विपक्ष का धरना: एक मुद्दे पर राहुल गांधी के दो धरने, धरने की दो अलग अलग जगह, महीना बदला तारीख वहीं

एक मुद्दे पर राहुल गांधी के दो धरने, धरने की दो अलग अलग जगह, महीना बदला तारीख वहीं
राहुल गांधी ने 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरने पर बैठे थे। ठीक एक महीने बाद पैलेट गन से घायल 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचव के साथ 21 अगस्त को संसद मार्ग पुलिस थाना और डीसीपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 21 जुलाई को नीट पेपर लीक मामले में पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे, उसके ठीक एक महीने बाद 21 अगस्त को फिर धरने पर बैठे। दोनों घटनाओं के बीच एक महीना बीत गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि राहुल गांधी इस मुद्दे पर बार-बार सड़क पर क्यों उतर रहे हैं?

आपको बता दें राहुल गांधी ने 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरने पर बैठे थे। ठीक एक महीने बाद पैलेट गन से घायल 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचव के साथ 21 अगस्त को संसद मार्ग पुलिस थाना और डीसीपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे। विपक्ष के नेता ने छात्र के साथ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप सबसे अधिक संवेदनशील मुद्दा है। जिसे कांग्रेस किसी भी हालात में छोड़ना नहीं चाहती, शुरु में दिल्ली पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही थी, लेकिन राहुल गांधी ने जुलाई में छात्र साहिल लोचव को मीडिया के सामने पेश किया और दावा किया कि वह प्रदर्शन के दौरान पैलेट से घायल हुआ था। अब इस छात्र को लेकर एफआईआर कराने के लिए डीसीपी ऑफिस पर धरने पर बैठे।

दोनों बार तारीख 21 होना एक संयोग जरूर है, लेकिन इसके पीछे की राजनीति काफी बदल गई। 21 जुलाई को राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचे, उस समय लड़ाई छात्र आंदोलन, पेपर लीक, शिक्षा मंत्री की जवाबदेही और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ थी। लेकिन अब 21 अगस्त को एक महीने बाद जब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो चुका है, अब मामला पुलिस कार्रवाई और घायल छात्र की शिकायत पर आ गया है। पुलिस ने इस मामले में विपक्ष की मांग पर एफआईआर दर्ज कर ली है।

राहुल गांधी का धरने पर बैठना सिर्फ पैलेट गन के आरोप या एक घायल छात्र तक सीमित नहीं है। इसके पीछे परीक्षा धांधलियों को लेकर युवाओं का गुस्सा, पुलिस कार्रवाई, मानसून सत्र के दौरान संसद में विरोध की पूरी स्टोरी है। कांग्रेस छात्रों के इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है।

सीजेपी का आंदोलन एक युवा आंदोलन के रूप में सामने आया। परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक पर युवाओं की नाराजगी सामने आई। सोनम वांगचुक के अनशन में शामिल होने से आंदोलन युवाओं के भविष्य, जवाबदेही और सरकारी व्यवस्था तक जा पहुंचा। इसका असर देशभर में देखने को मिला।

छात्रों के आंदोलन ने 20 जुलाई को तब नया रूप ले लिया, जब भारी संख्या में युवा छात्र संसद की ओर निकलने वाले मार्च में पहुंचे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव देखने को मिला। इससे छात्र आंदोलन एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में तब्दील हो गया। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर आंसू गैस, लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। घायल लोगों की तस्वीरों ने विवाद को और बढ़ा दिया।

कांग्रेस ने 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद इस मुद्दे को खुलकर उठाया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने घायल छात्रों से मुलाकात की और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला बोला। अगले ही दिन 21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत तमाम कांग्रेस नेता बिना अनुमति के प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया हालांकि बाद में रिहा कर दिया था। सड़क से उठा मुद्दा बाद में संसद की चौखट और सदन तक पहुंचा। पूरे मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर से लेकर संसद परिसर तक हंगामा , नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कांग्रेस ने सीजेपी के आंदोलन से उठे मुद्दे को बीजेपी अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार बना लिया।

राहुल गांधी के धरने को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए किया गया 'कैमरा केंद्रित ड्रामा' बताया। उन्होंने विपक्ष के नेता के प्रदर्शन का उद्देश्य न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि मीडिया का ध्यान आकर्षित करना बताया।

Created On :   21 Aug 2026 7:11 PM IST

Tags

Next Story