मोदी 3.0 मंत्रिमंडल विस्तार!: पिता कांग्रेस सरकार में दो बार रह चुके हैं केंद्रीय मंत्री, क्या पुत्री को मिल सकता है मौका?

पिता कांग्रेस सरकार में दो बार रह चुके हैं केंद्रीय मंत्री, क्या पुत्री को मिल सकता है मौका?
ST समीकरण से लेकर UP कनेक्शन तक, शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह बीजेपी के कास्ट फॉर्मूले में कितनी फिट बैठती हैं?

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मोदी 3.0 सरकार के मंत्रिमंडल बदलाव और विस्तार में मध्यप्रदेश से शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह सबसे प्रबल दावेदार मानी जा रही है। मौजूदा समय में वो मध्यप्रदेश की सबसे युवा, महिला और अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाली सबसे कम उम्र की महिला सांसद है। इसके साथ ही विध्य क्षेत्र में बीजेपी की युवा सांसद हिमाद्री सिंह को आदिवासियों में शाही वंशज मानी जाती है। वो कांग्रेस के दो बार के पूर्व केंद्रीय मंत्री दलबीर सिंह और पूर्व सांसद राजेश नंदिनी सिंह की सुपुत्री हैं। अब देखना है क्या पिता के बाद पुत्री को भी केंद्र सरकार में मौका मिलेगा?

उत्तरप्रदेश में 2027 के शुरुआती महीनों में विधानसभा चुनाव है, सांसद हिमाद्री ने यूपी के मेरठ विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है, यहां से उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक किया है, इसका लाभ बीजेपी को यूपी चुनाव में मिल सकता है। उनकी प्रोफाइल के अनुसार वो कृषि भी करती है। हिमाद्री सिंह का राजनीतिक बैकग्राउंड कांग्रेस का रहा है, 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले वो बीजेपी में शामिल हुई थी, उनके पति का भाजपा से पुराना नाता है। केंद्र में उन्हें मौका मिलने से बीजेपी विरोधी दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं में ये संदेश दे सकती है, भाजपा में किसी की अनदेखी नहीं की जाएगी।

38 वर्षीय सांसद हिमाद्री सिंह 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में शहडोल से लगातार दो बार चुनाव जीत चुकी है। उनके पिता दलबीर सिंह 1980,1984 और 1991 में तीन बार लोकसभा सांसद, और दो बार केंद्रीय मंत्री रह चुके है, उनकी माता राजेश नंदिनी सिंह 1993 में विधानसभा और 2009 में लोकसभा का चुनाव जीत चुकी है। राजनीतिक परिवार और क्षेत्र में मजबूत पकड़ होने के चलते ये अधिक संभावनाएं लगाई जा रही है कि उन्हें मोदी कैबिनेट विस्तार में जगह मिल सकती है। शहडोल संभाग कोयला एवं गैस की उपलब्धता के लिए प्रसिद्द हैं। व्यवसायिक और पर्यटन की दृष्टि से भी शहडोल संभाग अधिक महत्व रखता है।

शहडोल संभाग में कुल 8 विधानसभा सीट आती है, जिनमें से सात विधानसभा सीट एसटी आरक्षित हैं। एक सीट अनारक्षित है। 2018 में जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तब कांग्रेस को इस संभाग में बढ़त मिली थी। बीजेपी युवा नेता को केंद्र में मौका देकर आदिवासी वोट बैंक में मजबूत पकड़ बना सकती है। शहडोल संभाग का अपने आप में एक सामाजिक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। राजनीति में भी शहडोल का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा है। पीएम मोदी से लेकर राहुल गांधी तक यहां का दौरा कर चुके है।

पीएम मोदी पकरिया पंचायत के गांव बरटोला में आदिवासी समाज के साथ परिचर्चा भी कर चुके हैं। यहीं नहीं एक बार पीएम ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से शहडोल के एक आदिवासी गांव विचारपुर की तारीफ मिनी ब्राजील कहकर तारीफ की। पीएम मोदी ने कई जिलों से होकर शहडोल पहुंची रानी दुर्गावती गौरव यात्रा का समापन भी किया था। जिसका लाभ बीजेपी को 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले शहडोल का दौरा किया था। तब उन्होंने यहीं से चुनावी प्रचार की शुरुआत की थी।

मध्यप्रदेश की आबादी में करीब 21 फीसदी एसटी समुदाय है। मध्यप्रदेश में इस वर्ग को जिस दल ने साध लिया वह सीधे सत्ता तक पहुंचा है। 230 विधानसभा सीटों में 47 सीट एसटी और 35 सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। शहडोल संभाग एसटी बहुल क्षेत्र है, इसलिए बीजेपी हर बार यहां अपनी पैठ मजबूत बनाना चाहती है।

Created On :   3 July 2026 4:57 PM IST

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