह छोड़ दिया। नंदी को पहलगाम, चंद्रमा को चंदनवाड़ी, सर्पों को शेषनाग, गणेश जी को महागुणा और गंगा जी को पंचतरणी में छोड़ा। इसके बाद दोनों अमरनाथ गुफा पहुंचे।

गुफा में भगवान शिव अमर कथा सुनाने लगे लेकिन कथा सुनते-सुनते माता पार्वती को नींद आ गई। उसी समय गुफा में मौजूद दो कबूतर पूरी कथा सुन रहे थे। कथा खत्म होने पर भगवान शिव को यह बात पता चली। कबूतरों ने उनसे क्षमा मांगी, तब भगवान शिव ने उन्हें अमर होने का वरदान दे दिया। इसी वजह से इस गुफा का नाम अमरनाथ पड़ा। मान्यता है कि आज भी कई श्रद्धालुओं को वहां उन दो कबूतरों के दर्शन होते हैं। गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग भी भगवान शिव का चमत्कारी स्वरूप माना जाता है।

अमरनाथ गुफा में बर्फ का शिवलिंग कैसे बनता है?

अमरनाथ गुफा में बनने वाला बर्फ का शिवलिंग प्रकृति का एक अनोखा नजारा है। गर्मियों में गुफा के ऊपर जमी बर्फ धीरे-धीरे पिघलती है। यह पानी चट्टानों की दरारों से होकर गुफा की छत तक पहुंचता है और फिर बूंद-बूंद नीचे गिरता है। गुफा के अंदर बहुत ज्यादा ठंड रहती है। ऐसे में पानी की हर बूंद नीचे गिरते ही जमने लगती है। यही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और धीरे-धीरे बर्फ का शिवलिंग तैयार हो जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस शिवलिंग का आकार चंद्रमा की कलाओं के साथ बदलता रहता है। श्रावण पूर्णिमा के समय यह अपने सबसे बड़े रूप में दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे बाबा बर्फानी के रूप में श्रद्धा से पूजते हैं।

शिवलिंग का आकार क्यों बदलता है?

मौसम का असर– बर्फ का शिवलिंग पूरी तरह मौसम पर निर्भर करता है। अगर ठंड ज्यादा हो और बर्फ लगातार जमती रहे, तो शिवलिंग बड़ा बनता है। वहीं, तापमान बढ़ने पर बर्फ जल्दी पिघलने लगती है, जिससे इसका आकार छोटा हो जाता है।

ग्लेशियर का पानी– गुफा के ऊपर जमी बर्फ पिघलकर बूंद-बूंद नीचे गिरती है। यही पानी जमकर धीरे-धीरे शिवलिंग का आकार बनाता है। पानी जितना लगातार गिरता और जमता है, शिवलिंग उतना ही अच्छा बनता है।

श्रद्धालुओं की संख्या– यात्रा के दौरान हर दिन बड़ी संख्या में लोग गुफा में पहुंचते हैं। इससे गुफा के अंदर थोड़ा तापमान बढ़ जाता है, जिसका असर बर्फ के शिवलिंग पर भी पड़ता है।

बर्फ का पिघलना– जब अंदर का तापमान बढ़ता है, तो बर्फ धीरे-धीरे पिघलने लगती है। इसी वजह से यात्रा के आखिर तक शिवलिंग का आकार पहले के मुकाबले छोटा दिखाई दे सकता है।

कैसे करें रेजिस्टर?

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

सबसे पहले श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां ‘यात्रा परमिट रजिस्ट्रेशन’ का विकल्प चुनकर अपनी जरूरी जानकारी भरें। इसके बाद यात्रा की तारीख और रूट (पहलगाम या बालटाल) चुनें। फिर पासपोर्ट साइज फोटो, आधार या कोई अन्य वैध पहचान पत्र और डॉक्टर से प्रमाणित मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करें। मोबाइल पर आए OTP से नंबर वेरिफाई करें, रजिस्ट्रेशन फीस जमा करें और अपना यात्रा परमिट डाउनलोड करके उसका प्रिंट निकाल लें।

ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन

अगर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं करना चाहते, तो पीएनबी, एसबीआई, यस बैंक या जम्मू-कश्मीर बैंक की तय शाखाओं में जाकर भी आवेदन कर सकते हैं। वहां पहचान पत्र, हाल की फोटो और मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना होगा। जरूरी जांच और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपको यात्रा परमिट दे दिया जाएगा। बिना वैध परमिट के यात्रा की अनुमति नहीं मिलती, इसलिए इसे पहले से बनवा लेना जरूरी है।

