PM Modi News: ET ग्लोबल लीडर्स फोरम में PM मोदी का बड़ा बयान, कहा- भारत कर रहा नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (21 अगस्त) ET ग्लोबल लीडर्स फोरम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश की राजनीति में स्थिरता और नीतियों में निरंतरता आई है। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के विकास पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि संसाधनों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को विकास के लिहाज से एक उज्ज्वल संभावना के तौर पर देखा जा रहा है।
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भारत के विकास पर दी प्रतिक्रिया
पीएम मोदी ने कहा, "भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं। मैंने 15 अगस्त को 7 सेक्टर्स पर बात की। भारत पॉलिसी लेवल पर रिफॉर्म कर रहा है, ताकि हमारा फ्यूचर सुरक्षित हो। गवर्नेंस में रिफॉर्म कर रहा है। रिफॉर्म हमारे लिए कंपल्शन नहीं है, ये हमारा कमिटमेंट है, ये हमारा कन्विक्शन है।"
उन्होंने आगे कहा, "अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त धाराओं की सप्त शक्तियों की बात की है। मैन्युफैक्चरिंग पावर, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी समेत मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का बहुत ज्यादा फोकस है। इसलिए भारत आज पॉलिसी लेवल पर नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स कर रहा है, ताकि हमारा फ्यूचर सुरक्षित हो। गवर्नेंस, ईज ऑफ लिविंग पर रिफॉर्म कर रहा है।"
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रिफॉर्म पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा, "रिफॉर्म हमारे लिए कम्पल्शन नहीं है, ये हमारा कमिटमेंट है, ये हमारा कन्विक्शन है। 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद कैसे रिफॉर्म ने हमारी दशा और दिशा बदली है। PLP के बारे में किसी को शायद ही पता होगा और आप सुनकर हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक पनिशमेंट, PLI यानी प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव, ये दोनों टर्म भारत के अलग-अलग कालखंड को डिफाइन करते हैं।"
उन्होंने यह भी कहा, "मैं आपको एक्सप्लेन करता हूं। हमारे देश में एक समय ऐसा भी था कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रोडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये उनका प्रोडक्शन लिंक पनिशमेंट मॉडल था। उसे नोटिस भेज दिया जाता था, इसलिए वो कंपनी अपना प्रोडक्ट खुद ही नष्ट कर देती थी। आज जो मेक इन इंडिया का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी। ऐसा करने के पीछे एक विकृत मानसिकता काम करती थी कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। वे चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े और हाथ फैलाए। ऐसा करके उन लोगों ने नौकरी का गला घोंट दिया था। इन लोगों के दरबारियों ने कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई। पहले जहां प्रोडक्शन बढ़ने पर पनिशमेंट मिलता था, आज हमारी सरकार इंसेंटिव दे रही है।"
Created On :   21 Aug 2026 11:00 PM IST











