Ujjain Masjid Demolition: उज्जैन के शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने पर क्यों हो रहा विवाद? कोर्ट ने क्यों रद्द की मुस्लिम पक्ष की दलीलें, और क्या क्या हटाने की तैयारी?

उज्जैन के शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने पर क्यों हो रहा विवाद? कोर्ट ने क्यों रद्द की मुस्लिम पक्ष की दलीलें, और क्या क्या हटाने की तैयारी?
मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई सोमवार सुबह आक्रामक हो गई।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई सोमवार सुबह आक्रामक हो गई। इस कार्रवाई का विरोध करने बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्रित हुए। इस दौरान सुरक्षा बलों पर पथराव किए जाने की बात सामने आई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। साथ ही इलाके में बैरिकेडिंग की।

प्रशासन की टीम रविवार रात को जेसीबी और अन्य भारी मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गई थी। हालांकि, कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा हो गए। भीड़ के कारण रविवार रात कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

दरअसल, यह पूरा मामला सड़क चौड़ीकरण की योजना से जुड़ा है। प्रशासन का कहना है कि उज्जैन में मार्च 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को देखते हुए शहर की सड़कों और यातायात व्यवस्था को बेहतर किया जा रहा है। सिंहस्थ का आयोजन हर 12 साल में होता है और इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु क्षिप्रा नदी में स्नान करने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने पुश्तैनी मकान का हिस्सा हटाया

रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव भी सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के तहत अपने पुश्तैनी मकान का एक हिस्सा हटाने के लिए फावड़ा लेकर पहुंचे। उन्होंने इसे शहर के लोगों की ओर से विकास कार्य में सहयोग का उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में अलग-अलग समुदायों के लोगों ने सड़क चौड़ीकरण के लिए अपने धार्मिक स्थलों और अन्य निर्माणों को पीछे किया है। उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी समुदाय के लोगों ने भी इस काम में सहयोग किया है।

मस्जिद के पास जुटे लोग

रविवार रात शाही मस्जिद के आसपास समुदाय के लोग इकट्ठा हो गए। मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि मस्जिद और दूसरे धार्मिक स्थलों को सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई से बाहर रखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि यह मस्जिद करीब 1390 से अस्तित्व में है।

इमाम ने यह भी बताया कि मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी है।

हाईकोर्ट ने पहले क्या कहा था?

बता दें, इससे पहले इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को दो याचिकाएं खारिज कर दी थीं। याचिकाकर्ताओं ने खुद को मस्जिद से जुड़ा बताते हुए इसके प्रबंधन में अपनी भूमिका होने का दावा किया था। रिकॉर्ड के अनुसार, मस्जिद वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज है।

बता दें, वक्फ ऐसी संपत्ति को कहा जाता है जिसे कोई व्यक्ति स्थायी रूप से धार्मिक, पुण्य या परोपकारी कार्यों के लिए समर्पित करता है। इसमें जमीन, इमारतों के अलावा शिक्षण संस्थान और कृषि भूमि जैसी संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।

मस्जिद के किन हिस्सों को हटाने की योजना है?

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण की योजना में मस्जिद के प्रार्थना कक्ष यानी जमात खाना का एक हिस्सा, करीब 120 फीट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही को हटाया जाना प्रस्तावित है।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इस कार्रवाई से संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत मिले अधिकार प्रभावित होंगे। इनमें कानून के सामने समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक मामलों के प्रबंधन से जुड़े अधिकार शामिल हैं। एक याचिकाकर्ता ने नगर निगम की कार्रवाई को मनमाना भी बताया था।

नगर निगम ने क्या दलील दी?

नगर निगम की ओर से अदालत में कहा गया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। वक्फ बोर्ड को नोटिस देने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।

नगर निगम ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे सभी धार्मिक निर्माणों के साथ समान प्रक्रिया अपनाई जा रही है और इन्हें बड़े जनहित को ध्यान में रखते हुए हटाया या स्थानांतरित किया जा रहा है।

अदालत के आदेश के अनुसार, शहर में मास्टर प्लान के तहत करीब 80 धार्मिक स्थलों को हटाने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना है। इनमें से संबंधित सड़क पर 11 धार्मिक निर्माण पहले ही हटाए जा चुके हैं। इनमें 10 मंदिर और एक मस्जिद शामिल हैं।

कोर्ट ने याचिकाएं क्यों खारिज कीं?

हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के मामलों में प्रशासन को सर्वे, नोटिस और आपत्तियां सुनने जैसी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अदालत के अनुसार, इस मामले में नगर निगम ने जरूरी प्रक्रिया अपनाई और याचिकाकर्ता के साथ अलग तरह का व्यवहार नहीं किया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में कई ऐसे तथ्य हैं जिन पर विवाद है। इनमें याचिका दाखिल करने वाले व्यक्ति की कानूनी हैसियत से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। कोर्ट ने सिंहस्थ कुंभ 2028 को भी महत्वपूर्ण परिस्थिति माना। कोर्ट के मुताबिक इस आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, इसलिए शहर में बेहतर सुविधाएं और यातायात प्रबंधन जरूरी है।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि संबंधित परिसर महाकालेश्वर मंदिर के लगभग सामने और क्षिप्रा नदी के काफी नजदीक है। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की कार्रवाई जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद की गई है। इसी आधार पर दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।

Created On :   28 Sept 2026 5:55 PM IST

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