यात्रा के नियम

यात्रा के लिए उम्र 13 से 70 साल के बीच होनी चाहिए।

6 हफ्ते से ज्यादा की गर्भवती महिलाएं इस यात्रा में शामिल नहीं हो सकतीं।

यात्रा से पहले डॉक्टर से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाना जरूरी है।

बिना रजिस्ट्रेशन और यात्रा परमिट के यात्रा की अनुमति नहीं मिलती।

जम्मू या कश्मीर से मिलने वाला RFID कार्ड पूरी यात्रा के दौरान हमेशा पहनकर रखें।

यात्रा सिर्फ पहलगाम या बालटाल के तय रास्ते से ही करें। किसी दूसरे रास्ते या शॉर्टकट का इस्तेमाल न करें।

रास्ते में साफ-सफाई का ध्यान रखें। कूड़ा न फैलाएं और प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से बचें।

अमरनाथ गुफा तक कैसे पहुंचें?

पहलगाम रास्ता– यह पारंपरिक मार्ग माना जाता है। इसकी दूरी करीब 46 किलोमीटर है और यात्रा पूरी करने में आमतौर पर 3 से 4 दिन लगते हैं।

बालटाल रास्ता– यह रास्ता करीब 14 किलोमीटर का है। चढ़ाई थोड़ी ज्यादा है, लेकिन दूरी कम होने की वजह से कई लोग 1 से 2 दिन में यात्रा पूरी कर लेते हैं।

हेलीकॉप्टर सेवा– पहलगाम और बालटाल, दोनों तरफ से हेलीकॉप्टर की सुविधा मिलती है। हेलीकॉप्टर आपको पंचतरणी तक छोड़ता है। वहां से अमरनाथ गुफा करीब 6 किलोमीटर दूर है, जिसे पैदल या पालकी से पूरा किया जा सकता है।

पालकी और पिट्ठू– बुजुर्ग, बीमार या छोटे बच्चों के लिए पालकी की सुविधा मिलती है। वहीं, अगर सिर्फ सामान उठाने में परेशानी हो, तो पिट्ठू भी आसानी से मिल जाते हैं।

यात्रा करते समय ये चीजें बैग में रखें

गर्म कपड़े रखें– पहाड़ों में मौसम कभी भी बदल सकता है, इसलिए जैकेट, स्वेटर और ऊनी कपड़े जरूर साथ रखें।

रेनकोट या पोंचो लें– बारिश कभी भी शुरू हो सकती है, ऐसे में यह आपको भीगने से बचाएगा।

मजबूत जूते पहनें– अच्छे ग्रिप वाले ट्रैकिंग जूते फिसलन वाले रास्तों पर चलने में मदद करते हैं।

टोपी, दस्ताने और मोजे रखें– ठंडी हवा और कम तापमान से बचने के लिए ये जरूरी हैं।

पानी, हल्का नाश्ता और दवाइयां साथ रखें– रास्ते में ऊर्जा बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर दवा लेने में आसानी होगी।

टॉर्च, पावर बैंक और पहचान पत्र न भूलें– ये चीजें यात्रा के दौरान कई बार काम आती हैं।

रास्ते में मौसम खराब हो जाए तो क्या करें?

शांत रहें– घबराने की बजाय प्रशासन और सुरक्षा बलों के बताए नियमों का पालन करें।

सुरक्षित जगह पर रुक जाएं– तेज बारिश या बर्फबारी में आगे बढ़ने की जल्दबाजी न करें। मौसम खराब हो तो शिविर में ही इंतजार करें।

संभलकर चलें– फिसलन वाले रास्तों पर धीरे-धीरे चलें ताकि गिरने का खतरा कम रहे।

अकेले न जाएं– हमेशा अपने ग्रुप के साथ रहें, इससे जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल जाती है।

मौसम की जानकारी लेते रहें– यात्रा से जुड़े नए अपडेट और मौसम की चेतावनी पर नजर रखें।

तबीयत खराब लगे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें– रास्ते में बने मेडिकल कैंप में जाकर बिना देर किए जांच कराएं।

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Created On :   3 July 2026 5:21 PM IST

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